Donald Trump: क्या रूस-यूक्रेन युद्ध से अमेरिका को हुआ सबसे ज्यादा फायदा? डोनाल्ड ट्रंप भारत को ही क्यों बना रहे निशाना? पढ़ें पूरी खबर

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Photo Credit: Google, Donald Trump

Donald Trump: यह तो आप जानते होंगे कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत पर 50 फीसदी का टैरिफ लगा दिया है। इसके पीछे की वजह है कि भारत रूस से भारी मात्रा में कच्चा तेल खरीदता है, जिससे रूस को यूक्रेन के साथ जंग लड़ने में आर्थिक मदद मिल रही है। उधर, एक नई रिपोर्ट से पता चला है कि रूस और यूक्रेन के बीच युद्ध से अमेरिका को भी तगड़ा मुनाफा हुआ है। ‘NDTV’ की एक रिपोर्ट के मुताबिक, ऑब्जर्वर रिसर्च फाउंडेशन (ओआरएफ) के अनुसार, रूस के साथ यूक्रेन की जंग शुरू होने के बाद अमेरिका के सैन्य औद्योगिक क्षेत्र में भारी बढ़ोतरी हुई है। यूक्रेन की कुल हथियार खरीद का अमेरिका लगभग 45 फीसदी देता है।

Donald Trump प्रशासन ने यूक्रेन युद्ध से खूब कमाया लाभ

रिपोर्ट के मुताबिक, ‘ग्लोबल रक्षा खर्च 2024 में 9.4 प्रतिशत बढ़कर 2.72 ट्रिलियन डॉलर हो गया, जो शीत युद्ध की समाप्ति के बाद से सबसे अधिक सालाना वृद्धि को दर्शाता है। यह मुख्य रूप से यूक्रेन संघर्ष से प्रेरित है। यूक्रेन संघर्ष में अमेरिका ने अपने रक्षा-औद्योगिक आधार (डीआईबी) का लाभ उठाने की कोशिश की है, ताकि युद्ध के प्रयासों का समर्थन किया जा सके और यूक्रेनी सशस्त्र बलों (यूएएफ) को घरेलू स्तर पर उत्पादित हथियार, युद्ध सामग्री और अन्य सैन्य हार्डवेयर प्रदान किया जा सके, साथ ही अमेरिका और सहयोगी देशों के भंडार को फिर से भरा जा सके।’

रिपोर्ट में आगे बताया गया है कि यूक्रेन से होने वाला मुनाफा अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन के टाइम से शुरू हुआ था, जो कि डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन तक जारी है। साल 2020 और 2024 के बीच यूक्रेन दुनिया का सबसे बड़ा हथियार आयातक बन गया, जिसकी वैश्विक आयात में हिस्सेदारी 8.8 प्रतिशत थी। यह 2015-19 में सिर्फ 0.1 प्रतिशत थी, यानी 9,627 प्रतिशत की वृद्धि आई। इस अवधि के दौरान अमेरिका के कुल हथियार निर्यात का 9.3 प्रतिशत था।

डोनाल्ड ट्रंप ने बड़ी मात्रा में की यूक्रेन की सहायता

उधर, रिपोर्ट में पाया गया कि 2024 से और 2025 में भी अमेरिका ने आपूर्ति को प्रत्यक्ष सहायता से बिक्री की ओर स्थानांतरित करना शुरू कर दिया। अगस्त 2025 में अमेरिका ने यूक्रेन को संबंधित उपकरणों के साथ 3350 विस्तारित रेंज अटैक म्यूनिशन (ईआरएएम) मिसाइलों की 825 मिलियन डॉलर की बिक्री को मंजूरी दी।

बता दें कि इन बिक्री के लिए पैसा दुनिया का मजबूत सैन्य संगठन नाटो सहयोगियों (डेनमार्क, नॉर्वे, नीदरलैंड) और अमेरिकी विदेशी सैन्य वित्तपोषण (एफएमएफ) कार्यक्रमों से आता है, जो लोन तंत्र हैं, जिनमें पुनर्भुगतान शामिल हो सकता है लेकिन वे बिक्री हैं।’ ऐसे में अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने यूक्रेन युद्ध से बढ़िया फायदा उठाया। फिर रूस से कच्चा तेल खरीदने पर भारत के ऊपर 50 फीसदी का भारी-भरकम टैरिफ क्यों लगाया गया?

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