Jharkhand News: झारखंड आंदोलन के प्रमुख नेताओं और समाज सुधारक स्वर्गीय बिनोद बिहारी महतो की जयंती के अवसर पर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने उन्हें श्रद्धापूर्वक नमन किया। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने उनके सामाजिक और शैक्षणिक योगदान को याद करते हुए कहा कि बिनोद बिहारी महतो ने शिक्षा को सामाजिक जागृति और बदलाव का मजबूत माध्यम माना था।
उन्होंने अपना जीवन शिक्षा के प्रसार, सामाजिक चेतना और समाज में मौजूद कुरीतियों के खिलाफ संघर्ष के लिए समर्पित किया। चलिए आपको बताते है इससे जुड़ी सभी अहम जानकारी।
स्व बिनोद बिहारी महतो जी पर सीएम हेमंत सोरेन ने शत-शत किया नमन
बता दें कि सीएम हेमंत सोरेन ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफार्म एक्स पर जानकारी देते हुए लिखा कि “झारखंड आंदोलन के पुरोधा, महान समाज सुधारक एवं शिक्षाविद स्व बिनोद बिहारी महतो जी की जयंती पर शत-शत नमन। स्व बिनोद बाबू ने शिक्षा को सामाजिक जागृति और बदलाव का सबसे सशक्त माध्यम माना।
झारखंड आंदोलन के पुरोधा, महान समाज सुधारक एवं शिक्षाविद स्व बिनोद बिहारी महतो जी की जयंती पर शत-शत नमन।
स्व बिनोद बाबू ने शिक्षा को सामाजिक जागृति और बदलाव का सबसे सशक्त माध्यम माना। उन्होंने समाज में व्याप्त कुरीतियों के खिलाफ संघर्ष करते हुए शिक्षा के प्रसार और सामाजिक चेतना… pic.twitter.com/dslGOj1D6i
— Hemant Soren (@HemantSorenJMM) September 23, 2026
उन्होंने समाज में व्याप्त कुरीतियों के खिलाफ संघर्ष करते हुए शिक्षा के प्रसार और सामाजिक चेतना के लिए अपना पूरा जीवन समर्पित किया। स्व बिनोद बाबू का संघर्ष, विचार और झारखंड के प्रति उनका समर्पण हम सभी के लिए सदैव प्रेरणास्रोत रहेगा। उनके सपनों और विचारों के अनुरूप एक समृद्ध, शिक्षित और न्यायपूर्ण झारखंड के निर्माण के लिए हम सभी को निरंतर प्रयास करते रहना है”।
झारखंड आंदोलन में रहा अहम योगदान
बिनोद बिहारी महतो को झारखंड आंदोलन के प्रमुख नेताओं में गिना जाता है। 4 फरवरी 1973 को धनबाद के गोल्फ ग्राउंड में शिबू सोरेन और ए.के. राय सहित अन्य नेताओं के साथ झारखंड मुक्ति मोर्चा के गठन में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही। उन्होंने अलग झारखंड राज्य की मांग को सामाजिक और राजनीतिक आधार देने के लिए लंबे समय तक काम किया। उनके संघर्ष का केंद्र केवल राजनीतिक बदलाव नहीं था, बल्कि शिक्षा, सामाजिक चेतना और आम लोगों के अधिकार भी थे।







