Gyanesh Kumar: मुख्य चुनाव आयुक्त द्वारा एकतरफा फैसला लेने और विशेष ग्रहण पुनरीक्षण फिर में धांधली को लेकर विवाद थमने का नाम नहीं दे रहा है। जहां आपसी कलर अब सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गया है जहां आज इस मामले में सुनवाई होने वाली है। क्या ज्ञानेश कुमार को उनके पद से निलंबित कर दिया जाएगा। इस मांग वाली याचिका पर आखिर सुप्रीम कोर्ट का क्या फैसला आता है इस पर लोगों की नजरे रहने वाली है। जहां मुख्य चुनाव आयुक्त पहले ही विपक्ष के आक्रोश को झेलते हुए नजर आ रहे हैं। 2 अक्टूबर को जंतर मंतर पर प्रदर्शन हुआ और 10 अक्टूबर को एक बार फिर विपक्ष सड़कों पर उतरेंगे।
Gyanesh Kumar पर क्या है चुनाव आयुक्त का आरोप
ज्ञानेश कुमार को लेकर याचिका में आरोप लगाया गया है कि मुख्य चुनाव आयुक्त ने कुछ निर्णय चुनाव आयोग के अन्य सदस्यों की मंजूरी के बिना अकेले ही लिया। इस तरह एकतरफा कोई भी फैसला लेना गलत है और यह नियमों के खिलाफ है। जिस पर दो अन्य चुनाव आयुक्त ने आपत्ति दर्ज की। रिपोर्ट के मुताबिक कथित तौर पर उन्होंने कई बार लिखित शिकायत भी की लेकिन इस पर कोई भी संज्ञान नहीं लिया गया।
क्यों कोर्ट में पहुंच गया मामला
वहीं ज्ञानेश कुमार के आरोंपों के बीच कहना है कि भारत का चुनाव आयोग एक बहुत सदस्यी संस्था है जहां सभी निर्णय लेने के लिए आपसी सहमति या बहुमत होना जरूरी है। याचिका में कहा गया है कि उनकी तरफ से लोकतांत्रिक और संवैधानिक प्रक्रिया की अनदेखी की गई।
विपक्ष के प्रदर्शन से पहले क्या होगा SC का फैसला
रिपोर्ट की माने तो सुप्रीम कोर्ट में दायर की गई याचिका भारत में चुनावी निष्पक्षता और संवैधानिक संस्थाओं के पारदर्शिता और सामूहिक जवाब देही को दिखाता है। ऐसे में आज आने वाले फैसले के बाद यह पता चलेगा कि आखिर ज्ञानेश कुमार के खिलाफ क्या रुख अपनाया जाता है। आखिर वह अपनी सफाई में क्या कहते हैं या फिर उन्हें अपने पद से निलंबित होना पड़ेगा।







