Jharkhand News: एक बच्चे की जिंदगी मां से शुरू होती है और ऐसे में उसे महिला का ध्यान रखना न सिर्फ एक परिवार की बल्कि सरकार की जिम्मेदारी होती है। इस बात का बखूबी ध्यान सीएम हेमंत सोरेन रखते हैं। यही वजह है कि झारखंड निर्माण श्रमिक मातृत्व प्रसुविधा योजना की शुरुआत की गई है जो गर्भवती महिला के लिए सौगात से कम नहीं है। जहां महिला निर्माण श्रमिक मां को सुविधा प्रदान की जाती है। आइए जानते हैं इस योजना के बारे में खास बातें जो निश्चित तौर पर श्रमिक मां के लिए एक सहारा बना हुआ है।
निर्माण श्रमिक मातृत्व प्रसुविधा योजना कैसे झारखंड की श्रमिक मां के लिए है सहारा
झारखंड निर्माण श्रमिक मातृत्व प्रसुविधा योजना के अंतर्गत झारखंड सरकार की तरफ से गर्भवती मां को बच्चे के जन्म के समय आर्थिक सहायता दी जाती है। उन्हें 15000 प्रदान किए जाते हैं। हालांकि इस योजना का लाभ केवल दो बच्चों के जन्म पर ही मान्य होता है। राज्य की पंजीकृत महिला ही निर्माण श्रमिक मानी जाती है और इस योजना का लाभ उठा सकती हैं। इसके साथ रिपोर्ट में बताया गया कि झारखंड में लगभग 6 लाख संगठित श्रमिक पंजीकृत है और इसमें महिलाएं भी शामिल हैं।
क्या है इस योजना का सरकार की तरफ से फायदा
इस योजना की बात करें तो महिला निर्माण श्रमिकों के गर्भावस्था में हुए खर्च और जन्म के बाद बच्चे की देखभाल के लिए सरकार द्वारा इस योजना की शुरुआत की गई जहां आर्थिक लाभ प्रदान करते हुए 15000 की सहायता दी जा रही है। वहीं इस योजना से एक मां अपने बच्चों की देखभाल और कुपोषण से उसे बचा सकती है। वहीं इसके लिए जरूरी है कि जन्म देने वाली मां के पास ई श्रम कार्ड हो और पंजीकरण संख्या मालूम हो।
किन दस्तावेजों की होती है निर्माण श्रमिक मातृत्व प्रसुविधा योजना में जरूरत
झारखंड निर्माण श्रमिक मातृत्व योजना का लाभ उठाने के लिए निवास प्रमाण पत्र के साथ-साथ आधार कार्ड, पासपोर्ट साइज फोटो जरूरी है तो आप ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। महिला श्रमिक की उम्र 18 से 60 वर्ष के बीच होनी चाहिए।







