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Startup India: सफल स्टार्टअप्स की कहानी जो भारत के लिए साबित हुए गेमचेंजर, देखें 2014 से पहले और बाद का विश्लेषण; चेक करें डिटेल

Startup India: भारत में स्टार्टअप्स की संख्या में लगातार बढ़ोतरी हो रही है, जो भारत की अर्थव्यवस्था के लिए एक गेमचेंजर साबित हुआ है। स्टार्टअप की बात करें तो 2014 में इंडिया के पास कुल मिलाकर सिर्फ चार यूनिकॉर्न्स थे। यूनिकॉर्न्स यानी वो कंपनीज़ जिनकी वैल्यू $1 बिलियन डॉलर से ज्यादा होती है। जिसमे केवल ...

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By: Anurag Tripathi

Published: जनवरी 18, 2026 4:48 अपराह्न | Updated: जनवरी 18, 2026 6:46 अपराह्न

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Startup India: भारत में स्टार्टअप्स की संख्या में लगातार बढ़ोतरी हो रही है, जो भारत की अर्थव्यवस्था के लिए एक गेमचेंजर साबित हुआ है। स्टार्टअप की बात करें तो 2014 में इंडिया के पास कुल मिलाकर सिर्फ चार यूनिकॉर्न्स थे। यूनिकॉर्न्स यानी वो कंपनीज़ जिनकी वैल्यू $1 बिलियन डॉलर से ज्यादा होती है। जिसमे केवल InMobi, Flipkart, Snapdeal और Ola शामिल थे। हालांकि 2014 से पहले पेटीएम, जोमेटो, ओला, बिग बास्केट समेत कई स्टार्टअप शुरू हो चुके थे, लेकिन इन्हें असली पहचान 2014 के बाद ही मिली। आज इस लेख के माध्यम से आपको बताएंगे 2014 से पहले और बाद का विश्लेषण।

2014 से पहले कितनी थी स्टार्टअप्स की संख्या? – Startup India

जानकारी के मुताबिक 2014 से पहले भारत में लगभग 350 स्टार्टअप थे, जिसमे पेटीएम समेत कई बड़े स्टार्टअप शामिल है, जो 2014 के बाद यूनिकॉर्न बने। उस समय स्टार्टअप इकोसिस्टम अभी शुरुआती दौर में था — सीमित फंडिंग, कम मेंटरशिप, अपरिचित मार्केट और तकनीकी सहायता का अभाव था। यही कारण था कि कंपनियों को ग्रोथ नहीं मिल पा रही थी। इसके अलावा 2014 तक केवल चार यूनिकॉर्न्स थे। गौरतलब है कि 2014 से पहले स्टार्टअप को लेकर किसी प्रकार की स्पष्ट नीति नहीं थी। सबसे बड़ी बात थी कि नए उद्यमियों को वहीं नियम मानने पड़ते थे, जो बड़ी कंपनियां पर लागू होते थे। जिसकी वजह से अगर कोई स्टार्टअप करना चाहता भी था तो वहीं वह अपना पैर पीछ खीच लेता था।

2014 के बाद स्टार्टअप में आया बूम

आज 2 लाख से ज्यादा स्टार्टअप्स और $350 बिलियन डॉलर से ज्यादा की वैल्यू्यूएशन के साथ इंडिया दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा स्टार्टअप इकोसिस्टम बन चुका है। डीपीआईआईटी के आंकड़ों के मुताबिक आज लगभग 50% स्टार्टअप्स टियर टू और टियर थ्री सिटीज से आते हैं। यह स्टार्टअप सिर्फ देश की इकॉनमी में ही योगदान नहीं दे रहे बल्कि बड़े शहरों और गांवों के बीच के गैप को भी कम कर रहे हैं। और यह सब मुमकिन हुआ है इंडिया में इंटरनेट बूम, आसान ऑनलाइन पेमेंट सिस्टम और यंग टैलेंट की वजह से आया है। यानि यह कहना गलत नहीं होगा कि 2014 के बाद स्टार्टअप को एक नई पहचान मिली है। इन 10 सालों में करीब 2 लाख स्टार्टअप शुरू हुए है। जिसमे 2026 तक करीब 124 यूनिकॉर्न स्टार्टअप बन चुके है, जो अपने आप में एक बड़ी उपलब्धि है।

इन वजहों से मिली नई रफ्तार – Startup India

पहले भारत सरकार द्वारा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में 16 जनवरी 2016 को स्टार्टअप इंडिया की शुरूआत की गई थी। जिसके मकसद आसान कानूनी और वित्तीय माहौल तैयार करना था, जिसका असर भी देखने को मिला, 2014 से अभी तक करीब 2 लाख के आसपास स्टार्टअप शुरू हुए है। जबकि यह आंकड़ा 2014 से पहले 350 के आसपास थे। इसके अलावा आज हर सेक्टर में स्टार्टअप शुरू हो रहे है, जो भारतीय अर्थव्यवस्था को सीधा फायदा पहुंचा रहे है। इन सब का ही नतीजा है कि भारत आज दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन चुका है, और तीसरी की और अग्रसर है। यानि यह साफ है कि 2014 के बाद स्टार्टअप सेक्टर में एक अलग तरह की क्रांति आई।

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Anurag Tripathi

अनुराग त्रिपाठी को पत्रकारिता का 2 साल से अधिक का अनुभव है। उन्होंने महर्षि दयानंद यूनिवर्सिटी से अपनी पत्रकारिता की डिग्री प्राप्त की है। वह बिजनेस, यूटिलिटी, पॉलिटिक्स विषयों पर लिखने में रूचि रखते है। वर्तमान में वह डीएनपी इंडिया के साथ कार्यरत है।
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