US-Israel-Iran War: मिडिल ईस्ट में तबाही का मंजर पूरी दुनिया को आकर्षित कर रहा है। अमेरिका-इजरायल द्वारा संयुक्त रूप से ईरान पर किए गए हमले की चोट पूरी दुनिया पर पड़ती नजर आ रही है। खाड़ी देशों से इतर पश्चिम एशिया में भी ईंधन संकट गहराता नजर आ रहा है। ईरान द्वारा युद्ध के पश्चात स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को बंद करना बड़े पैमाने पर कच्चे तेल की सप्लाई को प्रभावित कर रहा है।
यूएस-इजरायल-ईरान वॉर का असर ये है कि मिडिल ईस्ट से कच्चा तेल आयात करने वाले देश विकल्प की तलाश कर रहे हैं। इसी बीच खबर है कि अमेरिका ने भारत को भी रूस से कच्चा तेल खरीदने की अनुमति दी है। भारत को मिली 30 दिनों की छूट सवालों में है। पूछा जा रहा है कि अमेरिका भारत को निर्देशित करने वाला होता कौन है? आइए इस सवाल का जवाब ढूंढ़ने के साथ यूएस-इजरायल-ईरान वॉर से जुड़े लेटेस्ट अपडेट पर चर्चा करते हैं।
मिडिल ईस्ट में हाहाकार के बीच सवालों में भारत को रूसी तेल खरीदने की अनुमति!
मध्य पूर्व में हिंसा की आग लगातार फैल रही है। ईरानी सुप्रीम लीडर आयातुल्लाह अली खामेनेई की मौत के बाद भी ईरानी सेना हथियार नहीं डाल रही। ईरान की ओर से अमेरिका-इजरायल के संयुक्त हमले का जवाब दिया जा रहा है। युद्ध की स्थिति ने मिडिल ईस्ट में ईंधन संकट को गहरा दिया है। आलम ये है कि पश्चिम एशिया के कई देशों में हाहाकार की स्थिति हो गई है।
मामले की गंभीरता को देखते हुए अमेरिका ने भारत को रूस से कच्चा तेल खरीदने की छूट दी है। खबरों की मानें तो ये छूट अगले 30 दिनों के लिए है। हालांकि, अमेरिकी अनुमति को लेकर सवाल भी उठ रहे हैं। जो भारत हर कदम राष्ट्रहित को ध्यान में रखते हुए कदम उठाता है। अमेरिका उसे अनुमति देने वाला होता कौन है? मिडिल ईस्ट में अस्थिरता का कारण बने अमेरिका की इसी रुख पर सवाल उठे हैं।
खाड़ी देशों से लेकर मिडिल ईस्ट तक गहराया ईंधन संकट!
ईरान पर इजरायली-अमेरिकी हमलों का असर पूरी दुनिया में देखने को मिल रहा है। खाड़ी देशों से लेकर पश्चिम एशिया तक ईंधन संकट गहराता नजर आ रहा है। चीन, जापान, भारत समेत तमाम देश ऐसे हैं जो कच्चे तेल के लिए मिडिल ईस्ट के देशों पर निर्भर हैं। ऐसे में ईरान द्वारा इजरायली-अमेरिकी हमले के बाद स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को बंद करना पश्चिम एशिया के लिए चुनौती बन गई है।
इसका असर ये है कि भारत में आने वाले 40 फीसदी से अधिक कच्चे तेल की सप्लाई बाधित है। भारत की बात छोड़ दें तो भी स्ट्रेट ऑफ होर्मुज वैश्विक तेल आपूर्ति का लगभग 20 फीसदी गुजरने वाला एक अहम समुद्री मार्ग है। ऐसे में ईरान द्वारा इस अहम मार्ग को रोकना पूरी दुनिया को प्रभावित कर रहा है। जहां एक ओर खाड़ी देश युद्ध के कारण आर्थिक मार झेल रहे हैं। वहीं पश्चिम एशिया में ईंधन संकट गहरा रहा है।






