US-Israel-Iran War: हमलों की चपेट में आने से ईरान के लगभग सभी प्रमुख शहर बर्बादी का मंजर देख चुके हैं। बहुमंजिला इमारतें जमींदोज हो चुकी हैं। आम नागरिकों पर यूएस-इजरायल-ईरान वॉर का बुरा प्रभाव पड़ा है। उद्योग से लेकर अन्य तमाम गतिविधियां तक बंद हैं। इस बीच सबकी नजरें ईरान के प्रखर समर्थन माने जाने वाले हूती विद्रोहियों पर टिकीं हैं।
यमन में रहने वाले हूती विद्रोही ने अब तक यूएस-इजरायल-ईरान वॉर से दूरी क्यों बना रखी है? क्या वे जंग में शामिल हो सकते हैं? ऐसे तमाम सवाल हैं जो लोगों के मन में उठ रहे हैं। इसके साथ ही ईरान द्वारा बंद किए गए स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर भी दुनिया की नजरें टिकीं हैं। गहराते ईंधन के बीच ये देखना दिलचस्प होगा कि होर्मुज स्ट्रेट कब खुलता है।
तेहरान से मशहद तक तबाही के बीच क्या US-Israel-Iran War में शामिल होंगे हूती विद्रोही?
इस सवाल का जवाब भविष्य के गर्भ में छिपा है। दरअसल, यमन में रहने वाले हूती विद्रोहियों को ईरान का समर्थक माना जाता है। इससे पूर्व पिछले साल जून में जब इजरायल-ईरान के बीच संघर्ष छिड़ा था, तब हूती विद्रोही खामेनेई के समर्थन में आए थे। हालांकि, इस बात हूती विद्रोहियों ने जुबानी तौर पर ही ईरान पर हो रहे हमले की निंदा की है। उन्होंने जंग के मैदान से दूरी बना रखी है।
तमाम कयासों के बीच अभी हूती विद्रोहियों की ओर से यूएस-इजरायल-ईरान वॉर में एंट्री लेने या दूरी बनाने को लेकर कोई स्टैंड नहीं लिया गया है।ऐसे में ये स्पष्ट नहीं है कि हूती विद्रोहियों का अगला कदम क्या हो सकता है। फिलहाल सबकी नजरें अमेरिका-इजरायल के संयुक्त हमले पर टिकीं हैं जिसके चलते ईरान के साथ मिडिल ईस्ट के कई देशों में हाहाकार की स्थिति मची है।
मिडिल ईस्ट में संघर्ष के बीच स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर टिकीं नजरें!
मध्य पूर्व में तनावपूर्ण स्थिति लगातार बनी हुई है। खाड़ी देशों पर हमलों का दौर जारी है। कहीं ईरान निशाना साध रहा है, तो कहीं इजरायल-अमेरिका की मिसाइलें तबाही मचा रही हैं। इस बीच संवेदनशील माने जाने वाले स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर दुनिया की नजरें टिकीं हैं। भारत, चीन, जापान समेत दुनिया के कई देशों में कच्चे तेल का आयात इसी समुद्री रास्ते से होता है।
हालांकि, ईरान पर हुए अमेरिकी-इजरायली हमले के बाद इसे अस्थायी रूप से बंद कर दिया गया। फिलहाल स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से कच्चे तेल वाले टैंकर नहीं निकल पा रहे हैं। डोनाल्ड ट्रंप ने साफ किया है कि यदि ईरान होर्मुज स्ट्रेट का रास्ता नहीं खोलता है, तो उन पर हमले और बढ़ाए जाएंगे। ऐसे में देखना दिलचस्प होगा कि आगे क्या कदम उठाए जाते हैं।






