US-Israel-Iran-War: मीडिल ईस्ट में जारी युद्ध के बीच कई देशों की टेंशन बढ़ती जा रही है। युद्ध जारी हुए करीब 1 महीना हो चुका है, इस बीच रूस के एक फैसले ने दुनिया के कई देशों को चौंका दिया है। जिसमे भारत भी शामिल है। दरअसल रूस 1 अप्रैल 2026 से पेट्रोल के निर्यात पर रोक लगाने जा रहा है। जो भारत समेत कई देशों के लिए चिंता का विषय है। मालूम हो कि भारत रूस से बड़ी मात्रा में रूस से कच्चे तेल कई सालों से लेता आ रहा है। लेकिन प्रतिबंध के बाद रूस यह तेल देना बंद कर देगा, जो एक चिंता का विषय बना हुआ है। आईए समझते है इसके मायने
US-Israel-Iran-War के बीच रूस के फैसले से हड़कंप
एनडीटीवी वर्ल्ड की एक रिपोर्ट के मुताबिक रूस सरकार ने शुक्रवार को 1 अप्रैल से गैसोलीन के निर्यात पर प्रतिबंध लगाने की घोषणा की, जिसका उद्देश्य पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष के कारण वैश्विक बाजार में व्याप्त उथल-पुथल के बीच घरेलू आपूर्ति को प्राथमिकता देना और ईंधन की कीमतों को स्थिर करना है। जिसके बाद अब सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि क्या रूस भारत को तेल नहीं भेजगा, और अगर ऐसा होता है, इससे भारत पर कितना असर पड़ने वाला है, क्यों दुनिया भर में कच्चे तेल की कीमतों में जबरदस्त उछाल देखने को मिल रहा है।
रूस के फैसले से भारत पर कितना पड़ेगा असर
बता दें कि पिछले कई सालों से भारत रूस से बड़ी मात्रा में कच्चे तेल का निर्यात करता रहा है। वहीं अब रूस ने पेट्रोल के निर्यात पर रोक लगा दी है। जिसके बाद सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या भारत पर इसका सीधा असर पड़ने वाला है? बताते चले कि भारत रूस से पेट्रोल नहीं कच्चा तेल खरीदता है, यानि निर्यात पर इसका असर कम पड़ने की उम्मीद है।
हालांकि रूस ग्लोबल मार्केट में बड़ा सप्लायर है। सप्लाई कम होने से दुनिया भर में पेट्रोल-डीजल महंगा हो सकता है। जिसका असर भारत पर भी पड़ सकता है। बता दें कि मीडिल ईस्ट में युद्ध को देखते हुए एक कमेटी गठित की है। इसके अलावा हर 15 दिन पर पेट्रोल-डीजल की कीमतों की समीक्षा की जाएगी। वहीं अब देखना होगा कि क्या 15 दिनों के बाद तेल के कीमतों में बदलाव होना है।






