US-Israel-Iran-War: ‘ऊर्जा की कीमतें…’ कतर के ऊर्जा मंत्री Saad al-Kaabi के बयान से दुनिया में मचा हड़कंप, भारत को लेकर भी एक्सपर्ट ने जताई चिंता

US-Israel-Iran-War: मीडिल ईस्ट में जारी युद्ध धीरे-धीरे और भीषण होता जा रहा है। इसका असर दुनिया के कई देशों पर पड़ना शुरू हो गया है।

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फाइल फोटो

US-Israel-Iran-War: मीडिल ईस्ट में जारी युद्ध धीरे-धीरे और भीषण होता जा रहा है। सबसे खास बात है कि अब इसका असर दुनिया के कई देशों पर पड़ना शुरू हो गया है। जिसने लगातार टेंशन बढ़ा दी है। इसी बीच कतर के ऊर्जा मंत्री का एक ऐसा बयान आया है, जिसने दुनिया के देशों के बीच हड़कंप मचा दिया है। फाइनेंशियल एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट के मुताबिक कतर के ऊर्जा मंत्री ने भविष्यवाणी की है कि यदि जहाज और टैंकर होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने में असमर्थ रहे तो दो से तीन सप्ताह में कच्चे तेल की कीमतें 150 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच सकती हैं। चलिए आपको बताते है कि भारत पर इसका क्या असर पड़ने वाला है? और एक्सपर्ट क्या कह रहे है?

US-Israel-Iran-War के बीच कतर के ऊर्जा मंत्री का बड़ा बयान

फाइनेंशियल एक्सप्रेस से बात करते हुए कतर के ऊर्जा मंत्री साद अल-काबी ने कहा कि “जिन लोगों ने अभी तक अप्रत्याशित परिस्थितियों (फोर्स मेज्योर) का हवाला नहीं दिया है, हमें उम्मीद है कि अगर यह स्थिति बनी रहती है तो वे अगले कुछ दिनों में ऐसा करेंगे। खाड़ी क्षेत्र के सभी निर्यातकों को अप्रत्याशित परिस्थितियों का हवाला देना होगा। अगर यह युद्ध कुछ हफ्तों तक जारी रहता है, तो दुनिया भर में जीडीपी प्रभावित होगी। हर किसी की ऊर्जा कीमतें बढ़ेंगी”।

कुछ उत्पादों की कमी होगी और कई कारखाने आपूर्ति करने में असमर्थ हो जाएंगे, जिससे हमारी सभी विस्तार योजनाओं में निश्चित रूप से देरी होगी। अगर हम एक हफ्ते में वापस सामान्य स्थिति में आ जाते हैं, तो शायद इसका प्रभाव कम से कम होगा, लेकिन अगर यह एक या दो महीने तक चलता है, तो स्थिति अलग होगी।”

भारत को लेकर भी एक्सपर्ट ने जताई चिंता

मिडिल ईस्ट में बढ़ते युद्ध (खासकर अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच तनाव) के बीच कई विशेषज्ञों ने भारत को लेकर चिंता जताई है। उनकी चिंता मुख्यतः ऊर्जा सप्लाई, भारतीय नागरिकों की सुरक्षा और अर्थव्यवस्था से जुड़ी है। कुछ रिपोर्टों में यह भी कहा गया कि कतर में एलएनजी उत्पादन रुकने से गैस सप्लाई पर असर पड़ सकता है, जिससे भारत में ऊर्जा संकट की आशंका बढ़ सकती है। माना जा रहा है कि अगर युद्ध लंबा चला तो तेल-गैस की कीमतों में जबरदस्त वृद्धि हो सकती है। इसके अलावा अर्थव्यवस्था और व्यापार में दबाव पड़ सकता है। यानि जिससे भारत की आर्थिक गति को नुकसान हो सकता है।

 

 

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