Iran-US Tensions: मिडिल ईस्ट में पसरा तनाव अब अपने अंतिम दौर में है। ऐसा लग रहा है किसी भी क्षण ईरान और अमेरिका के बीच युद्ध की शुरुआत हो सकती है। तेहरान में हुए विरोध प्रदर्शन के बाद ईरानी हुकूमत के नाक में दम कर रही अमेरिका युद्ध के लिए लगभग तैयार है। अमेरिकी मीडिया आउटलेट एक्सियोस की रिपोर्ट में इसका जिक्र है।
रिपोर्ट के मुताबिक अमेरिकी सेना ने प्रेसिडेंट डोनाल्ड ट्रंप के समक्ष युद्ध की संभावित मास्टर प्लानिंग पेश की है। इसमें ईरानी सुप्रीम लीडर अली खामेनेई के साथ उनके संभावित उत्तराधिकारी और बेटे मोजतबा खामेनेई का खात्मा करने का जिक्र है। अमेरिकी मिलिट्री प्रेसिडेंट ट्रंप के निर्देशों का इंतजार कर रही है। यदि एक्सियोस की रिपोर्ट में दम है, तो तेहरान में जल्द हाहाकार मच सकता है।
अली खामेनेई के साथ मोजतबा को भी मारने की प्लानिंग?
ईरान और अमेरिका के बीच छिड़ा संघर्ष का दौर अब अंतिम चरण में है। दोनों देशों की सेनाएं आमने-सामने खड़ी हैं। बस इंतजार है उपरी फरमान है जिसके बाद विध्वंसक युद्ध छिड़ने की आशंका की है। इसी बीच अमेरिकी मीडिया आउटलेट एक्सियोस की खबर है कि अमेरिकी मिलिट्री ने हमले की प्लानिंग प्रेसिडेंट डोनाल्ड ट्रंप के समक्ष रख दी है।
अमेरिकी प्लानिंग के तहत सेना अली खामेनेई के साथ उनके संभावित उत्तराधिकारी और बेटे मोजतबा खामेनेई का खात्मा भी कर सकती है। रिपोर्ट में ट्रंप के एडवाइजर के हवाले से कहा गया है कि जिन संभावित स्थितियों पर बात हुई, उनमें से एक खामेनेई और उनके बटे मोजतबा को खत्म करना भी शामिल था। यानी की अमेरिकी मिलिट्री ईरान में तबाही मचाने को पूरी तरह से तैयार है।
हालांकि, प्रेसिडेंट ट्रंप ने सभी विकल्प खुले रखे हैं। उन्होंने पहले भी ईरान में सैन्य विकल्प की बात कही थी। फिर वो समय के साथ योजना में बदलाव करते नजर आए। प्रेसिडेंट ट्रंप के सलाहकारों के मुताबिक वे अंतत: क्या चुनते हैं, ये कोई नहीं जानता। ऐसे में ईरान पर अमेरिका का रुख क्या होगा ये उचित समय आने पर ही स्पष्ट हो सकेगा। फिलहाल कयासों के हवाले से कई तरह की बात चल रही है।
अमेरिकी मिलिट्री की योजना से तेहरान में हाहाकार!
ईरान की राजधानी तेहरान वैसे ही अलर्ट पर है। अमेरिकी फाइटर जेट्स मुल्क की चौतरफा घेराबंदी किए हुए हैं। इसी बीच खबर है कि अमेरिकी मिलिट्री अली खामेनेई के साथ मोजतबा खामेनेई के खात्मे की प्लानिंग कर रही है। इसको लेकर तेहरान में अंदरखाने हाहाकार सी है। मौलवी शासन के तमाम शीर्ष लोग पहले ही चेत गए हैं। सबको पता है कि यदि परमाणु डील पर बात नहीं बनी, तो अमेरिका आगे कुछ भी कर सकता है। फिलहाल सबकी नजरें प्रेसिडेंट ट्रंप पर टिकीं हैं कि वे आगे क्या मंजूरी देते हैं।
