Emmanuel Macron: फ्रांस के राष्ट्रपति भारत पहुंच चुके है। वहीं आज इमैनुएल मैक्रों और पीएम मोदी की मुलाकात तय है। यह मुलाकात कई मायनों में काफी अहम होने जा रही है, इस दौरान रक्षा, तकनीक समेत कई मुद्दों पर मुहर लग सकती है। जो कई मायने में दोनों देशों के लिए एक गेमचेंजर साबित हो सकता है। हालांकि भारत और फ्रांस के रिश्ते पहले से ही काफी मजबूत है, क्योंकि फ्रांस से ही भारत ने राफेल खरीदे थे, वहीं माना जा रहा है कि मुलाकात के दौरान नए राफेल पर डील फाइनल हो सकती है। क्योंकि हाल ही में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में बड़ा संख्या में राफेल फाइटर जेट की मंजूरी मिली है। वहीं इमैनुएल मैक्रों के आने के बाद पीएम मोदी ने उनके स्वाग्त में ट्वीट किया।
Emmanuel Macron का भारत आगमन पर पीएम मोदी ने जताई खुशी
फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों भारत पहुंच चुके है। इसी बीच पीएम मोदी ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफार्म एक्स पर लिखा कि “भारत में आपका स्वागत है! भारत आपकी यात्रा का बेसब्री से इंतजार कर रहा है और हमारे द्विपक्षीय संबंधों को नई ऊंचाइयों पर ले जाने के लिए तत्पर है।
Welcome to India!
India looks forward to your visit and to advancing our bilateral ties to new heights. I am confident that our discussions will further strengthen cooperation across sectors and contribute to global progress.
See you in Mumbai and later in Delhi, my dear friend… https://t.co/5gDTDt6llp
— Narendra Modi (@narendramodi) February 17, 2026
मुझे विश्वास है कि हमारी चर्चाएँ विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग को और मजबूत करेंगी और वैश्विक प्रगति में योगदान देंगी। मुंबई में और बाद में दिल्ली में आपसे मुलाकात होगी, मेरे प्रिय मित्र”।
इमैनुएल मैक्रों के भारत दौरे से बढ़ी पाक, चीन की टेंशन
बता दें कि इमैनुएल मैक्रों के हालिया भारत दौरे ने दक्षिण एशिया की भू-राजनीति में नई हलचल पैदा कर दी है। भारत और फ्रांस के बीच बढ़ती सामरिक साझेदारी को देखते हुए पाकिस्तान और चीन दोनों की चिंताएँ बढ़ना स्वाभाविक मानी जा रही हैं। क्योंकि फ्रांस और भारत रक्षा क्षेत्र, उन्नत तकनीक, समुद्री सुरक्षा और एयरक्राफ्ट/पनडुब्बी समेत कई मुद्दों पर अहम डील कर सकता है।
भारत की बढ़ती सैन्य ताकत देख पाकिस्तान और चीन के होश उड़ गए है। मालूम हो कि भारत पहले से ही फ्रांस से राफेल लड़ाकू विमान खरीद चुका है और नौसेना सहयोग भी बढ़ रहा है। ऐसे में यह साझेदारी केवल व्यापारिक नहीं बल्कि रणनीतिक मानी जा रही है। विशेषज्ञ मानते हैं कि यह दौरा भारत को वैश्विक मंच पर और मजबूत करता है, जबकि चीन-पाकिस्तान धुरी के लिए रणनीतिक दबाव बढ़ाता है।
