CJP Protest: मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे को लेकर लगातार विरोध प्रदर्शन के लिए सीजेपी और बाकी के विपक्ष के नेता लगातार कोशिश में जुटे हैं। सफलता नहीं मिल रही है और दिल्ली पुलिस पूरी तरह से एक्शन मोड में है। इस सबके बीच 16 अक्टूबर को लहरा दो तिरंगा मार्च के बीच एक बार फिर दिल्ली को सील कर दिया गया है। जगह-जगह पर पुलिस की पहरेदारी है और चप्पे-चप्पे पर नजरे बनी हुई है। दरअसल ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे को लेकर कॉकरोच जनता पार्टी और बाकी विपक्ष के पार्टी इस मार्च का आह्वान कर रहे हैं। इससे पहले 10 अक्टूबर को भी प्रदर्शन किया गया था जिसे नाकाम करने में दिल्ली पुलिस सफल रही थी।
CJP Protest के खिलाफ 32000 जवानों की तैनाती
रिपोर्ट में बताया जा रहा है कनाट प्लेस और सेंट्रल पार्क में सुरक्षा व्यवस्था को बेहद कड़ा कर दिया गया है। पुलिस ने किसी भी बड़े प्रदर्शन की अनुमति देने से इनकार कर दिया है और पूरे क्षेत्र में सख्त पाबंदियां लागू कर दी हैं। बताया जा रहा है की सुरक्षा व्यवस्था को बरकरार रखने के लिए 6000 से अधिक जवानों को तैनात किया गया है तो वही 220 कंपनियों के लगभग 26000 जवान पहले से ही तैनात है। कुल मिलाकर 32000 सुरक्षाबलों को सीजेपी के मार्च को नाकाम करने के लिए रखा गया है।
पुलिस की हर कोने पर है नजर
इसके साथ ही बताया जा रहा है कि सेंट्रल पार्क और राजीव चौक के आसपास 10 से ज्यादा सीसीटीवी कैमरा लगाया है ताकि किसी भी तरह की अप्रिय घटना ना हो सके। इसके अलावा संसद मार्ग आईटीओ पटेल चौक जैसी जगह पर बैरिकेड लगाए गए है। कहा जा रहा है कि कनॉट प्लेस और बाकी आसपास के इलाकों में 173 लागू कर दिया गया है। 16 और 17 अक्टूबर को सेंट्रल पार्क को आम जनता के लिए बंद किया गया।
क्यों CJP में है विपक्ष को लेकर आक्रोश
सौरभ दास, आशुतोष रांका की गिरफ्तारी के बाद सीजेपी में एक अलग आक्रोश देखा जा रहा है तो वहीं पुलिस का कहना है कि शांति भंग करने या नियमों का उल्लंघन करने वाले के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। हालांकि कुछ चुनिंदा प्रदर्शनकारियों को फ्लैग मार्च करने की अनुमति दी जा सकती है।
ऐसे में यह देखना दिलचस्प होने वाला है कि क्या ज्ञानेश कुमार की कुर्सी पर वाकई खतरा मंडराता है और विपक्ष के इस आंदोलन का क्या परिणाम निकलता है।







