---Advertisement---

Artificial Intelligence: क्या एआई वोटर्स का दिमाग कंट्रोल कर सकता है? जानें कैसे चैटबॉट सरकार बदलने से लेकर चुनावी नतीजे तक को करते हैं प्रभावित

Artificial Intelligence: भारत समेत दुनियाभर में एआई का इस्तेमाल अपने चरम पर है। ऐसे में क्या एआई वोटर्स का दिमाग कंट्रोल कर सकता है? अगर हां, तो इससे किस तरह के खतरे पैदा हो सकते हैं।

Avatar of Amit Mahajan

By: Amit Mahajan

Published: जनवरी 17, 2026 1:16 अपराह्न

Artificial Intelligence
Follow Us
---Advertisement---

Artificial Intelligence: एआई यानी आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस का ट्रेंड अब चीते की रफ्तार से दौड़ रहा है। बाजार में लगभग सभी प्रोडक्ट्स में एआई को शामिल करने की तैयारी चल रही है। एआई लोगों की लाइफ का अहम हिस्सा बन चुका है। आजकल घर में सफाई के लिए भी एआई रोबोट्स का इस्तेमाल हो रहा है। ऐसे में क्या एआई वोटर्स का दिमाग कंट्रोल कर सकता है? दरअसल, अभी तक लोगों को सिर्फ अपनी नौकरी जाने का डर था, मगर अब एआई इस भय से भी आगे निकल रहा है और सबसे बड़े लोकतांत्रिक वाले देश में लोगों का माइंड नियंत्रित कर रहा है।

Artificial Intelligence वोटर के दिमाग को कंट्रोल कर सकता है?

‘द कन्वर्सेशन’ की इस रिपोर्ट में ‘कैप्चर द नैरेटिव’ एक्सपेरिमेंट’ के बारे में बताया गया है, जिसने दुनिया भर के लोकतंत्रों के लिए खतरे की घंटी बजा दी है। रिपोर्ट में बताया गया है कि आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस न केवल फर्जी खबरें फैलाने में माहिर है, बल्कि यह वोटर के दिमाग को भी कंट्रोल कर सकता है।

रिसर्चर्स ने “कैप्चर द नैरेटिव” नाम से एक अनोखा मुकाबला आयोजित किया। इसमें ऑस्ट्रेलिया की 18 यूनिवर्सिटीज की 108 टीमों ने हिस्सा लिया। इन छात्रों को आम तौर पर उपलब्ध (कंज्यूमर-ग्रेड) एआई टूल्स का इस्तेमाल करके सोशल मीडिया बॉट्स बनाने थे। इस प्रयोग के लिए एक इन-हाउस सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म, जिस पर ‘सिम्युलेटेड सिटीजन्स’ यानी नकली वोटर मौजूद थे। चार हफ्ते तक चले इस डिजिटल प्रचार युद्ध में बॉट्स ने लोगों को इतना प्रभावित किया कि हारने वाला उम्मीदवार जीत गया।

आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस के जरिए चैटबॉट्स बदल सकते हैं लोगों का नजरियां

रिपोर्ट में आगे बताया गया है कि स्टडी में शामिल छात्रों ने माना कि सच के मुकाबले झूठ फैलाना डरावने हद तक आसान है। एक स्टूडेंट ने कहा, “ईमानदार पोस्ट की तुलना में मैन्युफैक्चर्ड यानी बनावटी पोस्ट को पहचानना मुश्किल है।” जीतने के लिए छात्रों ने ‘टॉक्सिक’ यानी जहरीली भाषा का इस्तेमाल किया। उन्होंने पाया कि जब बॉट्स नफरत भरी बातें करते हैं या नेगेटिव इमोशन्स को भड़काते हैं, तो उन्हें ज्यादा ऑडियंस यानी लाइक्स और शेयर मिलते हैं।

सटीक डिजिटल जानकारी होना ही इस खतरे से बचा सकती है

आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस का इस्तेमाल करके बॉट्स के जरिए लोगों के दिमाग को नियंत्रित किया जा सकता है। ऐसे में रिसर्चर्स ने इससे बचने का तरीका भी बताया है। रिपोर्ट के मुताबिक, ‘डिजिटल साक्षरता’ यानी डिजिटल लिटरेसी के जरिए लोगों को सीखना होगा कि वे कब किसी असली इंसान से बात कर रहे हैं और कब किसी मशीन के फैलाए झूठ का शिकार हो रहे हैं।

Avatar of Amit Mahajan

Amit Mahajan

अमित महाजन DNP India Hindi में कंटेंट राइटर की पोस्ट पर काम कर रहे हैं.अमित ने सिंघानिया विश्वविद्यालय से जर्नलिज्म में डिप्लोमा किया है. DNP India Hindi में वह राजनीति, बिजनेस, ऑटो और टेक बीट पर काफी समय से लिख रहे हैं. वह 3 सालों से कंटेंट की फील्ड में काम कर रहे हैं.
For Feedback - feedback@dnpnewsnetwork.com

Join WhatsApp

Join Now

Join Telegram

Join Now

Related News

Motorola Edge 70 Fusion

मार्च 4, 2026

Holi 2026

मार्च 4, 2026

US-Israel-Iran-War

मार्च 4, 2026

Mojtaba Khamenei

मार्च 4, 2026

Holi 2026

मार्च 4, 2026

Punjab News

मार्च 3, 2026