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Mayawati: क्या 2027 विधानसभा चुनाव में असरदार साबित होगी BSP? सपा-भाजपा के समीकरण पर कैसे पड़ सकता है प्रभाव? जानें

बसपा सुप्रीमो Mayawati आज 15 जनवरी को अपना 70वां जन्मदिन मना रही हैं। पिछले दो चुनावों से यूपी में खराब प्रदर्शन कर रही बसपा क्या 2027 में असरदार साबित होगी? क्या बसपा का प्रभुत्व बढ़ेगा? ऐसे तमाम सवाल हैं जो उठ रहे हैं।

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By: Gaurav Dixit

Published: जनवरी 15, 2026 11:50 पूर्वाह्न

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Mayawati: राजधानी लखनऊ के हजरतगंज स्थित बीएसपी कार्यालय पर आज कार्यकर्ताओं का मजमा लगा है। पूर्वांचल से लेकर पश्चिमी यूपी, अवध व ब्रज क्षेत्र के बसपा कार्यकर्ता हाथों में गुलदस्ता लिए पार्टी सुप्रीमो मायावती को 70वें जन्मदिन की बधाई देने पहुंचे हैं। हालांकि, बसपा कार्यकर्ताओं का मजमा पहले की तुलना में फीका है। एक दौर था जब मायावती की बीएसपी अपने बदौलत यूपी की सत्ता में आई थी। 2007-2012 के कार्यकाल के बाद चुनाव दर चुनाव BSP की स्थिति कमजोर होती गई और मायावती को झटका लगता है।

आज जब मायावती अपने 70वें जन्मदिन पर मीडिया से मुखातिब होंगी, तो उनके ज़हन में कई बातें चल रही होंगी। क्या पूर्व सीएम मायावती की पार्टी 2027 विधानसभा चुनाव में छाप छोड़ सकती है? क्या बसपा अपने प्रतिद्वंदी सपा-बीजेपी के समीकरण को प्रभावित कर सकती है? इससे इतर भी तमाम अन्य सवाल हैं जिनका जवाब जानना दिलचस्प है। तो आइए आपको सबकुछ विस्तार से बताते हैं।

क्या 2027 विधानसभा चुनाव में असरदार साबित होगी Mayawati की पार्टी?

आज 15 जनवरी, 2026 को बसपा सुप्रीमो मायावती अपना 70वां जन्मदिन मना रही है। पार्टी की कमान अब उनके भतीजे आकाश आनंद के पास है। यूपी में चंद्रशेखर रावण के रूप में दलितों के एक नेता का उदय भी हो चुका है। ऐसे में बड़ा सवाल है कि 2017 और 2022 विधानसभा चुनाव में बुरी तरह मात खाने वाली बसपा क्या 2027 में असरदार साबित होगी? इसका पुख्ता जवाब तो भविष्य के गर्भ में है। हालांकि, ये जरूर है कि बीएसपी इस दिशा में प्रयास की कोई कसर नहीं छोड़ेगी।

वर्ष 2012 में यूपी की सत्ता से बाहर हुई बसपा अब 2027 के पूरी कमर कस चुकी है। मायावती ‘एकला चलो’ की राह पर अग्रसर हैं। जिस यूपी में 2007 में 206 सीटों पर जीत दर्ज कर बसपा सत्ता में आई थी, उसी यूपी में अब पार्टी को वजूद की लड़ाई लड़नी है। 2007 के बाद वर्ष दर वर्ष बसपा का प्रदर्शन खराब रहा। 2012 में जहां मायावती की पार्टी 80 सीटों पर जीती थी, तो वहीं 2017 में 19 और 2022 में बसपा 1 सीट पर सिमट कर रह गई। ऐसे में 2027 का चुनाव BSP के लिए वजूद बचाने की लड़ाई है जिसके लिए पार्टी हरसंभव प्रयास करेगी।

सपा-भाजपा के समीकरण पर कैसे पड़ सकता है प्रभाव?

यदि बसपा 2027 विधानसभा चुनाव में असरदार साबित होती है, तो इसका सीधा असर बीजेपी-सपा के समीकरण पर पड़ सकता है। कहीं प्रतिद्वंदी दलों को इसका लाभ भी हो सकती है, तो कहीं नुकसान उठाना पड़ सकता है। हाल-फिलहाल की बात करें तो 2024 लोकसभा चुनाव में बीएसपी भले ही खाता नहीं खोल सकी थी, लेकिन उसने समीकरण प्रभावित किया था। 2024 के चुनाव में बीजेपी की जीती हुई 33 सीटों में 16 सीटें ऐसी थीं जहां बसपा को मिले वोट बीजेपी के इंडिया गठबंधन पर जीत के मार्जिन से ज्यादा थे। यदि यहां बसपा का प्रदर्शन गड़बड़ रहता, तो बीजेपी को नुकसान हो सकता था।

विपक्षी दल सपा का समीकरण भी बीएसपी के प्रदर्शन पर काफी हद तक निर्भर करता है। 2019 लोकसभा चुनाव में भी इसका असर देखने को मिला था। वहीं विधानसभा चुनाव 2017 और 2022 में दलितों का अच्छा खासा वोट बीजेपी की ओर शिफ्ट होने की बात कही गई थी। इसका असर ये हुआ कि बीजेपी सत्ता में लौटी। ऐसे में यदि 2027 में बीएसपी फिर असरदार साबित होती है, तो बीजेपी को नुकसान उठाना पड़ेगा। सत्ता किसके हाथ में जाएगी इसका जवाब तो भविष्य के गर्भ में है। लेकिन ये तय है कि यदि मायावती की बसपा सक्रियता के साथ चुनावी मैदान में उतरी, तो 2027 का समीकरण बदल सकती है।

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Gaurav Dixit

गौरव दीक्षित पत्रकारिता जगत के उभरते हुए चेहरा हैं। उन्होनें चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय से अपनी पत्रकारिता की डिग्री प्राप्त की है। गौरव राजनीति, ऑटो और टेक संबंघी विषयों पर लिखने में रुची रखते हैं। गौरव पिछले दो वर्षों के दौरान कई प्रतिष्ठीत संस्थानों में कार्य कर चुके हैं और वर्तमान में DNP के साथ कार्यरत हैं।
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