Mohan Yadav: मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री एक तरफ जहां उत्तर प्रदेश के साथ मिलकर आपसी सहयोग को बढ़ा रहे हैं, ताकि दोनों प्रदेशों के नागरिकों को बेहतर भविष्य मिल सके। साथ ही दोनों राज्यों के संगम से सांस्कृतिक संबंधों में मजबूती देखने को मिले। वहींं, दूसरी तरफ, मध्य प्रदेश में बीजेपी यानी भारतीय जनता पार्टी की सरकार किसानों को भी सश्क्त और मजबूत बनाने की दिशा में दिन-रात काम कर रही है। इसी कड़ी में एमपी सरकार ने किसानों की आय बढ़ाने और उनकी मेहनत का उचित मूल्य दिलाने को लेकर कई बड़े कदम उठाए हैं। इससे अन्नदाताओं की जिंदगी बेहतर होने की उम्मीद है।
मोहन यादव सरकार ने किसानों के लिए उठाए कई बड़े कदम
किसानों की भलाई के लिए एमपी की मोहन यादव सरकार ने बताया है कि एमपी में गेहूं की खरीदी समर्थन मूल्य पर होगी। इससे किसानों को उपज का बेहतर दाम मिलेगा। गेहूं उपार्जन के लिए 2625 रुपये प्रति क्विंटल राशि निर्धारित की गई है। समर्थन मूल्य के अतिरिक्त 40 रुपये प्रति क्विंटल का बोनस लाभ भी दिया जाएगा। राज्य में इंदौर, उज्जैन, भोपाल, नर्मदापुरम संभाग में 10 अप्रैल से गेहूं की खरीदी शुरू होगी। जबकि एमपी के शेष सभी क्षेत्रों में 15 अप्रैल से गेहूं की खरीदी आरंभ होगी। अभी तक 19 लाख 4 हजार किसानों ने अपना पंजीकरण कराया है। एमपी सरकार के इस कदम साफ है कि वह किसानों के जीवनयापन को सुधारने के लिए पूर्ण रूप से प्रतिबद्ध है।
किसानों की मेहनत का उचित मूल्य दिलाने संकल्पित है
मध्यप्रदेश सरकार⏹️19 लाख 4 हजार किसानों ने कराया पंजीयन
⏹️गेहूं उपार्जन – ₹2625 प्रति क्विंटल@DrMohanYadav51 @foodsuppliesmp @minmpkrishi #CMMadhyaPradesh pic.twitter.com/DmsNIVU4l2
— Chief Minister, MP (@CMMadhyaPradesh) April 4, 2026
मोहन यादव सरकार ने किसानों के लिए उठाएं कई हितकारी कदम
इसके अलावा, एमपी की मोहन यादव सरकार ने कई अहम निर्णय लिए हैं। एमपी सरकार ने किसानों के हित को ध्यान में रखते हुए फसल मंडियों का आधुनिकीकरण किया है। इलेक्ट्रॉनिक प्लेटफॉर्म के जरिए सीधे खरीदी शुरू की गई है। कमीशन एजेंटों की कटौती और किसानों को अधिक पैसा मिल रहा है। बीजेपी सरकार ने बीज, उर्वरक और सिंचाई के लिए सब्सिडी जारी की है। साथ ही फसल बीमा योजनाओं का व्यापक प्रचार किया गया है। डायरेक्ट पेमेंट से किसानों को सीधा लाभ हुआ है। इससे खरीदी का पैसा सीधे बैंक खाते में आता है। कृषि मूल्य स्थिरता को बल दिया गया है। इससे आवश्यक फसलों जैसे- धान, गेहूं, सोयाबीन के लिए एमएसपी यानी न्यूनतम समर्थन मूल्य बढ़ाना पड़ा, जोकि अन्नदाताओं के लिए लाभदायक साबित हुआ।
