US-Israel-Iran-War के बीच डोनाल्ड ट्रंप की नई चाल से बढ़ी टेंशन, मीडिल ईस्ट में उतरे 3500 से अधिक अमेरिकी सैनिक, जानें सबकुछ

US-Israel-Iran-War: मीडिल ईस्ट में जारी युद्ध ने लोगों की टेंशन बढ़ा दी है। दुनिया के कई देशों में एनर्जी संकट गहराने लगा है।

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फाइल फोटो

US-Israel-Iran-War: मीडिल ईस्ट में जारी युद्ध ने लोगों की टेंशन बढ़ा दी है। दुनिया के कई देशों में एनर्जी संकट गहराने लगा है। जिसका असर भारत में भी देखने को मिल रहा है, और स्थिति बेहद चिंताजनक बनी हुई है। एक तरफ अमेरिका और इजरायल लगातार ईरान पर हमला कर रहे है, तो वहीं दूसरी तरफ ईरान भी मुहंतोड़ जवाब दे रहा है, जिसके बाद स्थिति बहुत चिंताजनक बनी हुई है।

वहीं अब खबर आ रही है कि ईरान के साथ संघर्ष तेज होने के कारण अमेरिका मध्य पूर्व में अपनी सैन्य उपस्थिति बढ़ा रहा है और 3500 से अधिक सैनिकों को तैनात कर रहा है। जिसके बाद माना जा रहा है कि ग्राउंड लेवल पर भी युद्ध शुरू हो सकता है। अगर ऐसा होता है, तो दुनियाभर में स्थिति और भयावह होने जा रही है।

US-Israel-Iran-War के बीच डोनाल्ड ट्रंप की नई चाल से बढ़ी टेंशन

बता दें कि ईरान पहले भी कह चुका है कि अमेरिका जमीनी रास्ते अपने सैनिकों को भेज सकता है। यूएस सेंट्रल कमांड ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफार्म एक्स पर कहा कि “यूएसएस त्रिपोली (एलएचए 7) पर सवार अमेरिकी नौसैनिक और मरीन सैनिक 27 मार्च को अमेरिकी केंद्रीय कमान के जिम्मेदारी क्षेत्र में पहुंचे।

अमेरिका श्रेणी का यह उभयचर हमलावर जहाज त्रिपोली एम्फीबियस रेडी ग्रुप/31वीं मरीन एक्सपेडिशनरी यूनिट का प्रमुख पोत है, जिसमें लगभग 3,500 नौसैनिक और मरीन सैनिकों के साथ-साथ परिवहन और लड़ाकू विमान, उभयचर हमले और सामरिक सामग्रियां भी शामिल हैं”। जिसके बाद कयासों का बाजार गर्म हो गया है कि क्या अमेरिका अब जमीनी युद्ध लड़ने वाला है।

युद्ध आगे बढ़ा तो होंगी ये मुश्किलें

मिडिल ईस्ट में जारी युद्ध आगे बढ़ता है, तो इसका असर सिर्फ क्षेत्र तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पूरी दुनिया को कई गंभीर चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है। संयुक्त राज्य अमेरिका, इज़राइल और ईरान के बीच बढ़ती तनातनी ने पहले ही वैश्विक चिंता बढ़ा दी है। ऐसे में अगर युद्ध और आगे बढ़ता है, तो ये बड़ी मुश्किलें सामने आ सकती हैं।

युद्ध के कारण अंतरराष्ट्रीय व्यापार बाधित होगा, शेयर बाजारों में गिरावट आ सकती है और कई देशों की आर्थिक स्थिति कमजोर हो सकती है। खासकर विकासशील देशों के लिए यह बड़ा झटका साबित होगा। जिसमे भारत भी शामिल है। साथ ही स्थिति बेहद चिंताजनक बनी हुई है।

 

 

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