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Lucknow News: गलत इलाज करना डॉक्टर को पड़ा भारी, कोर्ट ने लगाया 4.5 लाख का जुर्माना, जानें क्या है पूरा मामला

Lucknow News: उत्तर प्रदेश में एक डॉक्टर को गलत इलाज करना भारी पड़ गया। गलत इलाज करने पर कोर्ट ने डॉक्टर पर 4.5 लाख रुपये का जुर्माना लगाया है।

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By: Brijesh Chauhan

Published: अगस्त 5, 2023 2:09 अपराह्न

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Lucknow News: उत्तर प्रदेश में एक डॉक्टर को अपने मरीज का गलत इलाज करना भारी पड़ गया। जी हां, गलत इलाज करने पर कोर्ट ने सजा के रूप में डॉक्टर पर 4.5 लाख रुपये का जुर्माना लगाया है। ये फैसला लखीमपुर खीरी की उपभोक्ता अदालत ने सुनाया है।

कोर्ट ने लखनऊ की किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी में रेडियोथेरेपी विभाग के एक प्रोफेसर को बालों से पीड़ित एक महिला को 7% प्रति वर्ष ब्याज के साथ 4.5 लाख रुपये और मुआवजे के रूप में अतिरिक्त 50,000 रुपये का भुगतान करने का आदेश दिया है।

क्या है मामला ?

ये मामला लखीमपुर खीरी की रहने वाली पीड़िता रानी गुप्ता से जुड़ा है। दरअसल, नवंबर 2007 में जिले के एक निजी नर्सिंग होम में उनके बाएं स्तन में गांठ की सर्जरी हुई थी। नर्सिंग होम से छुट्टी के बाद सर्जन ने उन्हें केजीएमयू के एक वरिष्ठ डॉक्टर से परामर्श की सलाह दी थी। सर्जन के कहे अनुसार रानी गुप्ता ने दिसंबर 2007 में केजीएमयू के ओपीडी में अपनी मेडिकल रिपोर्ट दिखाई, जहां वरिष्ठ डॉक्टर ने कई सारे टेस्ट कराने के बाद उन्हें कीमोथेरेपी कराने की सलाह दी थी।

ऐसे हुआ मामले का खुलासा

इसके बाद रानी ने 1 जनवरी से 3 जनवरी 2008 के बीच कीमोथेरेपी करवाई। उन्हें फरवरी में फिर आने को कहा गया था। इस बीच कीमोथेरेपी के कारण मानसिक रूप से थक चुकी पीड़िता ने मुंबई स्थित एक कैंसर विशेषज्ञ को अपनी रिपोर्ट दिखाई। जहां डॉक्टरों ने पुष्टि की कि वह स्वस्थ हैं और उनमें कैंसर के कोई लक्षण नहीं है। इसके बाद पीड़ित ने उपभोक्ता आयोग का में इसकी शिकायत की।

जांच के लिए हुआ था समिति का गठन

उपभोक्ता आयोग के निर्देश के आधार पर केजीएमयू ने गांधी मेमोरियल और संबंधित अस्पतालों के मुख्य चिकित्सा अधीक्षक को शामिल करते हुए एक समिति का गठन किया। समिति ने निष्कर्ष निकाला कि रेडियोथेरेपी विभाग के वरिष्ठ डॉक्टर ने केवल रक्त परीक्षण, अल्ट्रासाउंड और छाती का एक्सरे किया। अन्य कोई जांच नहीं की गई।

समिति ने डॉक्टर को पाया दोषी

समिति ने कहा था कि यह सुनिश्चित करने के लिए कि मरीज को कैंसर है या नहीं, सबसे अच्छा तरीका किसी विशेषज्ञ रोगविज्ञानी द्वारा स्लाइड और ब्लॉक की समीक्षा करवाना था। समिति के निष्कर्षों के आधार पर उपभोक्ता आयोग ने वरिष्ठ डॉक्टर को एक महीने में मुआवजा देने का आदेश दिया है।

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Brijesh Chauhan

बृजेश बीते 4 सालों से पत्रकारिता के क्षेत्र से जुड़े हुए हैं। इन्होंने हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में M.A की पढ़ाई की है। यह कई बड़े संस्थान में बतौर कांटेक्ट एडिटर के तौर पर काम कर चुके हैं। फिलहाल बृजेश DNP India में बतौर कांटेक्ट एडिटर पॉलिटिकल और स्पोर्ट्स डेस्क पर अपनी सेवाएं दे रहे हैं।
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