Trump’s Greenland Gambit: अमेरिका की पूरी नजर अब ग्रीनलैंड पर टिक गई है। ऐसा लग रहा है मानों ईरान से जुड़े प्रकरण पर ब्रेक लग गया है। अब ईरान-अमेरिका के आमने-सामने आने से इतर सारी चर्चा अमेरिका-ग्रीनलैंड के बीच जारी उठा-पटक पर हो रही है।
सवाल उठ रहे हैं कि क्या शांतिदूत डोनाल्ड ट्रंप ग्रीनलैंड पर कब्जा के लिए सब कुछ दांव पर लगाने को तैयार हैं? क्या अमेरिका दुनियादारी को ताख पर रख कर ग्रीनलैंड पर कब्जा करेगा? ये सवाल शेयर बाजार में मची हलचल के साथ डॉलर की गिरती साख को लेकर भी उठ रहे हैं। डोनाल्ड ट्रंप इन सारे पहलुओं को नजर अंदाज कर सिर्फ और सिर्फ ग्रीनलैंड पर नजर जमाए हुए हैं।
क्या शांतिदूत ट्रंप ग्रीनलैंड पर कब्जा के लिए दांव पर लगा रहे सब कुछ?
एक ओर ग्रीनलैंड की आम जनता और राजनेता हैं, जो लगातार अमेरिका के खिलाफ मुखर हैं। ग्रीनलैंड इज नॉट फॉर सेल जैसे नारे गूंज रहे हैं। दूसरी ओर डोनाल्ड ट्रंप अपनी धुन में मुल्क पर पैनी नजर जमाए हुए हैं। वेनेजुएला और ईरान के बाद ग्रीनलैंड मानों अमेरिका की नजर में धंस गया हो। यही वजह है कि लगातार मुल्क पर कब्जा करने की जंग जारी है।
तमाम आलोचना और दुनियाभर में मचे हो-हल्ला के बीच डोनाल्ड ट्रंप का लक्ष्य स्पष्ट नजर आ रहा है। शांतिदूत ट्रंप सब कुछ दांव पर लगाकर ग्रीनलैंड पर कब्जा जमाना चाहते हैं। इसकी प्रमुख वजह है ग्रीनलैंड में मौजूद खनिज संपदा जो अमेरिकी प्रभुत्व को और बढ़ा सकते है। यही वजह है कि ट्रंप ने यूरोपीय संघ देशों पर टैरिफ भी ठोंक दी है। इससे इतर वे चीन-रूस के पर कतरने में लग गए हैं।
डॉलर की साख के साथ शेयर बाजार भी धड़ाम
ताजा आंकड़ों के मुताबिक ग्रीनलैंड को लेकर अमेरिका का आक्रामक रुख वैश्विक बाजार को प्रभावित कर रहा है। समाचार एजेंसी रॉयटर्स की मानें तो मंगलवार को शेयर बाजार में गिरावट आई। वहीं डॉलर भी लगातार दूसरे दिन गिरा और अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड चार महीने के उच्चतम स्तर पर पहुंच गई। इससे इतर नैस्डैक और एसएंडपी में 1 फीसदी से अधिक की गिरावट आई।
दुनिया भर में इस उठा-पटक का अंदाजा हो रहा है। विशेषज्ञों की मानें तो बाजार फिलहाल यह संकेत दे रहे हैं कि उनके कार्य निवेशकों और अर्थव्यवस्था के लिए बुरे हैं। ये सब कुछ अमेरिका के आक्रामक रुख के कारण है। यही वजह है कि डोनाल्ड ट्रंप द्वारा सब कुछ दांव पर लगाकर ग्रीनलैंड पर कब्जा जमाने की हसरत के संदर्भ में सवाल उठ रहे हैं।





