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Punjab News: मुख्य मंत्री ने नीति आयोग की उच्च स्तरीय टीम के समक्ष राज्य की मांगें जोरदार ढंग से उठाईं

Punjab News:पंजाब के मुख्य मंत्री भगवंत सिंह मान ने आज नीति आयोग की टीम के सामने राज्य का पक्ष जोरदार ढंग से रखा और समर्थन की मांग की ताकि एक ओर पंजाब का समग्र विकास सुनिश्चित हो और दूसरी ओर इसके हितों की भी रक्षा हो।

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By: ROZY ALI

Published: जून 26, 2025 10:35 अपराह्न

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Punjab News:पंजाब के मुख्य मंत्री भगवंत सिंह मान ने आज नीति आयोग की टीम के सामने राज्य का पक्ष जोरदार ढंग से रखा और समर्थन की मांग की ताकि एक ओर पंजाब का समग्र विकास सुनिश्चित हो और दूसरी ओर इसके हितों की भी रक्षा हो।

यह उपयुक्त समय है जब आयोग को पानी और कृषि से संबंधित पंजाब की समृद्ध विरासत को बचाने के लिए खुले दिल से मदद करनी चाहिए

नीति आयोग के सदस्य प्रो. रमेश चंद और प्रोग्राम डायरेक्टर संजीत सिंह के नेतृत्व वाली टीम के साथ विचार-विमर्श के दौरान मुख्य मंत्री ने कहा कि यह उपयुक्त समय है जब आयोग को पानी और कृषि से संबंधित पंजाब की समृद्ध विरासत को बचाने के लिए खुले दिल से मदद करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि राज्य की 553 किलोमीटर लंबी अंतरराष्ट्रीय सीमा पाकिस्तान से लगती है और छह जिले अमृतसर, तरन तारन, गुरदासपुर, पठानकोट, फिरोजपुर और फाजिल्का सीमा पर स्थित हैं। भगवंत सिंह मान ने अफसोस जताया कि केंद्र सरकार द्वारा हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड और जम्मू-कश्मीर को विशेष रियायतें देने से पंजाब के सीमावर्ती जिलों की अर्थव्यवस्था पर बुरा असर पड़ा है।

मुख्य मंत्री ने कहा कि पंजाब के व्यापार और औद्योगिक क्षेत्र में फिर से जान फूंकने के लिए हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड और जम्मू-कश्मीर की तर्ज पर पंजाब के सीमावर्ती जिलों को भी सहारा देने की जरूरत है। सीमावर्ती जिलों के लिए विशेष रियायती पैकेज की मांग करते हुए, उन्होंने प्रत्येक सीमावर्ती जिले में एग्रो फूड प्रोसेसिंग जोन स्थापित करने की वकालत की, जिसमें विशेष ध्यान बासमती चावल उद्योग और लीची जैसे बागवानी उत्पादों पर दिया जाए। भगवंत सिंह ने सीमावर्ती जिलों में मौजूदा फोकल पॉइंट्स के नवीनीकरण और अमृतसर में प्रदर्शनी-कम-सम्मेलन केंद्र स्थापित करने की भी वकालत की।

मुख्य मंत्री ने एग्रो क्षेत्र के लिए पी.एल.आई. स्कीम, टेक्सटाइल क्षेत्र के लिए कर रियायतें, उद्योग के लिए परिवहन सब्सिडी, और सीमावर्ती जिलों के लिए रियायती ब्याज दरों पर ऋण और कार्यशील पूंजी की भी मांग की। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय सीमा पर कांटेदार तारों के बीच की जमीन के मालिकों के लिए मुआवजे में वृद्धि की मांग करते हुए कहा कि किसानों की 17,000 एकड़ से अधिक जमीन कांटेदार तारों के पार है। भगवंत सिंह मान ने कहा कि वर्तमान में किसानों को प्रति एकड़ प्रति वर्ष 10,000 रुपए मुआवजा दिया जाता है, जिसे बढ़ाकर 30,000 रुपए किया जाए। उन्होंने आगे कहा कि यह मुआवजा केंद्र और राज्य सरकार द्वारा संयुक्त रूप से देने के बजाय पूरी तरह से केंद्र सरकार द्वारा दिया जाए, क्योंकि ये मेहनती किसान देश को खाद्यान्न के मामले में आत्मनिर्भर बनाने के लिए कड़ी मेहनत कर रहे हैं।

सीमावर्ती क्षेत्रों में रक्षा की दूसरी पंक्ति को मजबूत करने के संबंध में, मुख्य मंत्री ने सभी 2107 सीमावर्ती गांवों के लिए बॉर्डर विंग होम गार्ड्स स्कीम को मजबूत करने पर जोर दिया। उन्होंने प्रत्येक जवान के लिए 1999 में निर्धारित ड्यूटी भत्ता 45 रुपए प्रतिदिन से बढ़ाकर न्यूनतम 655 रुपए करने की भी मांग की। उन्होंने कहा कि सीमावर्ती गांवों और बी.एस.एफ. के बीच बेहतर तालमेल के लिए यह आवश्यक है। भगवंत सिंह मान ने ड्रोन के माध्यम से नशे और हथियारों की तस्करी रोकने के लिए जैमर सहित अन्य उपकरण और बुनियादी ढांचे को अपग्रेड करने के लिए 2829 करोड़ रुपये की भी मांग की।

यह बहुत महत्वपूर्ण है क्योंकि सीमा का 4/5 हिस्सा जैमिंग सिस्टम के बिना है

मुख्य मंत्री ने कहा कि यह बहुत महत्वपूर्ण है क्योंकि सीमा का 4/5 हिस्सा जैमिंग सिस्टम के बिना है, जिसके कारण देश की एकता, अखंडता और संप्रभुता के लिए बड़ी चुनौती खड़ी होती है। भगवंत सिंह मान ने केंद्र सरकार द्वारा शुरू किए गए ‘गतिशील गांव प्रोग्राम’ में संशोधन करके राज्य के अधिक से अधिक सीमावर्ती गांवों को इसका लाभ देने की मांग की। उन्होंने कहा कि पंजाब के सीमावर्ती जिलों में अन्य राज्यों की तुलना में अधिक आबादी रहती है। उन्होंने कहा कि सीमा के 10 किलोमीटर के दायरे में राज्य के 1500 गांव आते हैं, जिनमें से केवल 101 गांवों को इस योजना के लिए चुना गया है।

मुख्य मंत्री ने कहा कि पंजाब को रियायतें देने की जरूरत है ताकि सीमावर्ती गांवों और कस्बों में आम लोगों की जरूरतें पूरी की जा सकें। उन्होंने आगे कहा कि पाकिस्तान के साथ हालिया झड़पों ने सीमावर्ती जिलों को युद्ध के लिए तैयार करने की जरूरत को उजागर किया है, जिसके तहत सीमावर्ती गांवों के लिए वैकल्पिक संपर्क मार्ग और शहरी आबादी के लिए बंकरों और हवाई आश्रयों का निर्माण किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि प्रत्येक जिले में आपातकालीन ऑपरेशन सेंटर और अत्याधुनिक रिस्पॉन्स कमांड व कंट्रोल सेंटर, स्ट्रीट लाइटों के लिए सेंसर, सीमावर्ती शहरों में ट्रॉमा सेंटर और द्वितीयक व तृतीयक स्वास्थ्य देखभाल सेवाएं प्रदान करना जरूरी है। इसी तरह, भगवंत सिंह मान ने कहा कि वायु सेना, थल सेना और बी.एस.एफ. के बीच सुचारू संचार के लिए सुरक्षित लाइनों को सुनिश्चित करने के साथ-साथ साइबर सुरक्षा के लिए कदम उठाए जाएं, ‘गतिशक्ति प्रोग्राम’ के तहत संसाधन मैपिंग और जिला सिविल डिफेंस को मजबूत किया जाए। इसके साथ-साथ आपदा के दौरान राहत कार्य भी सुनिश्चित किए जाने चाहिए।

मुख्य मंत्री ने राज्य सरकार द्वारा की गई महत्वपूर्ण पहलों की ओर ध्यान आकर्षित किया

औद्योगिक क्षेत्र के मुद्दों को उठाते हुए, मुख्य मंत्री ने राज्य सरकार द्वारा की गई महत्वपूर्ण पहलों की ओर ध्यान आकर्षित किया, जिनमें फास्ट ट्रैक पंजाब पोर्टल, समयबद्ध सेवाएं, राइट टू बिजनेस एक्ट, रंग-कोडेड स्टांप पेपर की शुरुआत और निवेश-अनुकूल अन्य कदम शामिल हैं। उन्होंने कहा कि वर्तमान में राज्य की अर्थव्यवस्था में विनिर्माण का हिस्सा 14.4 प्रतिशत है, लेकिन राज्य सरकार 2030 तक इसे बढ़ाकर 20 प्रतिशत और 2047 तक 25 प्रतिशत करने की इच्छुक है। भगवंत सिंह मान ने इसके लिए पूरी तरह से जमीनी सीमा से जुड़े पंजाब के लिए परिवहन सब्सिडी की मांग की और छोटे निर्माताओं के लिए एक्सपोर्ट प्रमोशन कैपिटल गुड्स (ई.पी.सी.जी.) स्कीम की तर्ज पर योजना लाने की मांग की ताकि उनके उत्पाद देश के भीतर भेजे जा सकें।

मुख्य मंत्री ने पी.एल.आई. का विस्तार साइकिल, ई-बाइक और इन उपकरणों, साइकिलों के लिए नए उत्पाद डिजाइन व सामग्री, और अनुसंधान व विस्तार सुविधाओं तक बढ़ाने और लुधियाना में एस.पी.वी. मोड में हाई टेक वैली इंडस्ट्रियल पार्क के विस्तार और इसे साइकिल निर्यात जोन के क्लस्टर के रूप में विकसित करने की मांग की। उन्होंने जालंधर में खेल उत्पादों का निर्यात जोन विकसित करने, खेल के मैदानों के विकास के लिए मांग को बढ़ावा देने के लिए राज्य की मेगा स्पोर्ट्स पहल, और पंजाब के प्रत्येक गांव में इंडोर जिम बनाने और खेल उद्योग को बढ़ावा देने के लिए विशेष आर्थिक जोन बनाने की मांग की। भगवंत सिंह मान ने ऑटोमोबाइल क्षेत्र के लिए अनुसंधान व विकास, नए उत्पाद डिजाइन व सामग्री, और कौशल विकास कार्यक्रम चलाने की मांग की ताकि ऑटो और इलेक्ट्रॉनिक वाहन प्रौद्योगिकियों की जरूरतों को पूरा किया जा सके। उन्होंने मोहाली में ऑटो और ऑटो उत्पादों के लिए समर्पित निर्यात जोन विकसित करने पर भी जोर दिया।

मुख्य मंत्री ने राज्य के लिए विशेष आर्थिक पैकेज की भी मांग की, जिसमें दो हजार करोड़ रुपये का विशेष आर्थिक जोन, औद्योगिक कॉरिडोर (वैश्विक विनिर्माण हब), भारत माला परियोजना, मोहाली में सेमीकंडक्टर लैब का विस्तार, मोहाली में सॉफ्टवेयर प्रौद्योगिकी पार्कों का विस्तार, और पंजाब में प्रत्येक क्षेत्र के लिए विशेष निर्यात जोन बनाने की मांग शामिल है, जिनमें अमृतसर के लिए खाद्य प्रसंस्करण, लुधियाना के लिए टेक्सटाइल और मोहाली के लिए ऑटोमोबाइल पार्क शामिल हैं। कृषि क्षेत्र के बारे में बात करते हुए, उन्होंने देश को खाद्यान्न के मामले में आत्मनिर्भर बनाने में राज्य के मेहनती किसानों की अग्रणी भूमिका को याद किया। भगवंत सिंह मान ने बताया कि पंजाब देश का लगभग 12 प्रतिशत और विश्व का लगभग दो प्रतिशत चावल पैदा करता है। उन्होंने कहा कि पंजाब सरकार राज्य में फसली विविधता को बढ़ावा देने के लिए लगातार प्रयास कर रही है।

मुख्य मंत्री ने फसली विविधता और कम पानी वाली धान की किस्मों की खेती को बढ़ावा देने के लिए केंद्र सरकार से सहयोग की मांग की। उन्होंने कहा कि खरीफ सीजन 2025 के दौरान पंजाब सरकार ने राज्य में खरीफ मक्का को बढ़ावा देने के लिए छह जिलों में पायलट परियोजना शुरू की है, इसके लिए प्रति हेक्टेयर 17,500 रुपए की वित्तीय सहायता दी जा रही है। भगवंत सिंह मान ने कहा कि भारत सरकार को ऐसी पहल का समर्थन करके 17,500 रुपए प्रति हेक्टेयर का नकद भुगतान करने के लिए धन उपलब्ध कराना चाहिए ताकि राज्य के सभी मक्का उत्पादक मौजूदा फसली विविधता कार्यक्रम से जुड़ सकें।

राज्य के दक्षिण-पश्चिमी जिलों में कपास खरीफ की मुख्य फसल है

इसी तरह, मुख्य मंत्री ने कहा कि राज्य के दक्षिण-पश्चिमी जिलों में कपास खरीफ की मुख्य फसल है और इसकी अधिकांश खेती बठिंडा, मानसा, फाजिल्का और श्री मुक्तसर साहिब जिलों में होती है। उन्होंने कपास की खेती के तहत अधिक रकबा लाने, धान की प्रत्यक्ष बुवाई तकनीक को बढ़ावा देने, और गुलाबी सुंडी की रोकथाम के लिए सहयोग मांगा। उन्होंने कहा कि गुलाबी सुंडी एक बड़े खतरे के रूप में सामने आई है और इसकी रोकथाम के लिए कीटनाशकों का खर्च बढ़ा है। उन्होंने कहा कि जब तक इसकी रोकथाम करने वाले नए बीज सामने नहीं आते, तब तक पी.बी.डब्ल्यू. के प्रबंधन के लिए इस सुंडी की प्रजनन क्रिया को रोकने वाली तकनीक के लिए सहयोग दिया जाए। भगवंत सिंह मान ने यह भी कहा कि 20 और ए.आई. आधारित पी.बी.डब्ल्यू. फेरोमोन ट्रैप भी दिए जाएं, जो इस सुंडी के हमले के बारे में अग्रिम चेतावनी देते हैं। उन्होंने कहा कि राज्य में कपास पर गुलाबी सुंडी के हमले के बारे में अग्रिम जानकारी दी जाए, जैसा कि पहले सेंट्रल इंस्टीट्यूट ऑफ कॉटन रिसर्च, नागपुर द्वारा किया जाता रहा है।

मुख्य मंत्री ने कहा कि मजदूरी की लागत कपास की खेती में होने वाले प्रमुख खर्चों में से एक है क्योंकि यह उत्पादन की कुल लागत का लगभग 14 प्रतिशत है। उन्होंने कहा कि इसके लिए उत्तरी क्षेत्र/पंजाब में कपास की खेती में मशीनीकरण के दायरे का मूल्यांकन किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि भारत सरकार को किसानों को रियायती दरों पर कपास के बीज उपलब्ध कराकर सहायता प्रदान की जानी चाहिए। भगवंत सिंह मान ने कहा कि कपास से धान के तहत रकबे में वृद्धि का मुख्य कारण कपास में कम मुनाफा है, जबकि कपास की फसल पानी बचाने वाली फसल है और भूजल के गिरते स्तर को बचाने के लिए धान के तहत रकबे को कपास के तहत लाया जा सकता है।

मुख्य मंत्री ने कहा कि इसके लिए किसानों को मुनाफे का अवसर देकर रकबे के आधार पर कपास की खेती के लिए प्रोत्साहित किया जाना चाहिए। एक अन्य महत्वपूर्ण मुद्दा उठाते हुए, उन्होंने दोहराया कि पंजाब के पास किसी भी अन्य राज्य के लिए अतिरिक्त पानी नहीं है। उन्होंने जोर देकर कहा कि राज्य में पानी की गंभीर स्थिति को देखते हुए सतलुज यमुना लिंक (एसवायएल) नहर के बजाय यमुना-सतलुज-लिंक (वायएसएल) नहर के निर्माण पर विचार किया जाना चाहिए। भगवंत सिंह मान ने आगे कहा कि रावी, ब्यास और सतलुज नदियां पहले ही कम पानी के साथ बह रही हैं, जिसके कारण पानी को अतिरिक्त पानी वाले स्रोतों से कम पानी वाले स्रोतों की ओर मोड़ा जाना चाहिए।

मुख्य मंत्री ने कहा कि पंजाब ने बार-बार यमुना के पानी की वितरण के लिए बातचीत में शामिल होने की मांग की है क्योंकि यमुना-सतलुज-लिंक परियोजना के लिए 12 मार्च, 1954 को पुराने पंजाब और उत्तर प्रदेश के बीच एक समझौता हुआ था, जिसमें पुराने पंजाब को यमुना के पानी के दो-तिहाई हिस्से का हकदार बनाया गया था। उन्होंने कहा कि इस समझौते में यमुना के पानी से सिंचाई के लिए किसी विशेष क्षेत्र को नहीं दर्शाया गया था। उन्होंने कहा कि पुनर्गठन से पहले यमुना नदी रावी और ब्यास की तरह पुराने पंजाब से होकर बहती थी। भगवंत सिंह मान ने दुख व्यक्त किया कि पंजाब और हरियाणा के बीच नदी जल वितरण के समय यमुना के पानी पर विचार नहीं किया गया, जबकि रावी और ब्यास के पानी को ही विचार में लिया गया।

भारत सरकार द्वारा गठित सिंचाई आयोग की 1972 की रिपोर्ट का हवाला देते हुए, मुख्य मंत्री ने कहा कि इसमें कहा गया है कि पंजाब (1966 के पुनर्गठन के बाद) यमुना नदी बेसिन में आता है। उन्होंने कहा कि इसलिए यदि हरियाणा का रावी और ब्यास नदियों के पानी पर दावा है, तो पंजाब का भी यमुना के पानी पर समान दावा होना चाहिए। उन्होंने कहा कि इन मांगों को अनदेखा कर दिया गया है और साथ ही कहा कि यमुना नदी पर भंडारण ढांचे का निर्माण न होने के कारण पानी बर्बाद हो रहा है। भगवंत सिंह मान ने अनुरोध किया कि इस समझौते के संशोधन के दौरान पंजाब के दावे पर विचार किया जाना चाहिए और पंजाब को यमुना के पानी पर उसका उचित हिस्सा दिया जाना चाहिए।

बोर्ड का गठन पंजाब पुनर्गठन अधिनियम, 1966 के प्रावधानों के तहत किया गया था

भाखड़ा ब्यास प्रबंधन बोर्ड (बी.बी.एम.बी.) की पक्षपातपूर्ण रवैये का मुद्दा उठाते हुए, मुख्य मंत्री ने कहा कि बोर्ड का गठन पंजाब पुनर्गठन अधिनियम, 1966 के प्रावधानों के तहत किया गया था, जिसका अधिकार भाखड़ा, नंगल और ब्यास परियोजनाओं से भागीदार राज्यों पंजाब, हरियाणा, राजस्थान, हिमाचल प्रदेश, दिल्ली और चंडीगढ़ को पानी और बिजली की आपूर्ति को नियंत्रित करने के लिए है। उन्होंने कहा कि पिछले समय में पंजाब अपनी पीने के पानी और अन्य वास्तविक जरूरतों को पूरा करने के लिए भागीदार राज्यों के साथ पानी साझा करने में बहुत उदार रहा है क्योंकि पंजाब अपनी पानी की मांग, खासकर धान की फसल के लिए पानी की मांग को पूरा करने के लिए अपने भूजल भंडारों पर निर्भर रहा है। भगवंत सिंह मान ने कहा कि परिणामस्वरूप भूजल का स्तर बहुत हद तक नीचे चला गया है, यहां तक कि पंजाब राज्य के 153 ब्लॉकों में से 115 ब्लॉक, जो कि 76.10 प्रतिशत है, में पानी का स्तर बहुत अधिक नीचे चला गया है और यह प्रतिशत देश के बाकी राज्यों में सबसे अधिक है।

हरीके हेडवर्क्स से गाद निकालने के मुद्दे पर बोलते हुए, मुख्य मंत्री ने कहा कि यह सतलुज और ब्यास नदियों के संगम बिंदु पर स्थित है और दक्षिण-पश्चिमी पंजाब, राजस्थान को पानी की आपूर्ति और पाकिस्तान में प्रवाह को नियंत्रित करने के लिए मुख्य नियंत्रण बिंदु है। उन्होंने कहा कि पिछले वर्षों में इसमें जमा हुई गाद/रेत ने इसकी क्षमता को बहुत कम कर दिया है, जिसके कारण नहरों के सुचारू संचालन के लिए आवश्यक पानी का बैकवॉटर प्रभाव कपूरथला जिले तक महसूस किया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि सतलुज और ब्यास नदी के साथ लगती कृषि भूमि का बड़ा हिस्सा बाढ़ के प्रति संवेदनशील बन रहा है। भगवंत सिंह मान ने कहा कि लगभग 600 करोड़ रुपये की लागत से इस जल भंडार से गाद निकालने की तत्काल जरूरत है। उन्होंने कहा कि चूंकि जल भंडार क्षेत्र को रामसर कन्वेंशन साइट घोषित किया गया है, इसलिए केंद्र सरकार और राजस्थान को इस परियोजना की लागत साझा करनी चाहिए।

इस दौरान, मुख्य मंत्री ने कहा कि जब अब सिंधु नदी का पानी देश के आंतरिक राज्यों को दिया जाना है, तो पंजाब का इस पर प्राथमिक अधिकार है। उन्होंने कहा कि पंजाब लंबे समय से देश की खाद्यान्न आवश्यकताओं को पूरा करता आ रहा है, इसलिए यह बहुत जरूरी है कि इसे अपनी सिंचाई जरूरतों के लिए पानी दिया जाए। भगवंत सिंह मान ने कहा कि राज्य के हितों की हर तरह से रक्षा की जानी चाहिए और इस पर कोई कसर बाकी नहीं छोड़नी चाहिए।

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