US Iran Pakistan Talks: इस्लामाबाद की सड़कों पर सुरक्षा चाकचौबंध है। अमेरिकी उपराष्ट्रपति के विमान को पाकिस्तनी लड़ाकू विमान कवर दे रहे हैं। ऐसी तमाम तस्वीरें भारत के पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान से आई हैं जहां अमेरिका-ईरान के बीच शांति वार्ता प्रस्तावित है। यूएस-इजरायल-ईरान वॉर के बाद अंतत: सीजफायर ऐलान हो चुका है और दो मुल्क आमने-सामने हैं।
इस्लामाबाद में शांति वार्ता को लेकर जारी तैयारियों के बीच लेबनान पर फिर इजरायली हमले की खबर है। लेबनान में हुआ ये हमला पाकिस्तान के मुंह पर झन्नाटेदार तमाचा के समान है। आईडीएफ के हमलों से सीजफायर पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं। सवाल उठ रहे हैं कि इजरायल का तल्ख रुख दुनिया को किस मुहाने पर ले जाएगा? क्या युद्धविराम पर बात बनेगी या स्थिति और गंभीर होगी? आइए इन सवालों का जवाब ढूंढ़ते हैं।
इस्लामाबाद में शांति वार्ता के बीच लेबनान पर IDF का कहर!
पड़ासी मुल्क की राजधानी में अमेरिका और ईरान के प्रतिनिधियों के बीच शांति वार्ता जारी है। पाकिस्तान इसमें मध्यस्थता की भूमिका निभा रहा है। इस बीच खबर है कि लेबनान में इजरायली वायु सेना ने जोरदार हमला किया है। समाचार एजेंसी रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक इजरायल की ओर से साउथ लेबनान के नबातीह के मेफादौन कस्बे की एक रिहायशी इमारत को निशाना बनाया गया है।
समाचार एजेंसी की मानें तो इस हमले में 3 लोगों की मौत हुई है, जबकि कई घायल बताए जा रहे हैं। इजरायल का ये हमला पाकिस्तान के मुंह पर झन्नाटेदार तमाचा के समान है जो बढ़-चढ़कर यूएस-इजरायल-ईरान वॉर के बीच हुए सीजफायर ऐलान का श्रेय ले रहा है। 14 अप्रैल को प्रस्तावित लेबनान-इजरायल वार्ता से पहले आईडीएफ का जोरदार हमला युद्धविराम समझौतों पर संकट के बादल की तरह मंडरा रहा है।
समझौते पर मंडराए संकट के बादल!
एक ओर दुनिया की नजरें इस्लामाबाद में प्रस्तावित शांति वार्ता पर टिकीं हैं। यहां अमेरिकी उपराष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और ईरानी विदेश मंत्री अराघची के नेतृत्व में दोनों देशों के डेलिगेशन पहुंचे हैं। पश्चिम एशिया में छिड़े संघर्ष पर पहले ही युद्धविराम के ऐलान हो चुके हैं। हालांकि, इस पर पूर्णविराम की कोशिश लगातार जारी है। इसी बीच इजरायल बगावती रुख अपनाता नजर आ रहा है।
इजरायल ने इस्लामाबाद में जारी शांति वार्ता के बीच ही लेबनान पर हमला किया है। ईरान पहले भी लेबनान पर जारी इजरायली हमलों को लेकर आपत्ति जता चुका है। यही वजह है कि अमेरिका-ईरान के मध्य जारी समझौतों पर खतरों के बादल मंडरा रहे हैं। यही ईरान और इजरायल अपने अडिग रवैये पर कायम रहे, तो सारी वार्ता व्यर्थ हो सकती है और मिडिल ईस्ट में फिर एक बार तनाव देखने को मिल सकता है।





