US-Israel-Iran War में बीचौलिये की भूमिका निभा रहे पाकिस्तान की फजीहत! एस जयशंकर ने भी लगाई क्लास; जवाब सुन मुंह छिपाएंगे मुनीर

US-Israel-Iran War के बीच बीचौलिये की भूमिका निभा रहे पाकिस्तान की चौतरफा क्लास लग रही है। ईरान द्वारा पाकिस्तान का शांति प्रस्ताव ठुकराए जाने के बाद भारतीय विदेश मंत्री ने भी पड़ोसी मुल्क को फटकार लगाई है।

US-Israel-Iran War

Picture Credit: गूगल (सांकेतिक तस्वीर)

US-Israel-Iran War: पश्चिम एशिया में छिड़े संघर्ष के बीच दुनिया की नजरें पाकिस्तान पर हैं। दरअसल, कंगाली की मार झेल रहा पाकिस्तान यूएस-इजरायल-ईरान वॉर के बीच बीचौलिये की भूमिका निभाने को बेताब है। पीएम शहबाज शरीफ ने तो आतंकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद को शांति वार्ता के लिए स्पॉट भी घोषित कर दिया।

हालांकि, ईरान ने पाकिस्तान के प्रस्ताव को ठुकराते हुए पड़ोसी मुल्क की घनघोर बेइज्जती की है। भारतीय विदेश मंत्री एस जयशंकर ने भी पाकिस्तान की इस पहल पर हुक्मरानों को फटकारा है। एस जयशंकर ने यूएस-इजरायल-ईरान वॉर के बीच भारत की मध्यस्थता पर तल्ख जवाब दिया है। उन्होंने साफ किया है कि भारत पाकिस्तान जैसे दलाल देश नहीं है।

मध्यस्थता को आतुर पाकिस्तान को भारतीय विदेश मंत्री की फटकार!

भारतीय विदेश मंत्री एस जयशंकर ने बीते कल नई दिल्ली में सर्वदलीय बैठक के दौरान पाकिस्तान को फटकार लगाई है। एस जयशंकर ने उस सवाल का जवाब दिया जिसमें यूएस-इजरायल-ईरान वॉर के बीच भारत की मध्यस्थता से जुड़ी कड़ी सामने आई थी। विदेश मंत्री ने इसे सिरे से खारिज किया। उन्होंने साफ तौर पर कहा कि भारत पाकिस्तान की तरह दलाल राष्ट्र नहीं है।

विदेश मंत्री की ये तल्ख टिप्पणी पड़ोसी मुल्क के पीएम शहबाज शरीफ के साथ विदेश मंत्री इशाक डार, रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ और सीडीएफ आसिम मुनीर के मुंह पर करारा तमाचा है। एस जयशंकर का पक्ष सुन सीडीएफ मुनीर मुंह छिपाए फिर रहे होंगे। विदेश मंत्री ने स्पष्ट किया है कि भारत किसी भी तरह की मध्यस्थता की भूमिका नहीं निभाएगा।

तेहरान ने भी US-Israel-Iran War के बीच पाकिस्तानी प्रस्ताव को ठुकराया! 

नए सुप्रीम लीडर बने मोजतबा खामेनेई के नेतृत्व वाली ईरानी हुकूमत ने भी पाकिस्तान की क्लास लगाई है। तेहरान ने पाकिस्तान के उस प्रस्ताव को ठुकरा दिया है जिसमें इस्लामाबाद में शांति वार्ता की पहल की गई थी। तेहरान की हुकूमत ने यूएस-इजरायल-ईरान वॉर सीजफायर के लिए अपनी प्रमुख शर्तें रखी हैं।

तेहरान की ये पहल पाकिस्तानी हुकूमत के मुंह पर करारा तमाचे के समान है। ये दर्शाता है कि कैसे वैश्विक मंच पर पाकिस्तान अपनी आतुरता के कारण बार-बार बेइज्जत हो रहा है। बावजूद इसके पड़ोसी मुल्क के हुक्मरानों की बेशर्मी जारी है। अब देखना दिलचस्प होगा कि इतनी बेइज्जती के बाद भी पाकिस्तान आगे क्या रुख अपनाता है।

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