Nobel Peace Prize 2026: नोबेल शांति पुरस्कार की घोषणा कर दी गई है। इस बार ये पीस अवॉर्ड दक्षिण अफ्रीका की रहने वाली नवी पिल्लै को मिला है। नवी की जड़े भारत से जुड़ी हुई हैं। यही कारण है कि, दुनिया के इतने बड़े सम्मान को पाने वाली 85 साल की महिला के बारे में हर कोई जानना चाहता है। क्योंकि नवी की जड़े भारत से जुड़ी हुई हैं।
Nobel Peace Prize 2026 जीतने वाली नवी पिल्लै का भारत से क्या है नाता?
नोबेल पीस प्राइज 2026 को जीतने वाली नवी पिल्लै का जन्म भले ही दक्षिण अफ्रीका में हुआ है। लेकिन उनका परिवार भारतीय तमिल मूल का है और उनके दादाजी भारत के तमिलनाडु राज्य के रहने वाले थे। वो साउथ से दक्षिण अफ्रीका गए थे।
नस्लीय भेदभाव के बीच कानूनी पढ़ाई पूरी की
नवी पिल्लै ने उस वक्त अपनी कानूनी प्रैक्टिस दक्षिण अफ्रीका में पूरी की थी जब , वहां पर नस्लीय भेदभाव चर्म पर चलता था। 1967 में उन्होंने साउथ अफ्रीका के नेटाल में कानून की पढ़ाई की थी। इस तरह वो काम करने वाली पहली अश्वेत महिला बनीं।
नेल्सन मंडेला सहित कई लोगों के लिए उठाई आवाज
वकील बनने के बाद नवी पिल्लै ने जेल में बंद कैदियों के लिए कानूनी प्रतिनिधित्व और बुनियादी अधिकार दिलाने में काफी कानूनी लड़ाई लड़ी और पीड़ितों को भी जिताया। उन्होंने नेल्सन मंडेला सहित कई बड़े नस्लभेद विरोधी राजनीतिक कार्यकर्ताओं और कैदियों का अदालतों में बचाव किया।
रवांडा नरसंहार पर सुनाया बड़ा फैसला
नवी पिल्ले ने अकायेसु मामले में बड़ा फैसला सुनाया था। ये रवांडा नरसंहार से जुड़ा मामला था। इस फैसले के तहत अंतरराष्ट्रीय कानून में पहली बार यह माना गया कि युद्ध के दौरान बलात्कार और यौन हिंसा भी नरसंहार का हिस्सा हो सकते हैं। ये महिलाओं के सम्मान के लिए बदला अंतरराष्ट्रीय कानून था।
संयुक्त राष्ट्र की मानवाधिकार उच्चायुक्त के रुप में दी सेवाएं
अपनी मेहन और लगन के दम परलनवी पिल्लै संयुक्त राष्ट्र की मानवाधिकार उच्चायुक्त के रुप में भी काम कर चुकी हैं। नवी ने अपनी सेवाएं साल 2008 से लेकर 2014 तक दी थीं।







