‘सेहत इजाजत दे या ना दे…’ संसद चलो मार्च के बाद क्या Sonam Wangchuk तोड़ेंगे उपवास! जानिए कौन सी 3 शर्तों का किया ऐलान

Sonam Wangchuk: जंतर मंतर पर लगातार भूख हड़ताल पर बैठे प्रदर्शनकारी ने एक चिट्ठी के जरिए शर्तों की पर बात करते हुए दिखाएं जिसके बाद वह अनशन तोड़ने के लिए तैयार है। उनका कहना है कि चाहे उनकी तबीयत इजाजत दे या ना दे लेकिन वह हड़ताल को जारी रखने वाले हैं।

Sonam Wangchuk

Photo Credit- Google Sonam Wangchuk

Sonam Wangchuk: भारत में नीट परीक्षा और बाकी सभी प्रतियोगी परीक्षाएं जिनके लिए छात्र सालों तक मेहनत करते हैं और उसके बाद किसी गड़बड़ी और लीक की वजह से इसे रद्द कर दिया जाता है। इन सभी मुद्दों को लेकर जंतर मंतर पर पिछले लंबे समय से लगातार प्रदर्शन जारी है। वहीं इस सब के बीच सोशल मीडिया पर अब प्रदर्शनकारी सोनम वांगचुक ने एक हाथ से लिखी हुई चिट्ठी शेयर करते हुए दिखे। उनका साफ कहना है कि संसद चलो मार्च के बाद भी उनका अनशन जारी रहेगा। उन्होंने तीन शर्ते रखी है जिसके बाद वह भूख हड़ताल को खत्म कर सकते हैं। आइए जानते हैं सोनम वांगचुक ने क्या कहा है।

अनशन संसद चलो मार्च के बाद तक क्या सोनम वांगचुक जारी रखेंगे

सोनम वांगचुक ने एक पोस्ट को x प्लेटफॉर्म से शेयर करके ऑप्शन में कहा, “मैं अनशन कब खत्म करूंगा….!
मेरी सेहत खराब होने के बावजूद मेरा अनशन संसद चलो मार्च के बाद तक जारी रहेगा, और यह सिर्फ़ इन हालात में ही टूटेगा…।”

क्या है अनशन तोड़ने के लिए शर्तें

इसके साथ ही दिल्ली के सफदरजंग हॉस्पिटल में अपनी गैर-कानूनी हिरासत से शेयर किए गए हाथ से लिखे लेटर में सोनम वांगचुक ने कहा कि उनकी पहली शर्त यह है कि अगर सरकार एजुकेशन सिस्टम में कथित नाकामी खासकर हाल ही में हुए NEET क्वेश्चन पेपर लीक की जवाबदेही ले। उनकी दूसरी शर्त यह है कि अगर पॉलिटिकल लीडर उन्हें भरोसा दिलाएं कि पेपर लीक का मुद्दा पार्लियामेंट में उठाया जाएगा। अपनी तीसरी मांग में, वांगचुक ने कहा कि टॉप पॉलिटिकल लीडर उनसे हॉस्पिटल में मिलें और बाकी दो शर्तों का भरोसा दें – अगर उनकी सेहत और दूसरे कारण उन्हें आज पार्लियामेंट मार्च का हिस्सा बनने की इजाज़त नहीं देते हैं।

Sonam Wangchuk ने लगाया ये आरोप

कथित तौर पर इस चिट्ठी में सोनम वांगचुक ने आरोप लगाया कि सफदरजंग अस्पताल में उन्हें अवैध रूप से हिरासत में रखा गया है। उनकी आवाजाही, बोलने तथा संचार की स्वतंत्रता को प्रतिबंधित कर दिया गया है। बता दें कि 20 जुलाई 2026 से शुरू हो रहे संसद के मानसून सत्र के पहले दिन समर्थकों द्वारा यह मार्च निकाला जा रहा है।

 

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