US-Iran Peace Deal: कई महीनों से जारी अमेरिका-ईरान युद्ध पर पूर्ण विराम लग सकता है। बता दें कि दोनों देशों की तरफ से शांति समझौता हो चुका है। इस समझौते का सबसे अहम हिस्सा दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में से एक स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को फिर से खोलना है, जिसके चलते वैश्विक तेल आपूर्ति पर मंडरा रहा बड़ा संकट फिलहाल टलता नजर आ रहा है।
हालांकि इस समझौते ने बाजारों को राहत दी है, लेकिन कई विशेषज्ञ यह सवाल भी उठा रहे हैं कि क्या ईरान के साथ लंबे टकराव के बाद आखिरकार अमेरिका को अपनी शुरुआती कठोर रणनीति से पीछे हटना पड़ा? साथ ही सवाल यह भी है कि क्या डोनाल्ड ट्रंप को इस युद्ध में नुकसान हुआ है?
क्या अमेरिका-ईरान युद्ध को हुआ नुकसान?
बता दे कि अमेरिकी राष्ट्रपति की तरफ से सफलता बताया जा रहा है। लेकिन कई विश्लेषकों का मानना है कि युद्ध और ऊर्जा संकट से वैश्विक अर्थव्यवस्था पर बढ़ते दबाव ने अमेरिका को अपने कुछ पुराने रुख में नरमी लाने के लिए मजबूर किया। रिपोर्टों के अनुसार, ईरान के परमाणु कार्यक्रम और क्षेत्रीय प्रभाव को लेकर अमेरिका की शुरुआती मांगों की तुलना में समझौते की शर्तें काफी बदली हुई दिखाई देती हैं।
यानि यह कहना गलत नहीं होगा कि वैश्विक शक्ति होने के बाद भी अमेरिका-ईरान के सामने कमजोर पड़ गया। इसके अलावा ईरान की तरफ से अमेरिका को जोरदार टक्कर दी गई।
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को लेकर बढ़ी चिंता
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के खुलने से भारत समेत दुनिया के कई देशों को राहत मिली है, लेकिन अनिश्चितता अभी खत्म नहीं हुई है। तेल कंपनियां, शिपिंग इंडस्ट्री और कई सरकारें इस बात को लेकर सतर्क हैं कि समझौते का पालन कितनी मजबूती से होगा। सुरक्षा, बीमा, समुद्री मार्गों की निगरानी और भविष्य के प्रतिबंध जैसे कई सवाल अभी भी खुले हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि यदि समझौता टूटता है या क्षेत्र में फिर तनाव बढ़ता है, तो वैश्विक ऊर्जा बाजार एक बार फिर बड़े संकट में फंस सकता है। यानि अभी भी खतरा पूरी तरह से टला नहीं है। सबसे खास बात है कि अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अपना बयान कभी भी बदल देते है।
भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात करता है। ऐसे में स्ट्रेट ऑफ होर्मुज का खुलना भारत के लिए राहत भरी खबर मानी जा रही है। इससे कच्चे तेल की आपूर्ति सामान्य होने और कीमतों पर दबाव कम होने की उम्मीद है। वहीं अब खबरे सामने आ रही है कि कच्चे तेल की कीमतों में बदलाव देखने को मिला है।
