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Iran Protest: विदेशी ताकतों का दखल या आर्थिक बदहाली! Gen Z के विरोध प्रदर्शन के बीच राष्ट्रपति के आरोप कितने सही? खामेनेई के लिए आगे क्या?

Iran Protest का प्रमुख कारण विदेशी ताकतों की दखल है या आर्खित बदहाली? मुल्क में सड़कों पर उतरी जेन-जी के विशाल विरोध प्रदर्शन के बीच ये सवाल तेजी से उठ रहे हैं।

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By: Gaurav Dixit

Published: जनवरी 2, 2026 1:49 अपराह्न

Iran Protest
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Iran Protest: तेहरान की सड़कों पर नौजवानों को हुजूम उमड़ा है। जेन जी सड़क पर उतरकर मौलवी शासन के खिलाफ नारे लगा रही है। इसका प्रमुख कारण मुल्क की बदहाल आर्थिक स्थिति है। हालांकि, राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ईरान प्रोटेस्ट को विदेशी ताकतों की दखल बता रहे हैं। तेहरान में मचे संग्राम के बीच सबकी नजरें सुप्रीम लीडर आयातुल्ला अली खामेनेई पर भी टिकी हैं।

सवाल उठ रहे हैं कि ईरान किस कारण से जल रहा है? क्या प्रदर्शन का कारण विदेशी दखल है या आर्थिक बदहाली मुल्क को हिंसा की ओर ढ़केल रही है? इस बीच राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन के आरोप कितने सही हैं? ऐसे तमाम सवाल हैं जो ईरान प्रोटेस्ट के संदर्भ में उठ रहे हैं। आइए इन सवालों का जवाब ढूंढ़ने की कोशिश करेंगे। साथ ही ये भी बताएंगे कि खामेनेई के लिए अब आगे क्या स्थिति हो सकती है।

ईरान में Gen Z के विरोध प्रदर्शन के बीच राष्ट्रपति पेजेशकियन के आरोप कितने सही?

तेहरान की सड़कों पर उतरी जेन जी मौलवी शासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी कर रही है। प्रदर्शनकारियों के निशाने पर सुप्रीम लीडर आयातुल्ला अली खामेनेई और उनका मौलवी शासन है। इस बीच ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने मुल्क की स्थिति को लेकर बड़ा आरोप लगाया है। प्रेसिडेंट पेजेशकियन का आरोप है कि ईरान में बिगड़ते हालात विदेशी ताकतों की हस्तक्षेप के कारण हैं। उनका मानना है कि विदेशी ताकतें फूट डालकर अपना फायदा चाहती हैं।

अब सवाल है कि पेजेशकियन के आरोप कितने सही हैं। दरअसल, ईरान में महंगाई आसमान छू रही है। दिसंबर, 2025 में ईरानी मुद्रा रियाल गिरकर 1.45 मिलियन प्रति अमेरिकी डॉलर पहुंच गई जो अब तक का सबसे निचला स्तर है। खाने-पीने से लेकर हर जरूरी वस्तुओं की कीमत महंगी हुई है। कनाडा, ब्रिटेन, अमेरिका, इजरायल, जपान, दक्षिण कोरिया और ऑस्ट्रेलिया ने ईरान पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया है।

इन तमाम पहलुओं का जिक्र करते हुए ईरानी आवाम प्रमुख रूप से जेन जी सड़कों पर उतर चुकी है। ऐसे में राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन का जेन जी विरोध प्रदर्शन को विदेशी ताकतों की हस्तक्षेप बताना गलत प्रतीत हो रहा है। प्रदर्शन की असल वजह मुल्क की आर्थिक बदहाली है जिसके लिए खामेनेई को जिम्मेदार माना जा रहा है।

सुप्रीम लीडर खामेनेई के लिए आगे क्या?

1989 से ईरान की सत्ता में काबिज सुप्रीम लीडर आयातुल्ला अली खामेनेई के लिए अब तक की सबसे बड़े चुनौती आ पड़ी है। जब इजरायल ने ईरान पर हमला किया था तब भी खामेनेई इतने परेशान नहीं रहे होंगे जितना अभी विरोध प्रदर्शन को लेकर होंगे। तेहरान की सड़कों पर उतरी जेन जी की मांग है कि मौलवी शासन यानी आयातुल्ला अली खामेनेई के शासन को खत्म किया जाए। कहीं-कहीं से क्राउन प्रिंस रेजा पहलवी को शासन सौंपने की मांग भी उठ रही है। अब देखना दिलचस्प होगा कि आयातुल्ला रूहोल्लाह खुमैनी (1979-1989) के बाद से मुल्क की कमान संभाल रहे खामेनेई आगे क्या करते हैं।

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Gaurav Dixit

गौरव दीक्षित पत्रकारिता जगत के उभरते हुए चेहरा हैं। उन्होनें चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय से अपनी पत्रकारिता की डिग्री प्राप्त की है। गौरव राजनीति, ऑटो और टेक संबंघी विषयों पर लिखने में रुची रखते हैं। गौरव पिछले दो वर्षों के दौरान कई प्रतिष्ठीत संस्थानों में कार्य कर चुके हैं और वर्तमान में DNP के साथ कार्यरत हैं।
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