व्यापारियों और कारोबारियों के लिए खुशखबरी, CM Bhagwant Mann सरकार ने शुरू की ओटीएस स्कीम, चेक करें अंतिम तारीख

CM Bhagwant Mann: पंजाब सरकार ने राज्य के व्यापारियों और कारोबारियों को बड़ी राहत दी है। वहीं इसकी अंतिम तारीख का भी ऐलान कर दिया गया है।

CM Bhagwant Mann

फाइल फोटो

CM Bhagwant Mann: पंजाब सरकार ने राज्य के व्यापारियों और कारोबारियों को बड़ी राहत देते हुए ओटीएस यानि वन टाइम सेटलमेंट स्कीम लागू करने का फैसला किया है। सरकार का कहना है कि इस योजना के माध्यम से लंबे समय से बकाया टैक्स विवादों का समाधान आसान होगा, व्यापारियों को वित्तीय राहत मिलेगी और राजस्व से जुड़े मामलों का तेजी से निपटारा किया जा सकेगा।

वहीं अगर इसकी अंतिम तारीख की बात करें तो ये 31 जुलाई 2026 है। राज्य सरकार के अनुसार, यह योजना उन पात्र व्यापारियों और कारोबारियों के लिए लाभदायक होगी, जिनके टैक्स संबंधी मामले लंबे समय से लंबित हैं। इसके तहत निर्धारित शर्तों के अनुसार बकाया राशि का निपटारा करने का अवसर दिया जाएगा। इसकी जानकारी पंजाब के वित्त, आबकारी एवं कराधान और योजना मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने दी है।

ओटीएस को लेकर हरपाल सिंह चीमा ने दी अहम जानकारी

पंजाब सरकार में वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने जानकारी देते हुए कहा कि “31 जुलाई आखिरी तारीख है; व्यापारियों और कारोबारियों को OTS स्कीम का फ़ायदा उठाना चाहिए। मान सरकार एक बार फिर ‘वन-टाइम सेटलमेंट’ (OTS) स्कीम के ज़रिए फ़ायदा उठाने का मौका दे रही है।

कांग्रेस पार्टी के पाँच साल के कार्यकाल में जमा हुए ₹64,000 करोड़ के GST रेवेन्यू की तुलना में, मान सरकार ने सिर्फ़ चार साल में ₹94,000 करोड़ का रेवेन्यू हासिल किया है”। गौरतलब है कि CM Bhagwant Mann की अगुवाई में राज्य सरकार विकास की और तेजी से अग्रसर हो रही है। जिसका असर साफ तौर पर देखने को मिल रहा है।

क्या है ओटीएस स्कीम

ओटीएस यानि वन टाइम सेटलमेंट एक ऐसी स्कीम है जिसके तहत पात्र करदाताओं को पुराने और लंबित टैक्स विवादों का एकमुश्त निपटारा करने का अवसर मिलता है। सरकार का उद्देश्य वर्षों से लंबित मामलों को कम करना और व्यापारियों को अनावश्यक कानूनी प्रक्रियाओं से राहत देना है।

मान लीजिए की किसी व्यापारी द्वारा सही तरीके से टैक्स नहीं भरा गया है और विभाग द्वारा उसपर भारी भरकम टैक्स लगा दिया गया है। वहीं अब इसे देखते हुए ओटीएस स्कीम लाई गई है, ताकि सेटलमेंट किया जा सके। सेटलमेंट के तहत बकाया राशि में कटौती की जाती है और बची राशि का भुगतान करना होता है।

 

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