US-Israel-Iran War: स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में शुरू हुआ जहाजों का सीमित आवागमन, क्या बातचीत के बाद फिर भड़क सकता है युद्ध? जानें सबकुछ

US-Israel-Iran War: स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में जहाजों की आवाजाही शुरू, लेकिन मिडिल ईस्ट में तनाव कायम। क्या सीज़फायर के बाद फिर छिड़ सकता है युद्ध?

US-Israel-Iran War

फाइल फोटो

US-Israel-Iran-War: मीडिल ईस्ट में जारी युद्ध के बीच दुनिया के कई देशों को एक खुशखबरी सामने आई है। बता दें कि अमेरिका और ईरान के बीज हुए सीजफायर के बाद ईरान से स्ट्रेट ऑफ होर्मुज खोलने का ऐलान किया था। हालांकि यह अभी भी यह कहना पूरी तरह से सही नहीं होगा कि युद्ध पूरी तरह से खत्म हो चुका है। वहीं आज पाकिस्तान के इस्लाबाद में यूएस और ईरान के अधिकारियों की सीजफायर को लेकर बैठक होनी है।

माना जा रहा है कि इस बातचीत मे कुछ अहम फैसले हो सकते है। बताते चले कि हालात अभी भी पूरी तरह सामान्य नहीं हुए हैं और सवाल बना हुआ है। क्या यह शांति स्थायी है या फिर युद्ध दोबारा भड़क सकता है? क्योंकि दोनों ही देश एक दूसरे को लगातार धमकी दे रहे है। आईए समझते है इसके मायने।

US-Israel-Iran-War के बीच शुरू हुआ स्ट्रेट ऑफ होर्मुज का आवागमन

बता दें कि यूएस-ईरान के बीच हुए सीजफायर के बाद ईरान ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज खोलने को लेकर सहमति जता दी थी। जानकारी के मुताबिक सामान्य दिनों में यहां से रोज़ 120–140 जहाज गुजरते थे, लेकिन अभी यह संख्या बेहद कम है। कई रिपोर्ट्स के मुताबिक 10% से भी कम ट्रैफिक चालू हुआ है। हजारों जहाज अब भी खाड़ी क्षेत्र में फंसे हुए हैं और आगे बढ़ने का इंतजार कर रहे हैं।

ईरान की सरकारी समाचार एजेंसी तसनीम के अनुसार, ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर ने जहाजों को निर्देश दिया है कि वे जलडमरूमध्य के सामान्य जहाजरानी मार्गों में बिछाई गई नौसैनिक खदानों से बचने के लिए लारक द्वीप के आसपास ईरानी जलक्षेत्र से होकर गुजरें। हालांकि अब देखना दिलचस्प होगा कि आखिर कितने दिनों तक जहाजों का आवागमन होता है।

क्या बातचीत के बाद फिर शुरू होगा भीषण युद्ध?

मिडिल ईस्ट में स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर हालिया हलचल और अमेरिका–इज़राइल–ईरान के बीच जारी तनाव को देखते हुए स्थिति अभी भी बेहद नाजुक बनी हुई है। जिसके बाद कई तरह के सवाल खड़े हो रहे है। बता दें कि आज पाकिस्तान के इस्लामाबाद में आज यूएस और ईरान के अधिकारियों के बीच बैठक होनी है। जिसके बाद सवाल यह उठ रहा है कि क्या अमेरिका ईरान की पूरी 10 शर्ते मानेगा?

या फिर एक बार फिर भीषण युद्ध शुरू होने जा रहा है। यह स्थायी समझौता नहीं, बल्कि अस्थायी राहत है। ईरान, अमेरिका और इज़राइल के बीच अविश्वास गहरा है। छोटे हमले या उकसावे बड़े टकराव में बदल सकते हैं। अगर फिर से रास्ता बंद हुआ तो वैश्विक संकट बढ़ेगा।

 

 

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