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US-Israel-Iran-War से विश्व के कई देशों पर गहराया आर्थिक संकट, कच्चे तेल को लेकर ईरान की खुली धमकी से हड़कंप; भारत पर कितना पड़ेगा असर? जानें सबकुछ

US-Israel-Iran-War: मीडिल ईस्ट में जारी युद्ध के बीच दुनिया भर की लगातार टेंशन बढ़ रही है। कई देशों पर तो इसका असर भी दिखना शुरू हो गया है।

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By: Anurag Tripathi

Published: मार्च 12, 2026 1:25 अपराह्न

US-Israel-Iran-War
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US-Israel-Iran-War: मीडिल ईस्ट में जारी युद्ध के बीच दुनिया भर की लगातार टेंशन बढ़ रही है। कई देशों पर तो इसका असर भी दिखना शुरू हो गया है। जिसमे भारत भी शामिल है। चीन समेत कई देशों में तेल की संकट पैद हो गई है। भारत में  एलपीजी की लंबी लाइन देखने को मिल रही है। बता दें कि होर्मुज जलडमरूमध्य में लगातार शिप पर हमले हो की खबरे सामने आ रही है। मालूम हो कि भारत समेत कई देशों में कच्चा तेल होर्मुज जलडमरूमध्य से होकर ही गुजरता है।

वहीं ईरान से साफ कहा है कि होर्मुज जलडमरूमध्य से तेल के जहाज निकल नहीं सकते है। माना जा रहा है कि अगर युद्ध लंबा खीचता है तो कई देशों को आर्थिक संकट से गुजरना पड़ सकता है। चलिए आपको बताते है कि भारत पर इसका क्या असर पड़ने वाला है?

US-Israel-Iran-War से कई देशों में मंडराया आर्थिक संकट

बता दें कि US-Israel-Iran-War सिर्फ मीडिल ईस्ट तक ही सीमित नहीं है। बता दें कि इस युद्ध से भारत समेत कई देशों को आर्थिक संकट का सामना करना पड़ सकता है। ऐसा इसलिए क्योंकि युद्ध के कारण Hormuz Strait (जहां से दुनिया का लगभग 20% तेल गुजरता है) में जहाजों की आवाजाही रुक गई। जिसके बाद कच्चे तेल की कीमतों में जबरदस्त उछाल देखने को मिल सकता है।

सबसे खास बात है कि भारत, फिलीपींस, जापान, दक्षिण कोरिया जैसे देश बड़ी मात्रा में तेल आयात करते हैं।
तेल महंगा होने से करेंसी कमजोर और विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव बढ़ता है। कतर के एलएनजी सप्लाई और ऊर्जा बाजार में तनाव से यूरोप में गैस की कीमतें लगभग 70% तक बढ़ीं। कुछ देशों में ऊर्जा राशनिंग और कोयला प्लांट चालू करने की बात हो रही है।

युद्ध से भारत पर कितना पड़ेगा असर?

बता दें कि US-Israel-Iran-War से भारत पर असर दिखना शुरू हो गया है। जिसके बाद स्थिति बेहद चिंताजनक बनी हुई है। एलपीजी गैस को लेकर लंबी-लंबी कतारे लगी गई है। भारत अपनी जरूरत का लगभग 85% कच्चा तेल आयात करता है। अगर युद्ध के कारण होर्मुज जलडमरूमध्य में संकट बढ़ता है तो तेल सप्लाई प्रभावित हो सकती है।

माना जा रहा है कि अगर युद्ध 6 महीने तक चलता है, तो तेल और ऊर्जा संकट, जीडीपी ग्रोथ धीमी हो सकती है, रुपये और विदेशी निवेश पर दबाव, मध्य-पूर्व में भारतीय कामगार और रेमिटेंस और खाद्य और उद्योग पर असर शामिल है।

 

 

 

 

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Anurag Tripathi

अनुराग त्रिपाठी को पत्रकारिता का 2 साल से अधिक का अनुभव है। उन्होंने महर्षि दयानंद यूनिवर्सिटी से अपनी पत्रकारिता की डिग्री प्राप्त की है। वह बिजनेस, यूटिलिटी, पॉलिटिक्स विषयों पर लिखने में रूचि रखते है। वर्तमान में वह डीएनपी इंडिया के साथ कार्यरत है।
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