Viral Video: दर्शन के लिए बेरिकेडिंग के पार भक्त की मारामारी तो वीआईपी करते दिखे रिंग सेरेमनी, वृंदावन मंदिर के इस फर्जीवाड़े को देख भड़के यूजर्स

Viral Video: वृंदावन के मंदिर में बेरिकेडिंग के बाहर भक्त दर्शन के लिए एक दूसरे को धक्के मार रहे हैं तो वही पुजारी रिंग सेरिमनी करवाते नजर आ रहे हैं। सोशल मीडिया पर वीडियो को देखकर लोग गुस्से से भड़क उठे।

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Photo Credit- Screen Grab From x Viral Video

Viral Video: अमीर हो या गरीब भगवान हर किसी के लिए एक ही है। श्रद्धा का पैसे से कोई भी मोल भाव नहीं है लेकिन इस सबके बीच एक वीडियो वायरल हो रहा है जो कथित तौर पर वृंदावन का बताया जा रहा है। जहां भगवान के दर्शन करने के लिए आम लोगों की मारामारी देखी जाती है तो वहीं इस सबके बीच एक कपल कुछ ऐसा करते हुए नजर आ रहे हैं जिसकी वजह से बहस की शुरुआत हो गई है। क्या वीआईपी लोगों को अब मंदिरों में भी कुछ भी करने की आजादी है। क्या उनके लिए कोई भी नियम कानून नहीं बनाए गए हैं यह हम नहीं बल्कि वायरल वीडियो देखकर लोग सवाल उठा रहे हैं।

वायरल वीडियो में बेरिकेडिंग के अंदर और बाहर के नजारे ने लोगों को किया स्तब्ध

कथित तौर पर बांके बिहारी मंदिर वृंदावन से यह वायरल वीडियो सोशल मीडिया पर चर्चा में है जिसे x चैनल से शेयर किया गया है। इसके साथ लिखा गया, “आम भक्त बेरिकेडिंग के उस पार तो वीआईपी भक्त बेरिकेडिंग के अंदर भगवान के एकदम करीब दर्शन पुजारी का आशीर्वाद रिंग सेरेमनी फोटो रील आदि आदि।” वीडियो ने बहस की शुरुआत कर दी है जिसे अब तक 7000 से ज्यादा व्यूज मिले हैं। वायरल वीडियो में आप देख सकते हैं कि बेरिकेडिंग के अंदर कैसे रिंग सेरेमनी से लेकर रील्स बनाए जा रहे हैं।

Viral Video को देख मंदिर के नजारे ने की बहस की शुरुआत

इस वायरल वीडियो को देखने के बाद एक यूजर ने कहा पैसा सब कुछ कर देता है पैसे से बांके बिहारी मंदिर भी है और लोग वहां जा सकते हैं। एक यूजर ने कहा, “धर्म के नाम का धंधा आजकल बहुत जोर से चल रहा है। पैसे वालों के लिए सब कुछ छूट है। आम जनता का क्या है उसकी तो आदत ही लाइन लगने की।” एक ने लिखा, “पैसों का चक्कर भाई साहब।” एक यूजर ने कहा सिर्फ पैसे वालों का बोलबाला है। सब माया की करामात है पैसा बोलता है। इस वीडियो को देखने के बाद सोशल मीडिया पर लोगों का गुस्सा देखा जा रहा है।

डिस्क्लेमर: इस आर्टिकल में दी गई जानकारी सोशल मीडिया पर मौजूद वीडियो /पोस्ट पर आधारित है। डीएनपी इंडिया हिन्दी/लेखक किसी भी प्रकार के दावे और सत्यता की पुष्टि नहीं करता है।

 

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