CM Yogi Adityanath: उत्तर प्रदेश की सरकार भूमि और राजस्व से जुड़े विवाद जो लंबे समय से राजस्व न्यायालय में लंबित है और जिनका निस्तारण नहीं हो सका है इसे लेकर निर्देश जारी किए हैं। इसके साथ ही सीएम योगी आदित्यनाथ ने कहा है कि इस पर आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी। इसके साथ ही संबंधित अधिकारयों और कर्मिकों की जवाबदेही तय करते हुए दिखे। इस दौरान सीएम योगी आदित्यनाथ ने बताया कि भूमि और राजस्व से जुड़े विवाद, आमजन जीवन, किसान और सामाजिक सौहार्द से सीधे जुड़े होते हैं और ऐसे में इन मामलों में लापरवाही स्वीकार्य नहीं है।
CM Yogi Adityanath ने राजस्व न्यायालयों में लंबित मुद्दों पर क्या कहा
मुख्यमंत्री @myogiadityanath जी ने आज राजस्व न्यायालयों में लंबित वादों के निस्तारण की प्रगति की उच्चस्तरीय समीक्षा की। उन्होंने निर्देश दिए कि राजस्व मामलों के त्वरित, पारदर्शी और गुणवत्तापूर्ण निस्तारण को शासन की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल किया जाए।
मुख्यमंत्री जी ने कहा… pic.twitter.com/80HJqru8eb
— CM Office, GoUP (@CMOfficeUP) May 23, 2026
इस बारे में जानकारी देते हुए सीएम ऑफिस उत्तर प्रदेश ने कहा, “मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी ने आज राजस्व न्यायालयों में लंबित वादों के निस्तारण की प्रगति की उच्चस्तरीय समीक्षा की। उन्होंने निर्देश दिए कि राजस्व मामलों के त्वरित, पारदर्शी और गुणवत्तापूर्ण निस्तारण को शासन की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल किया जाए।” सीएम योगी आदित्यनाथ ने कहा कि भूमि और राजस्व से जुड़े विवाद आमजन के जीवन, किसान हितों और सामाजिक सौहार्द से सीधे जुड़े होते हैं, इसलिए इन मामलों में अनावश्यक विलंब किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं होगा।
आम नागरिक को शीघ्र न्याय मिलना क्यों जरूरी
इस दौरान सीएम योगी आदित्यनाथ ने स्पष्ट निर्देश दिए कि निर्धारित समय-सीमा के बाद भी लंबित रहने वाले मामलों में संबंधित अधिकारियों और कार्मिकों की जवाबदेही तय करते हुए आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। योगी आदित्यनाथ ने कहा कि तकनीक आधारित व्यवस्था, जवाबदेही और समयबद्ध कार्यप्रणाली के माध्यम से राजस्व न्यायालयों की कार्यक्षमता को और अधिक प्रभावी बनाया जाए, ताकि आम नागरिक को शीघ्र न्याय मिल सके।
सीएम योगी ने रणनीति बनाने का दिया निर्देश
सीएम योगी आदित्यनाथ ने निर्देश दिए कि “निर्धारित समय-सीमा से अधिक अवधि से लंबित वादों का अभियान चलाकर प्राथमिकता के आधार पर निस्तारण किया जाए। मुख्यमंत्री जी ने कहा कि तहसील और जनपद स्तर पर नियमित समीक्षा हो तथा कमजोर प्रदर्शन करने वाले जिलों की जवाबदेही तय की जाए।” उन्होंने कहा कि राजस्व न्यायालयों की कार्यप्रणाली केवल आंकड़ों तक सीमित न रहे, बल्कि आमजन को वास्तविक राहत मिलनी चाहिए। इसके साथ ही जिन जिलों में प्रगति संतोषजनक नहीं है, वहां वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा नियमित मॉनिटरिंग सुनिश्चित की जाए तथा वर्षों से लंबित पुराने मामलों के निस्तारण के लिए विशेष रणनीति बनाई जाए।
