H-1B Visa: अमेरिका में काम कर रहे हजारों भारतीय पेशेवरों के लिए H-1B Visa को लेकर चिंता बढ़ती जा रही है। हाल के दिनों में अमेरिकी इमिग्रेशन नीतियों, टेक कंपनियों में छंटनी और वीजा नियमों में संभावित बदलावों ने भारतीय आईटी प्रोफेशनल्स की टेंशन बढ़ा दी है। वहीं अब अमेरिकी सरकार के एक फैसले ने यहां पर काम करने वाले विदेश या फिर H-1B Visa अप्लाई करके जाने वाले लोगों की चिंता बढ़ा दी है।
सबसे खास बात है कि करीब 70 प्रतिशत भारतीय इस वीजा की मदद से अमेरिका जाते है। दरअसल अमेरिकी सरकार नया नियम लाने जा रही है, जिसके तहत बाहर देश से काम करने आए लोगों की सैलरी में 30 प्रतिशत की बढ़ोतरी होगी। हालांकि यह सुनने में अच्छा है, लेकिन लाखों भातीयों की टेंशन बढ़ा सकती है।
H-1B Visa धारकों पर गहराया संकट
अमेरिका ने H-1B Visa कार्यक्रम के तहत किसी कर्मचारी को काम पर रखने के लिए भुगतान किए जाने वाले न्यूनतम वेतन को पहले से तय सीमा से 30 प्रतिशत तक बढ़ाने का प्रस्ताव दिया है, एक ऐसा कदम जिसके बारे में प्रशासन का दावा है कि इससे विदेशियों को अमेरिकी नागरिकों के वेतन में कटौती करने से रोकने में मदद मिलेगी।
हालांकि देखा जाएं तो अगर अन्य देशों के कर्मचारियों की सैलरी में 30 प्रतिशत का इजाफा होगा, जिससे कंपनी पर दवाब बढ़ेगा और उनको ज्यादा पैसा देना होगा। जिसके बाद कंपनी कम दामों पर ही लोकल कर्मचारी यानि अमेरिका में ही रहने वाले कर्मचारियों को ही रखेंगे, जिससे उन्हें कम वेतन देना होगा। यानि H-1B Visa की मदद से आए काम करने नौकरीपेशा की मुश्किलें बढ़ सकती है।
भारतीयों को क्यों बढ़ सकती है टेंशन
अमेरिका में समय-समय पर इमिग्रेशन नियमों को लेकर बहस होती रहती है। कुछ रिपोर्ट्स में दावा किया जा रहा है कि भविष्य में H-1B वीजा प्रक्रिया को और सख्त किया जा सकता है। यदि ऐसा होता है, तो भारतीय पेशेवरों के लिए अमेरिका में नौकरी हासिल करना पहले की तुलना में अधिक मुश्किल हो सकता है। इसके अलावा अगर यह नियम लागू हो जाता है, तो सबसे ज्यादा दिक्कत भारतीयों को हो सकती है, क्योंकि 70 प्रतिशत भारतीय इस वीजा के लिए अप्लाई करते है, लेकिन इस नियम के बाद उनका अमेरिका जाने का सपना अधूरा रह सकता है। हालांकि अब देखना दिलचस्प होगा कि अमेरिकी सरकार इसपर क्या फैसला लेती है?
