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H-1B Visa: डोनाल्ड ट्रंप की नई चाल! अब आवेदकों को वीजा के लिए देने होंगे एक लाख डॉलर; इंडियंस को हो सकता है भारी नुकसान; जानें सबकुछ

H-1B Visa: अमेरिका के राष्ट्रपति ने टैरिफ बम के बाद अब वीजा बम फोड़ दिया है। बीते दिन डोनाल्ड ट्रंप ने एक कार्यकारी आदेश पर हस्ताक्षर किए है।

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By: Anurag Tripathi

Published: सितम्बर 20, 2025 11:17 पूर्वाह्न

H-1B Visa
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Donald Trump: अमेरिका के राष्ट्रपति ने टैरिफ बम के बाद अब वीजा बम फोड़ दिया है। बीते दिन डोनाल्ड ट्रंप ने एक कार्यकारी आदेश पर हस्ताक्षर किए हैं, जिसके तहत कंपनियों द्वारा H-1B आवेदकों को प्रायोजित करने के लिए भुगतान की जाने वाली फीस को बढ़ाकर 1 लाख डॉलर कर दिया गया है। इस फैसले के बाद जिस देश को सबसे ज्यादा परेशानी हो सकती है, वह है भारत, बता दें कि बड़ी संख्या में भारतीय हर साल अमेरिका जानें के लिए एच-1 बी वीजा अप्लाई करते है। लेकिन ट्रंप के इस फैसले से भारतीयों को तगड़ा झटका लग सकता है। मालूम हो कि ट्रंप ने पहले ही भारत पर 50 प्रतिशत का टैरिफ लगा दिया है।

अब आवेदकों को H1-B Visa के लिए देने होंगे 1 लाख डॉलर

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप एक कार्यकारी आदेश पर हस्ताक्षर किए हैं।जिसके तहत कंपनियों द्वारा H-1B आवेदकों को प्रायोजित करने के लिए भुगतान की जाने वाली फीस को बढ़ाकर 1 लाख डॉलर यानि करीब 88 लाख रूपये देने होंगे। इस मामले में व्हाइट हाउस के स्टाफ सेक्रेटरी विल शार्फ ने जानकारी देते हुए कहा कि “सबसे ज़्यादा दुरुपयोग की जाने वाली वीज़ा प्रणालियों में से एक H1-B गैर-आप्रवासी वीज़ा कार्यक्रम है। इसका उद्देश्य उन उच्च कुशल मज़दूरों को अमेरिका आने की अनुमति देना है जो उन क्षेत्रों में काम करते हैं जहाँ अमेरिकी काम नहीं करते।

इस घोषणा से कंपनियों द्वारा H-1B आवेदकों को प्रायोजित करने के लिए दी जाने वाली फीस बढ़कर $100,000 हो जाएगी। इससे यह सुनिश्चित होगा कि वे जिन लोगों को ला रहे हैं वे वास्तव में अत्यधिक कुशल हैं और उनकी जगह अमेरिकी मज़दूर नहीं ले सकते।”

वीजा पर क्या बोले संयुक्त राज्य अमेरिका के वाणिज्य सचिव हॉवर्ड लुटनिक

संयुक्त राज्य अमेरिका के वाणिज्य सचिव हॉवर्ड लुटनिक ने कहा कि “पूरा विचार यह है कि ये बड़ी तकनीकी कंपनियाँ या अन्य बड़ी कंपनियाँ अब विदेशी कर्मचारियों को प्रशिक्षित नहीं करेंगी। उन्हें सरकार को 1,00,000 डॉलर का भुगतान करना होगा, फिर उन्हें कर्मचारी को भुगतान करना होगा। इसलिए यह आर्थिक रूप से ठीक नहीं है।

अगर आप किसी को प्रशिक्षित करने जा रहे हैं, तो आपको हमारे देश के किसी महान विश्वविद्यालय से हाल ही में स्नातक हुए किसी व्यक्ति को प्रशिक्षित करना होगा, अमेरिकियों को प्रशिक्षित करना होगा, हमारी नौकरियाँ छीनने के लिए लोगों को लाना बंद करना होगा। यही यहाँ की नीति है। सभी बड़ी कंपनियाँ इसमें शामिल हैं।”

इंडियंस को हो सकता है भारी नुकसान

बड़ी संख्या में भारतीय हर साल अमेरिका जाते है, लेकिन डोनाल्ड ट्रंप के इस नए फैसले ने टेंशन बढ़ा दी है। गौरतलब है कि इस फैसले से बड़ी संख्या में भारतीयों का अमेरिका जानें का सपना टूट सकता है, क्योंकि अब उन्हें 88 लाख रूपये देने होंगे। जो एक अच्छी खासी रकम होती है। हालांकि अभी भारत की तरफ से इसे लेकर किसी प्रकार की जानकारी सामने नहीं आई है।

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Anurag Tripathi

अनुराग त्रिपाठी को पत्रकारिता का 2 साल से अधिक का अनुभव है। उन्होंने महर्षि दयानंद यूनिवर्सिटी से अपनी पत्रकारिता की डिग्री प्राप्त की है। वह बिजनेस, यूटिलिटी, पॉलिटिक्स विषयों पर लिखने में रूचि रखते है। वर्तमान में वह डीएनपी इंडिया के साथ कार्यरत है।
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