Hydrogen Train: भारतीय रेलवे लगातार नई तकनीकों को अपनाने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। इसी कड़ी में देश में हाइड्रोजन से चलने वाली ट्रेन को लेकर तैयारियां तेज हो गई हैं। यह ट्रेन पारंपरिक डीजल इंजन और बिजली आधारित रेल नेटवर्क से अलग तकनीक पर काम करेगी। हाइड्रोजन फ्यूल सेल आधारित यह ट्रेन पर्यावरण के अनुकूल परिवहन व्यवस्था की दिशा में एक बड़ा कदम मानी जा रही है। सबसे खास बात है कि यह नॉर्मल ट्रेन जैसी ही होगी, लेकिन इसमे ना बिजली और ना ही डीजल का इस्तेमाल होगा।
बिना बिजली-डीजल से दौड़ेगी Hydrogen Train
हाइड्रोजन ट्रेन की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसे चलाने के लिए डीजल ईंधन या रेलवे की ओवरहेड इलेक्ट्रिक लाइन की जरूरत नहीं होगी। यह ट्रेन हाइड्रोजन फ्यूल सेल तकनीक का इस्तेमाल करेगी, जिसमें हाइड्रोजन और ऑक्सीजन की रासायनिक प्रक्रिया से बिजली पैदा होती है।
इस प्रक्रिया में मुख्य रूप से पानी और भाप का उत्सर्जन होता है, जिससे प्रदूषण कम करने में मदद मिलती है।
भारतीय रेलवे ने देश में हाइड्रोजन ट्रेन तकनीक विकसित करने की योजना पर काम शुरू किया है। इसे रेलवे के हरित परिवहन अभियान का हिस्सा माना जा रहा है। खासतौर पर उन रेल मार्गों के लिए यह तकनीक उपयोगी हो सकती है जहां अभी तक पूरी तरह विद्युतीकरण नहीं हुआ है।
पीएम मोदी हाइड्रोजन ट्रेन को दिखाएंगे हरी झंडी
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जींद से सोनीपत के बीच चलने वाली भारत की पहली और दुनिया की सबसे लंबी हाइड्रोजन ट्रेन को हरी झंडी दिखाकर रवाना करेंगे। लगभग 10 डिब्बों वाली यह ट्रेन स्वच्छ ऊर्जा आधारित परिवहन की दिशा में एक बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है। इसके अलावा प्रधानमंत्री हरियाणा की कई विकास परियोजनाओं का भी उद्घाटन और शिलान्यास करेंगे।
अगर इसके खासियत की बात करें तो डीजल ईंधन की जरूरत नहीं। ओवरहेड बिजली लाइन के बिना संचालन की क्षमता। प्रदूषण में कमी। कम कार्बन उत्सर्जन। पर्यावरण के अनुकूल परिवहन विकल्प। गैर-विद्युतीकृत रेल मार्गों के लिए उपयोगी।







