US-Israel Iran War: मध्य-पूर्व में तनाव का दौर बढ़ चुका है। ईरानी सुप्रीम लीडर आयातुल्ला अली खामेनेई की मौत के बाद ईरान की ओर से तल्ख प्रतिक्रियाएं आ रही हैं। अमेरिकी प्रेसिडेंट डोनाल्ड ट्रंप की लाख धमकियों के बावजूद ईरान की ओर से दुबई से लेकर ओमान तक अमेरिकी दूतावास को निशाने पर लिया है।
इसी बीच दावा किया गया कि अमेरिका भारत के बंदरगाह का इस्तेमाल कर ईरान पर हमला कर रहा है।इसको लेकर मिडिल ईस्ट में खूब सनसनी मची। हालांकि, भारतीय विदेश मंत्रालय ने आधिकारिक बयान जारी कर सभी दावों की पोल खोल दी है। आइए हम आपको विदेश मंत्रालय का बयान विस्तार से बताते हैं।
अमेरिकी-इजरायली हमलों में भारतीय बंदरगाह को लेकर क्यों छिड़ी रार?
ईरान पर हो रहे अमेरिकी-इजरायली हमले में भारतीय बंदरगाह के इस्तेमाल का दावा करने से नए सिरे से सनसनी मची है। अमेरिकी सेना के पूर्व कर्नल डगलस मैकग्रेगर ने दावा किया कि अमेरिका ईरान पर हमला करने के लिए भारतीय नौसैनिक अड्डों का इस्तेमाल कर रहा है। इसको लेकर मिडिल ईस्ट में सुर्खियां बनने लगी। मामले की गंभीरता को देखते हुए भारतीय विदेश मंत्रालय ने तत्काल सभी दावों को खंडन करते हुए हकीकत दुनिया के सामने रखी।
Fake News Alert!
Claims being made on OAN, a US based channel that Indian ports are being used by the US Navy are fake and false. We caution you against such baseless and fabricated comments. pic.twitter.com/xiFWnkoXBk
— MEA FactCheck (@MEAFactCheck) March 4, 2026
भारतीय विदेश मंत्रालय की ओर से स्पष्ट किया गया कि “अमेरिका स्थित चैनल ओएएन पर किए जा रहे ये दावे कि भारतीय बंदरगाहों का इस्तेमाल अमेरिकी नौसेना द्वारा किया जा रहा है, निराधार और झूठे हैं। हम आपको ऐसे आधारहीन और मनगढ़ंत दावों से सावधान करते हैं।” इससे स्पष्ट हो गया है कि अमेरिका ईरान पर हमले के लिए भारत के बंदरगाहों का इस्तेमाल नहीं कर रहा है।
अमेरिकी हमलों से बर्बाद हुआ ईरान!
आसमान में उठ रह धुंए का गुब्बार ईरान में मची तबाही का पुख्ता प्रमाण है। अमेरिकी-इजरायली हमलों की चपेट में आने से तेहरान से कुवैत तक तांडव मचा है। लेबनान में भी हिजबुल्लाह के ठिकाने बर्बाद हुए हैं। अब तक आ रही जानकारी के मुताबिक ईरान को सुप्रीम लीडर अली खामेनेई की मौत के रूप में सबसे बड़ी क्षति हुई है।
इतना ही नहीं, अमेरिकी-इजरायली हमलों की चपेट में आने से ईरानी सेना के 2000 से अधिक ठिकाने नेस्तनाबूद हुए हैं। 700 से अधिक लोग इस युद्ध की चपेट में आने से मारे जा चुके हैं। कच्चे तेल की कीमत उफान पर है। ये सबकुछ दर्शाता है कि कैसे अमेरिकी-इजरायली हमलों के कारण ईरान बर्बाद हो गया है।






