Anurag Dhanda: कॉकरोच जनता पार्टी के द्वारा ऐलान किए गए जंतर मंतर प्रदर्शन को पूरी तरह से दिल्ली पुलिस ने फ्लॉप कर दिया। प्रदर्शनकारियों को यहां पहुंचने से पहले ही अलग-अलग जगह से हिरासत में लिया गया। इसे लेकर तमाम तरह की खबरें सोशल मीडिया पर आ रही है लेकिन इस सब के बीच आखिर अनुराग ढांडा ने क्या कहा है। उन्होंने दिल्ली पुलिस को लेकर एक और खुलासा करते हुए बताया की 200 जेन-जी की गिरफ्तारी हुई लेकिन उन्हें कुछ भी खाने पीने के लिए नहीं दिया गया। आइए जानते हैं अनुराग ढांडा के पोस्ट में ऐसा क्या कहा गया जो फिलहाल चर्चा में है।
Anurag Dhanda ने जेन-जी प्रदर्शनकारियों को लेकर किया ये दावा
इस थाने में दिल्ली की अलग अलग-अलग जगहों से क़रीब 200 Gen Z protesters को पुलिस डिटेन करके लाई थी। बच्चों को सुबह से कुछ खाने तक को नहीं दिया गया था।
पुलिस ने शाम को केजरीवाल जी को रिहा करने की बात कही तो केजरीवाल जी ने कहा इन सब युवाओं को पहले रिहा कीजिए तभी हम जाएँगे। और पुलिस को आख़िरकार सारे युवाओं को रिहा करना पड़ा तभी केजरीवाल जी अपने साथियों के साथ थाने से बाहर आए।
ये होती है एक जननायक की पहचान।
— Anurag Dhanda (@anuragdhanda) October 10, 2026
अरविंद केजरीवाल के एक वीडियो को जारी करते हुए अनुराग ढांडा ने x प्लेटफार्म पर कहा, “इस थाने में दिल्ली की अलग अलग-अलग जगहों से क़रीब 200 Gen Z प्रोटेस्टर को पुलिस डिटेन करके लाई थी। बच्चों को सुबह से कुछ खाने तक को नहीं दिया गया था।” इस पोस्ट में आप नेता ने साफ तौर पर बताया कि डिटेन करके लाई गई जेन जी बच्चों को पुलिस ने कुछ भी खाने को नहीं दिया। उन्हें भूखा रखा। दिल्ली पुलिस पर लगाया गया यह आरोप फिलहाल सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बन गया है।
रिहाई के बाद अरविंद केजरीवाल ने पुलिस के सामने रखी ये शर्त
इसके साथ अनुराग ढांडा ने यह भी कहा कि “पुलिस ने शाम को केजरीवाल जी को रिहा करने की बात कही तो केजरीवाल जी ने कहा इन सब युवाओं को पहले रिहा कीजिए तभी हम जाएंगे। और पुलिस को आख़िरकार सारे युवाओं को रिहा करना पड़ा तभी केजरीवाल जी अपने साथियों के साथ थाने से बाहर आए। ये होती है एक जननायक की पहचान।”
सीजेपी द्वारा बीते दिन जंतर मंतर पर विरोध प्रदर्शन का ऐलान किया गया था लेकिन प्रदर्शनकारियों को यहां पर पहुंचने से पहले ही डिटेन कर लिया गय हिरासत में ध्रुव राठी से लेकर सौरभ दास, अभिजीत दीपके को लिया गया। 6000 प्रदर्शनकारी नेताओं वकीलों और पत्रकारों को पुलिस ने हिरासत में रखा था।
