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मिडिल ईस्ट में जारी भीषण युद्ध के बीच शुरू हुई RBI Monetary Policy Meeting, क्या रेपो रेट में होगा बड़ा उलटफेर! जानें सबकुछ

RBI Monetary Policy Meeting शुरू, क्या रेपो रेट में होगा बड़ा बदलाव? जानें महंगाई, ईएमआई और आम लोगों पर इसके असर की पूरी जानकारी

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By: Anurag Tripathi

Published: अप्रैल 6, 2026 1:50 अपराह्न

RBI Monetary Policy Meeting
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RBI Monetary Police Meeting: मीडिल ईस्ट में जारी युद्ध के बीच आज से आरबीआई यानि (रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया) की RBI Monetary Policy Meeting की बैठक शुरू हो गई है।  जिसके नतीजे 10 अप्रैल 2026 यानि  शुक्रवार सुबह 10 बजे जारी किया जाएगा। मालूम हो कि ये बैठक हर 2 महीने में की जाती है और रेपो रेट में बढ़ोतरी या कमी का निर्णय किया जाता है।

बताते चले कि पिछले कई बार से आरबीआई की तरफ से रेपो रेट में कमी की जा रही है। जिसके बाद एक बार फिर सवाल उठ रहा है कि क्या इस बार भी रेपो रेट में कमी आती है, हालांकि इस बार यह थोड़ा मुश्किल लग रहा है, क्योंकि मार्च में खुदरा महंगाई दर में बढ़ोतरी देखी गई थी। आईए जानते है इससे जुड़ी सभी अहम जानकारी।

RBI Monetary Police Meeting में रेपो रेट में होगा बड़ा उलटफेर 

भारत में आरबीआई की मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी (MPC) की बैठक पर इस समय सबकी नजरें टिकी हैं। ऐसा इसलिए क्योंकि मीडिल ईस्ट में भीषण युद्ध जारी है। जिसकी वजह से कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी देखी जा रही है। एक्सपर्ट का मानना है कि अगर युद्ध यू ही चलता है तो महंगाई भी बढ़ सकती है। वर्तमान में रेपो रेट 5.25 प्रतिशत है।

पिछली बैठक में किसी प्रकार का बदलाव नहीं किया गया था। एक्सपर्ट का मानना है कि इस बार भी स्थित ऐसी ही रह सकती है। क्योंकि मिडिल ईस्ट तनाव से बढ़ती महंगाई, कच्चे तेल की कीमतों में उछाल, वैश्विक अनिश्चितता के कारण आरबीआई रेपो रेट में किसी प्रकार का बदलाव ना करें, 10 अप्रैल को इसके नतीजे जारी किए जाएंगे, जिसके बाद पता चलेगा कि रेपो रेट में बदलाव किया गया है या फिर उसे बिना बदलाव के रखा जाएगा।

क्या होता है रेपो रेट?

भारत की अर्थव्यवस्था में रेपो रेट एक बेहद महत्वपूर्ण शब्द है, जिसका सीधा असर आम लोगों की जेब पर पड़ता है। चाहे आप होम लोन लेते हों, कार लोन या पर्सनल लोन पर असर डालता है। यानि आसान भाषा में समझे तो रेपो रेट में कमी आती है तो लोन सस्ते होंगे। वहीं अगर रेपो रेट में बढ़ोतरी होती है तो लोन महंगे होंगे।

यदि खुद्रा महंगाई दर तेजी से बढ़ती है, तो विकास दर में मामूली गिरावट आने पर भी आरबीआई को ब्याज दरों को अपरिवर्तित रखने की आवश्यकता हो सकती है। क्योंकि आने वाले कुछ महीने भारत के लिए बेहद संवेदनशील है। इसी को ध्यान में रखते हुए RBI Monetary Policy Meeting में कुछ अहम निर्णय लिए जा सकते है।

 

 

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Anurag Tripathi

अनुराग त्रिपाठी को पत्रकारिता का 2 साल से अधिक का अनुभव है। उन्होंने महर्षि दयानंद यूनिवर्सिटी से अपनी पत्रकारिता की डिग्री प्राप्त की है। वह बिजनेस, यूटिलिटी, पॉलिटिक्स विषयों पर लिखने में रूचि रखते है। वर्तमान में वह डीएनपी इंडिया के साथ कार्यरत है।
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