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Lucknow News: SIR में राजधानी से ही क्यों कटे सर्वाधिक नाम? सामने आया मतदाताओं की संख्या में गिरावट का संभावित कारण, झटपट करें चेक

Lucknow News: SIR के दौरान राजधानी लखनऊ में मतदाताओं की संख्या में गिरावट के कुछ संभावित कारण हैं। जैसे सरकारी कर्मचारियों का स्थानांतरण या उनके द्वारा पैतृक निवास को प्राथमिकता देना।

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Picture Credit: गूगल (सांकेतिक तस्वीर)

Lucknow News: ड्राफ्ट मतदाता सूची जारी होने के बाद भी यूपी में सियासी उठा-पटक का दौर जारी है। तमाम आरोप-प्रत्यारोप के बीच सबकी नजरें राजधानी लखनऊ पर टिकी हैं जहां मतदाताओं की संख्या में भारी गिरावट दर्ज की गई है। SIR प्रक्रिया के दौरान जारी ड्राफ्ट सूची के तहत लखनऊ में 30.94 फीसदी मतदाताओं के नाम कटे हैं तो संख्या में लगभग 12 लाख हुए।

इतनी बड़ी संख्या में मतदाताओं का नाम कटने के बाद तमाम तरह की संभावनाएं व्यक्त की जा रही हैं। इस बीच कुछ संभावित कारण सामने आए हैं। दावा किया जा रहा है कि लखनऊ राज्य की राजधानी है। ऐसे में यहां पूरे प्रदेश से लोग आकर रहते हैं। ऐसे में नौकरी में स्थानांतरण और लोगों का अपने ग्रामीण या पैतृक क्षेत्र को प्राथमिकता देना बड़ी संख्या में नाम कटने का कारण हो सकता है।

लखनऊ में मतदाताओं की संख्या में गिरावट का संभावित कारण

इसको लेकर तरह-तरह के तर्क पेश किए जा रहे हैं। राजधानी में 30 फीसदी से ज्यादा मतदाताओं के नाम कटना सामान्य बात तो है नहीं। यही वजह है कि सुर्खियों का बाजार गर्म है। इस बीच आसार जताए जा रहे हैं कि लखनऊ के विभिन्न हिस्सों नें कार्यरत रक्षा कर्मियों, अन्य सरकारी कर्मचारियों की स्थानांतरणीय नौकरियां या उनके द्वारा अपने ग्रामीण या पैतृक क्षेत्र को प्राथमिकता देना मतदाताओं की संख्या में गिरावट का कारण हो सकता है। चुनाव आयोग का भी तर्क कमोबेश यही है कि बाहर से आकर लखनऊ में बसे कई लोग या तो चले गए हों या उनका डुप्लीकेट रजिस्ट्रेशन हो। इसी वजह से 30 फीसदी से ज्यादा मतदाताओं के नाम कट सकते हैं।

ड्राफ्ट मतदाता सूची को लेकर मचा हो-हल्ला

यूपी में मतदाताओं की ड्राफ्ट सूची सामने आने के बाद से लगातार हो-हल्ला का दौर जारी है। इस क्रम में कई तरह के आरोप भी लगाए गए हैं। मालूम हो कि यूपी भर में 2.89 करोड़ मतदताओं की संख्या कम हुई है जिसमें लगभग 12 लाख से अधिक मतदाता लखनऊ में कम हुए हैं। जिलावाइज ये संख्या 30 फीसदी से ज्यादा होती है। हालांकि, आपत्ति जताने और सुधार के लिए 6 फरवरी, 2026 तक का समय मिला है। इस समयावधि में जिन मतदाताओं का नाम छूट गया है या कोई त्रुटी है। वे पुन: आवेदन कर सही करा सकते हैं। अंतिम सूची सामने आने के बाद मतदाताओं की वास्तविक संख्या सामने आ सकेगी।

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