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Indore News: 21 टीमें, 11 एम्बुलेंस! दूषित जल को लेकर मचे हड़कंप के बीच एक्शन में सरकार, मृतकों के परिजनों को मुआवजा देने के निर्देश

Indore News: दूषित जल पीने से मचे हड़कंप के बीच राज्य सरकार एक्शन मोड में है। मृतकों के परिजनों के नाम 2 लाख रुपए का मुआवजा जारी करने के निर्देश आए हैं।

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Picture Credit: गूगल

Indore News: चर्चित शहर इंदौर के भागीरथपुरा इलाके में दूषित जल पीने से मचे हड़कंप के बीच सरकार एक्शन मोड में नजर आ रही है। आधिकारिक रूप से दूषित जल पीने से 4 लोगों की मौत होने की बात कही गई है। हालांकि, इंडिया टीवी की रिपोर्ट के मुताबिक अब तक 11 लोगों की मौत हुई है और 100 से ज्यादा लोग इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती हैं। इसी बीच राज्य सरकार ने मृतकों के परिवारों को 2 लाख रुपए प्रति परिवार सहायता प्रदान करने का ऐलान किया है।

सरकारी महकमा अलर्ट पर है और स्वास्थ्य विभाग की 21 टीमें इलाके के अलग-अलग हिस्सों में जांच-पड़ताल कर रही हैं। 11 एंबुलेंस भी प्रभावित इलाके में तैनात है और बीमार लोगों को अस्पताल ले जाने में सेवा दे रहा है। मध्य प्रदेश सरकार की ओर से स्थानीय विधायक औक मंत्री कैलाश विजयवर्गीय लगातार तैनात हैं और व्यवस्थाओं की निगरानी कर रहे हैं।

दूषित जल को लेकर मचे हड़कंप के बीच एक्शन में सरकार

राज्य सरकार लगातार इस प्रकरण को लेकर एक्शन मोड में है। सरकार की ओर से मंत्री कैलाश विजयवर्गीय भागीरथपुरा इलाके में डेरा जमाए हुए हैं। प्रभावित इलाके में स्वास्थ्य सेवाओं को विस्तार देने के लिए चिकित्सकों और सर्वे दलों की संख्या बढाई गई है। डॉक्टर, पैरामेडिकल, ए.एन.एम. आशा कार्यकर्ताओं से लैस कुल 21 टीमें भागीरथपुरा इलाके में लगातार एक्शन मोड में है।

11 एंबुलेंस तैनात हैं जो क्षेत्र में 24×7 सेवा देने के लिए तैयार हैं। निजी चिकित्सालयों में भी निःशुल्क उपचार के निर्देश मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव द्वारा जारी किए गए हैं, ताकि बीमार पड़े लोगों को इलाज मुहैया कराई जा सके। राज्य सरकार पूरी तत्परता के साथ इस चुनौती से पार पाने की कोशिश में जुटी है।

मृतकों के परिजनों को मिलेगा 2 लाख का मुआवजा

सरकार की ओर से मृतकों के परिजनों के नाम मुआवजा जारी करने का निर्देश सामने आया है। सभी मृतकों के परिजनों को राज्य सरकार 2 लाख रुपए का मुआवजा देगी। वहीं बीमार पड़े लोगों को मुफ्त इलाज मुहैया कराया जा रहा है। भागीरथपुरा आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों की बस्ती है। यही वजह है कि सरकार ये सुनिश्चित कर रही है कि पैसे के अभाव में किसी का इलाज न रुके। अभी भी 150 से अधिक लोग अस्पतालों पर भर्ती हैं जिनका इलाज जारी है। राज्य सरकार पूरी गंभीरता के साथ इस प्रकरण पर कार्रवाई कर रही है।

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