Mohan Yadav: किसान कल्याण के लिए समर्पित मध्य प्रदेश सरकार लगातार विकास कार्यों को पूरा कर रही है। सीएम मोहन यादव की अगुवाई में बीजेपी सरकार ने पिछले 2 सालों में प्रदेश को उन्नति की ओर लेकर जाने का पूरा प्रयास किया है। ऐसे में अब एमपी सरकार महिलाओं को भी विकास के साथ जोड़ने का काम कर रही है। इसी कड़ी में सरकार महिला सशक्तिकरण पर अधिक जोर दे रही है। मध्य प्रदेश में महिला सशक्तिकरण का नया दौर शुरू हो चुका है। प्रदेश सरकार के सतत प्रयासों से महिलाएं तेजी से आर्थिक रूप से सशक्त और आत्मनिर्भर बन रही हैं।
Mohan Yadav सरकार महिलाओं को कर रही सशक्त और स्वावलंबी
प्रदेश को विकास की ओर आगे बढ़ाने के लिए महिलाओं की भागीदारी को जरूरी समझते हुए मध्यप्रदेश सरकार कई कदम उठा रही है। मुख्यमंत्री मोहन यादव की अगुवाई में मध्यप्रदेश सरकार के सतत प्रयासों से महिलाएं सशक्त और स्वावलंबी बन रही हैं। 5 लाख से अधिक स्व-सहायता समूहों से जुड़कर 65 लाख से अधिक बहनें आर्थिक रूप से सशक्त बनीं। प्रदेश में 12 लाख से अधिक ‘लखपति दीदियां’ आत्मनिर्भरता की प्रेरक मिसाल बनी।प्रदेश के 47% नए स्टार्ट-अप्स का नेतृत्व महिला उद्यमी कर रहीं है।
मध्यप्रदेश में महिला सशक्तिकरण का नया दौर
प्रदेश सरकार के सतत प्रयासों से महिलाएं तेजी से आर्थिक रूप से सशक्त और आत्मनिर्भर बन रही हैं@DrMohanYadav51@mp_wcdmp#CMMadhyaPradesh #MadhyaPradesh pic.twitter.com/uB9Ar1l6Nk
— Chief Minister, MP (@CMMadhyaPradesh) March 15, 2026
सीएम मोहन यादव ने प्रदेशवासियों को दी खास जानकारी
उधर, मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने बताया, ‘मुझे प्रसन्नता है कि वर्ष 2024 से प्रारंभ “जल गंगा संवर्धन अभियान” के माध्यम से प्रदेश में 2.79 लाख से अधिक कुओं, बावड़ियों, तालाबों, चेक डैम सहित विभिन्न जल संरचनाओं के संरक्षण और संवर्धन का कार्य किया गया है। जनभागीदारी के इस प्रयास ने मध्यप्रदेश को जल संरक्षण के क्षेत्र में अग्रणी राज्यों की पंक्ति में स्थापित किया है।’
उन्होंने आगे कहा, ’19 मार्च, गुड़ी पड़वा के पावन पर्व से इस अभियान का पुनः शुभारंभ किया जा रहा है, जो गंगा दशमी तक निरंतर चलेगा। इस अवधि में जल संग्रहण से जुड़ी सभी संरचनाओं के संरक्षण, पुनर्जीवन और सुदृढ़ीकरण पर व्यापक स्तर पर कार्य किया जाएगा, जिसमें 16 विभाग सक्रिय रूप से सहभागी बनेंगे। आइए, हम सभी मिलकर प्रकृति के इस अमूल्य उपहार की रक्षा करें और बूंद-बूंद जल का संचय कर भविष्य को सुरक्षित बनाने का संकल्प लें।’
