Donald Trump: स्विट्जरलैंड के दावोस में वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम के दौरान अमेरिकी राष्ट्रपति ने भारत और पीएम मोदी को लेकर कुछ ऐसा कहा, जिसने एक बार फिर हलचल मचा दी है। गौरतलब है कि डोनाल्ड ट्रंप लगातार ग्रीनलैंड लेने की चेतावनी दे रही है। साथ ही अपने यूरोप के कई देशों पर 10 प्रतिशत का टैरिफ लगा दिया है। यानि दुश्मन तो छोड़िए, ट्रंप अपने दोस्त को भी नहीं छोड़ रहे है। इसी बीच दावोस में एक बार फिर डोनाल्ड ट्रंप ने पीएम मोदी की जमकर तारीफ की है। इसके अलावा उन्होंने ट्रेड डील पर भी एक अहम जानकारी दी है, जो दोनों देशों के लिए एक गेमचेंजर साबित हो सकता है। हालांकि ट्रंप अचानक अपनी बात बदलने के लिए जानें जाते है। इसके अलावा उन्होंने नाटो पर भी जमकर अपनी प्रतिक्रिया दी है।
Donald Trump ने पीएम मोदी की जमकर तारीफ की
मनीकंट्रोल से एक्सक्लूसिव बातचीत में डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि “हम प्रधानमंत्री मोदी का सम्मान करते हैं, मोदी शानदार इंसान और मेरे अच्छे दोस्त हैं। उन्होंने कहा वह कि भारत के साथ जल्द अच्छी डील करने जा रहे हैं”। गौरतलब है कि अमेरिक और भारत के बीच बीते कई महीनों पर ट्रेड डील को लेकर कई अहम बैठकों हुई, हालांकि दोनों देशों के बीच सहमति नहीं बन पाई है।
लेकिन अब खुद ट्रंप ने साफ कहा कि वह जल्द भारत के साथ ट्रेड डील हो सकती है। मालूम हो कि अभी यूरोपीय यूनियन की अध्यक्ष 25 जनवरी को भारत पहुंचेगी और 77वें गणतंत्र दिवस समारोह में शामिल होंगी। इससे पहले उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने दावोस में कहा था कि भारत के साथ एक बड़ी डील हो सकती है। उन्होंने इस डील को ‘मदर ऑफ ऑल डील’ बताया। गौरतलब है कि यूरोप और अमेरिका के बीच रिश्तें कुछ खास अच्छे नजर नहीं आ रहे है। यूरोप और ट्रंप के बीच ग्रीनलैंड को लेकर एक अलग तरह की लड़ाई छीड़ गई है। माना जा रहा है कि इस वजह से यूरोप अब अन्य प्रमुख देशों के साथ संबंध अच्छे कर रहे है। हालांकि यह डील कई सालों से लंबित है।
नाटो पर क्या बोले डोनाल्ड ट्रंप?
विश्व आर्थिक मंच को संबोधित करते हुए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने कहा, “मैं ग्रीनलैंड और डेनमार्क दोनों के लोगों का बहुत सम्मान करता हूँ। लेकिन नाटो के हर सहयोगी देश का यह दायित्व है कि वह अपने क्षेत्र की रक्षा करने में सक्षम हो, और सच्चाई यह है कि संयुक्त राज्य अमेरिका के अलावा कोई भी राष्ट्र या राष्ट्रों का समूह ग्रीनलैंड को सुरक्षित करने की स्थिति में नहीं है। हम एक महान शक्ति हैं, जितनी लोग समझते भी नहीं हैं।
मुझे लगता है कि उन्हें दो सप्ताह पहले वेनेजुएला में इसका अनुभव हुआ। हमने द्वितीय विश्व युद्ध में भी यही देखा था, जब डेनमार्क मात्र छह घंटे की लड़ाई के बाद जर्मनी के हाथों हार गया था और वह न तो अपनी और न ही ग्रीनलैंड की रक्षा करने में पूरी तरह असमर्थ था। इसलिए संयुक्त राज्य अमेरिका को मजबूर होना पड़ा, हमने ऐसा किया, हमने इसे अपना दायित्व समझा, कि हम अपनी सेनाएँ ग्रीनलैंड क्षेत्र को अपने नियंत्रण में रखने के लिए भेजें और भारी कीमत चुकाएँ।”
