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Twin Tube Tunnel: ब्रह्मपुत्र नदी के नीचे दिखेगा इंजीनियरिंग का अद्भुत नजारा, पानी के नीचे फर्राटा भरेगी ट्रेन और गाड़ियां; चीन के इसलिए उड़े होश

Twin Tube Tunnel

फाइल फोटो

Twin Tube Tunnel: केंद्र सरकार अपनी सीमा की सुरक्षा के लिए तत्पर है। चाहे वह चीन हो, पाकिस्तान या फिर बांग्लादेश हो, भारत लगातार अपनी सीमाओं को सुरक्षा करने में लगा हुआ है। इसी बीच केंद्र सरकार की तरफ से ट्विन ट्यूब रोड–रेल टनल को मंजूरी दे दी है। सबसे खास बात है कि यह टनल ब्रह्मपुत्र नदी के नीचे बनेगा। असम के गहपुर से नुमलीगड़ के बीच बनाई जाएगी। कई मायनों में यह टनल एक गेमचेंजर साबित होने जा रहा है। इसके बनने से अरूणाचल प्रदेश, मणिपुर और अन्य नॉर्थ ईस्ट राज्यों से कनेक्टिविटी बढ़ेगी। इस ट्विन ट्यूब रोड–रेल टनल के बनने से 6 घंटे की दूरी महज 30 मिनट  की रह जाएगी। इसके साथ ही यह टनल चीन के लिए भी सिरदर्द बनने जा रही है। चलिए आपको बताते है इससे जुड़ी सभी अहम जानकारी।

ब्रह्मपुत्र नदी के नीचे दौड़ेगी रेल और गाड़ियां

मोदी कैबिनेट की बैठक में आज ट्विन ट्यूब रोड–रेल टनल को मंजूरी मिल गई है। इसकी जानकारी खुद रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने दी। दी जानकारी के मुताबिक ट्विन ट्यूब रोड–रेल टनल असम के गहपुर से नुमलीगड़ के बीच बनाई जाएगी। यह 34 किमी का प्रोजेक्ट है, जिसमें 18,662 करोड़ रुपये का इनवेस्टमेंट होगा। हाईवे और रेलवे दोनों मिलकर ब्रह्मपुत्र नदी के नीचे ट्विन टनल बनाकर कनेक्टिविटी सुनिश्चित करेंगे।

इससे लगभग 250 किमी की दूरी घटकर मात्र 34 किमी रह जाएगी। वर्तमान में, एनएच 715 पर स्थित नुमालीगढ़ और एनएच-15 पर स्थित गोहपुर के बीच की दूरी एनएच-52 पर सिलघाट के पास स्थित कालियाभम्भोरा सड़क पुल से 240 किलोमीटर है, जिसमें नुमालीगढ़, काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान और बिश्वनाथ शहर से होते हुए 6 घंटे का समय लगता है। लेकिन इस टनल के बनने से 6 घंटे की दूरी केवल 30 मिनट की रह जाएगी।

Twin Tube Tunnel बनने से रोजगार के नए अवसर होंगे पैदा

गौरतलब है कि यह परियोजना पूरी होने के बाद रणनीतिक दृष्टिकोण, क्षेत्रीय आर्थिक विकास, प्रमुख आर्थिक केंद्रों के बीच संपर्क सुदृढ़ करने और व्यापार एवं औद्योगिक विकास के नए द्वार खोलने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। लगभग 80 लाख प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रोजगार सृजित करेगी तथा आसपास के क्षेत्रों में विकास, उन्नति और समृद्धि के नए मार्ग प्रशस्त करेगी। यह परियोजना असम भर में प्रमुख आर्थिक, सामाजिक और लॉजिस्टिक्स केंद्रों को निर्बाध रूप से जोड़ने का काम करेगी।

भारत के ऐलान के चीन के उड़े होश

चीन और बांग्लादेश से सटे पूर्वोतर राज्यों में जबरदस्त विकास देखने को मिल रहा है। असम के मोरन में पहला हाईवे लैंडिंग स्ट्रिप डेवलप किया गया है। यह इलाका चीन बॉर्डर से तकरीबन 240 किलोमीटर की दूरी पर है। यहां पर विमान की इमरजेंसी लैंडिग होगी, जिससे सेना को पहुंचने में आसानी होगी। इसके अलावा ब्रह्मपुत्र नदी पर टनल बनाने की मंजूरी मिल गई है। जिससे 6 घंटे का समय 30 मिनट में पूरा होगा। इसके अलावा किसी भी मौसम में इस टनल से आवाजाही संभव होगी। यानि अगर किसी प्रकार की जंग जैसी स्थिति पैदा होती है, तो सेना की आवाजाही और आसान होगी।

 

 

 

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