Jharkhand News: सीएम हेमंत सोरेन द्वारा चलाए जा रहे झारखंड श्रमिक अनाथ पेंशन योजना के तहत न जाने कितने परिवारों को आर्थिक सहारा मिला है। इसके लिए क्या है जरूरी। आखिर इस योजना के लिए कैसे श्रमिक परिवार को फायदा हो रहा है और कैसे सरकार उनके साथ खड़ी है। आइए जानते हैं झारखंड न्यूज़ में इस योजना के बारे में विस्तार से कि कैसे लोगों को इसका फायदा हो रहा है। मृतक श्रमिक के बच्चों को इसके तहत मानसिक पेंशन प्रदान की जाती है। आइए जानते हैं इस बारे में पूरी खबर क्या है जो निश्चित तौर पर कल्याणकारी योजना है।
Jharkhand News में जानें क्या है श्रमिक अनाथ पेंशन योजना
जहां तक बात करें श्रम रोजगार प्रशिक्षण और कौशल विकास विभाग झारखंड सरकार द्वारा शुरू किए गए इस योजना के बारे में तो यहां पंजीकृत श्रमिक की मृत्यु हो जाने पर अनाथ बच्चों को मानसिक पेंशन प्रदान की जाती है। सरकार की तरफ से आर्थिक सहायता दिया जाता है। लाभार्थी को मृत श्रमिक को मिल रही पेंशन का 50 प्रतिशत या अधिकतम 500 प्रतिमाह दिए जाते हैं। गरीब मजदूर और श्रमिकों के लिए कल्याणकारी योजना लाने के लिए झारखंड सरकार लगातार प्रतिबद्ध है।
श्रमिक अनाथ पेंशन योजना के लिए क्या है आवेदन की शर्तें
वहीं रिपोर्ट में बताया जाता है कि श्रमिक अनाथ पेंशन योजना का मुख्य उद्देश्य श्रमिकों की मृत्यु के बाद उनके अनाथ हुए बच्चों को आर्थिक सहायता प्रदान करना है। इसका लाभ उन्ही परिवारों को मिलेगा जिसका पंजीकरण झारखंड बिल्डिंग एंड अंडर कंस्ट्रक्शन वर्कर वेलफेयर बोर्ड में होगा। मृत श्रमिक के पास ई श्रम कार्ड होना अनिवार्य बताया गया है। वहीं बताया जाता है कि 18 वर्ष से कम के लाभार्थी होने पर पेंशन आधी आधी बांट दी जाएगी। वहीं इसके तहत मृत श्रमिक झारखंड का मूल निवासी होना जरूरी है। वहीं बोर्ड से उन्हें पेंशन मिल रहा हो और बच्चे को 18 वर्ष से ज्यादा का होना जरूरी है।
झारखंड श्रमिक अनाथ पेंशन योजना का लाभ पाने के लिए आप ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं और इसके पूरी जानकारी उपलब्ध है।







