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Gaon Gwala Yojana: इस राज्य में चरवाहों की लगी लॉटरी! गाय चराने पर मिलेगा 10000 रुपए का अनुदान, होली से पहले खुला पिटारा

Gaon Gwala Yojana

Picture Credit: गूगल (सांकेतिक तस्वीर)

Gaon Gwala Yojana: कम पढ़े-लिखे लोग जो दर-दर भटकने को मजबूर हैं। ऐसे लोगों की सुधि यदि कोई सरकार लेती है, तो समाज के अंतिम तबके तक लाभ पहुंचता है। राजस्थान सरकार ने ऐसी ही एक पहल की है। दरअसल, राजस्थान के शिक्षा मंत्री मदन सिंह दिलावर ने कोटा जिले की रामगंजमंडी  क्षेत्र की चेचट तहसील के खेड़ली गांव से गांव ग्वाला योजना की शुरुआत की है।

गांव ग्वाला योजना के तहत गाय चराने वाले चरवाहों को 10000 रुपए मासिक अनुदान देने का ऐलान हुआ है। चरवाहों को ये अनुदान भामाशाह सहयोग से दिया जाएगा। ऐसे तमाम कम पढ़े-लिखे लोग जो रोजगार के लिए दर-दर भटक रहे हैं। उनके लिए गांव ग्वाला योजना गेमचेंजर साबित हो सकती है।

चरवाहों को Gaon Gwala Yojana के तहत मिलेगा अनुदान!

राजस्थान के विभिन्न हिस्सों में चरवाहों की लॉटरी लग गई है। राजस्थान सरकार की ओर से होली से पहले गांव ग्वाला योजना की शुरुआत कर पिटारा खोला गया है। गांव ग्वाला योजना के तहत गाय चराने वाले चरवाहों को 10000 रुपए का मासिक अनुदान मिलेगा। खास बात ये है कि चरवाहों को मिलने वाला अनुदान सरकार की बजाय भामाशाह सहयोग से दिया जाएगा।

राज्य सरकार प्रति 70 गायों के लिए 1 चरवाहा नियुक्त करेगी। आगे गायों की संख्या बढ़ने पर चरवाहों की संख्या में इजाफा का विचार किया जाएगा। चरवाहों का काम होगा कि वे गांव की सभी गायों को सुबह ले जाएं और उन्हें चराकर शाम को घर वापस लाएं। गांव ग्वाला योजना का उद्देश्य प्राचीन गोचारण परंपरा को पुनर्जीवित करना है।

जनता तक पहुंचेगा गांव ग्वाला योजना का सीधा लाभ!

राज्य सरकार द्वारा शुरू की गई गांव ग्वाला योजना का सीधा लाभ जनता तक पहुंचेगा। गांव-देहात में ऐसे बहुत से लोग होते हैं जो कम पढ़े-लिखे होने के नाते शरीर से स्वस्थ्य होने पर भी रोजगार के लिए भटकते हैं। ऐसे लोगों को गांव ग्वाला योजना सीधा लाभ पहुंचा सकती है।

इस योजना के तहत ऐसे लोग चरवाहा के रूप में नियुक्त होकर 10000 रुपए मासिक अनुदान का लाभ उठा सकते हैं। इससे वे अपनी आजीविका अच्छे से चलाते हुए आगे का जीवन अच्छी तरह व्यतीत कर सकते हैं। इसे ग्रामीण जीवन के लिए बड़े उपहार के रूप में देखा जा रहा है, जो लोगों को पशुपालन के लिए भी प्रेरित करेगा। निकट भविष्य में इसका सकारात्मक असर दुग्ध उत्पादन पर भी देखने को मिल सकता है।

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