Iran-US Tension: मिडिल ईस्ट में तकरार का दौर कम होने का नाम नहीं ले रहा। तेहरान में हुए विरोध प्रदर्शन के बाद अमेरिका-ईरान फिर आमने-सामने हैं। प्रेसिडेंट ट्रंप की तमाम धमकियों के बीच ईरानी सुप्रीम लीडर अली खामेनेई अपनी रणनीतियों को साधने में जुटे हैं। इसी बीच ईरान ने युद्धाभ्यास के लिए स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को बंद कर दुनिया को चौंका दिया है।
फारस की खाड़ी को ओमान की खाड़ी और हिंद महासागर से जोड़ने वाले स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के बंद होने से दुनिया प्रभावित हो रही है। सऊदी अरब, कुवैत, कतर, इराक जैसे देश ऊर्जा और कच्चे तेल के निर्यात के लिए इसी संकरे मार्ग पर निर्भर हैं। यही वजह है कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को लेकर अली खामेनेई के मास्टर प्लान ने दुनिया भर में तनाव बढ़ा दिया है।
सऊदी अरब, इराक, कुवैत समेत इन देशों पर असर डाल रहा Iran-US Tension
मुल्ला शासन के खिलाफ तेहरान में हुए विरोध प्रदर्शन के बाद अमेरिका-ईरान आमने-सामने हैं। इस तकरार का असर दुनिया पर पड़ता नजर आ रहा है। दरअसल, ईरान ने सधी रणनीति के तहत फारस की खाड़ी में स्थित स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को अस्थायी रूप से बंद कर दिया है। यहां ईरानी नौसेना युद्धाभ्यास पर जोर दे रही है। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से आवागमन प्रभावित होना दुनिया के कई देशों पर असर डाल रहा है। ईरानी हुकूमत के एक फैसले से सऊदी अरब, कतर, यूएई और इराक जैसे मुल्क प्रभावित हैं।
ये सभी मुल्क स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के रास्ते ही ऊर्चा स्रोत और कच्चे तेल का निर्यात करते हैं। इस निर्यात पर सऊदी, कतर, यूएई और इराक की अर्थव्यवस्था टिकी है। ऐसे में ईरानी हुकूमत द्वारा स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में युद्धाभ्यास करना इन देशों को प्रभावित कर रहा है। यदि संकरे मार्ग पर प्रतिबंध जारी रहा, तो दुनिया भर में ऊर्जा सप्लाई प्रभावित होगी। इससे वैश्विक स्तर पर तेल की कीमतों में उछाल आ सकता है। ऐसे तमाम देश जो ऊर्जा जरूरतों के लिए खाड़ी देशों पर निर्भर हैं, वे प्रभावित हो सकते हैं।
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर खामेनेई के मास्टर प्लान ने बढ़ाया तनाव
ईरानी सुप्रीम लीडर अली खामेनेई के मास्टर प्लान ने दुनिया में तनाव बढ़ा दिया है। युद्धाभ्यास के लिए फारस की खाड़ी में स्थित स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को चुनना इसका अहम हिस्सा है। फारस की खाड़ी में स्थित ये संकरा मार्ग दुनिया भर में ऊर्जा सोर्स के निर्यात का केन्द्र है। चीन, भारत, जापान, कोरिया समेत विश्व के कई देश कच्चे तेल की सप्लाई के लिए खाड़ी देशों पर निर्भर हैं।
ऐसे में खामेनेई द्वारा इसी संकरे मार्ग पर युद्धाभ्यास करने की अनुमति देना उनके सटीक प्लान को दर्शाता है। दुनिया भर में सनसनी पैदा कर अली खामेनेई अमेरिका पर दबाव डालना चाहते हैं। हालांकि, प्रेसिडेंट ट्रंप किसी भी कीमत पर झुकने को तैयार नही हैं। ऐसे में अब देखना दिलचस्प होगा कि ईरानी हुकूमत के इस फैसले का आगे क्या असर होता है।






