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Tukaram Mundhe: हॉस्पिटल में मरीजों की आंखों में झोंकी जा रही है धूल! कहीं आपके साथ भी तो नहीं हो रहा धोखा, क्यों FDA कमिश्नर की हुई वाहवाही

Tukaram Mundhe: अस्पताल के बिल के नाम पर लोगों से वसूली की जा रही है और मजबूरी का जिस तरह से फायदा उठाया जा रहा है इसे लेकर एफडीए कमिश्नर ने एक रिपोर्ट शेयर किया जो निश्चित तौर पर हर किसी को हैरान कर रहा है। जानिए क्या है माजरा।

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By: Anjali Wala

Published: सितम्बर 17, 2026 1:33 अपराह्न

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Tukaram Mundhe: जब से एफडीए कमिश्नर के तौर पर पद संभाला गया है वह लगातार वायरल हो रहे हैं। सोशल मीडिया पर उनकी लोकप्रियता कुछ इस कदर बढ़ रही है कि यह बताने की जरूरत नहीं है। जी हां, हम बात कर रहे हैं तुकाराम मुंडे की जो एक बार फिर चर्चा में है। दरअसल अपने ताबड़तोड़ एक्शन को लेकर सुर्खियां बटोरने वाले एफडीए कमिश्नर के इस बार के निशाने पर हॉस्पिटल है जहां इलाज के नाम पर मनमानी चल रही है। मरीज को इसका भारी भुगतान करना पड़ रहा है। आइए जानते हैं क्या है पूरा मामला जो फिलहाल चर्चा में है और तुकाराम मुंडे द्वारा शेयर की गई रिपोर्ट ने खलबली मचा दी है।

तुकाराम मुंडे ने खोल दी अस्पतालों की पोल

एक मीडिया इंटरव्यू को शेयर करते हुए तुकाराम मुंडे ने x प्लेटफार्म पर कहा कि हॉस्पिटल के बिल का सबसे महंगा हिस्सा शायद कभी हॉस्पिटल को मिले ही नहीं।देखभाल के लिए भर्ती मरीज़ के पास यह जानने का कोई तरीका नहीं होता कि मेडिकल कंज्यूमेबल की कीमत उसकी असली कीमत है या वार्ड में पहुँचने से बहुत पहले तय किया गया मार्कअप। जानकारी में यह कमी, असल में, एक पब्लिक हेल्थ का मुद्दा है। महाराष्ट्र में हॉस्पिटल कंज्यूमेबल के एक सर्वे में पाया गया कि एक IV इन्फ्यूजन सेट जिसकी ट्रेड कीमत 11.05 रुपये थी, उस पर प्रिंटेड कीमत 325 थी; 2,841% का मार्कअप। 6.75 रुपये में खरीदी गई एक सिरिंज की 57.20 रुपये थी। 29.41 रुपये में खरीदे गए एक कैथेटर की कीमत 310 थी।

देखें कैसे हॉस्पिटल के नाम पर हो रही धांधली

इसके अलावा एफडीए कमिश्नर ने कहा ये इलेक्टिव खरीदारी नहीं हैं। मरीज़ इलाज लेते समय कीमतों की तुलना नहीं कर सकते, दूसरे विकल्प नहीं ढूंढ सकते, या बॉक्स पर छपे नंबर पर सवाल नहीं उठा सकते और MRP अक्सर मैन्युफैक्चरर और डिस्ट्रीब्यूटर पहले से तय कर लेते हैं, जो ट्रेड प्राइस से एक बड़े, बिना बताए मार्जिन से अलग होता है। नतीजा एक ऐसा सिस्टम है जहां खर्च उठाने वाली पार्टी के पास इसका मूल्यांकन करने के लिए सबसे कम जानकारी होती है।

मरीजों के सपोर्ट में आए तुकाराम मुंडे

तुकाराम मुंडे के द्वारा आगे बताया गया कि रेगुलेटरी गैप स्ट्रक्चरल है: शेड्यूल्ड दवाओं पर ड्रग्स (प्राइस कंट्रोल) ऑर्डर, 2013 के तहत कैप लगा है। ज़्यादातर मेडिकल डिवाइस और कंज्यूमेबल्स की कीमत और उसके आस-पास की जानकारी पर लगभग पूरी तरह से नज़र नहीं रखी जा रही है। इन नतीजों का रिव्यू और ट्रेड प्रोक्योरमेंट प्राइस और घोषित MRP के बीच मंज़ूर गैप पर साफ़ गाइडलाइंस डिपार्टमेंट ऑफ़ फार्मास्युटिकल्स और NPPA को रिकमेंड की गई हैं; यह न सिर्फ़ कीमत के गैप को कम करने की दिशा में एक कदम है, बल्कि उस जानकारी के गैप को भी कम करने की दिशा में है जिसे मरीज़ों को अकेले झेलना पड़ता है।

लोग कर रहे Tukaram Mundhe की तारीफ

जाहिर तौर पर एफडीए कमिश्नर तुकाराम मुंडे के द्वारा शेयर किए गए इस रिपोर्ट को देखने के बाद लोग आश्चर्यचकित हो गए हैं जहां कुछ लोग उनकी तारीफ करते हुए नजर आ रहे हैं। लोगों का कहना है कि कोई अधिकारी ऐसा आया जो इस तरह की अवैध हरकत पर निगरानी रख रहा है। यह रिपोर्ट फिलहाल सोशल मीडिया पर चर्चा में है।

 

 

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Anjali Wala

अंजलि वाला पिछले कुछ सालों से पत्रकारिता में हैं। साल 2019 में उन्होंने मीडिया जगत में कदम रखा। फिलहाल, अंजलि DNP India वेब साइट में बतौर Sub Editor काम कर रही हैं। उन्होंने बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी से हिंदी पत्रकारिता में मास्टर्स किया है।
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