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Janaki Jayanti 2024: कब है जानकी जयंती? यहां जानें विशेष दिन का शुभ मुहूर्त और महत्व

Janaki Jayanti 2024: सनातन धर्म में हिंदूओं के कई प्रमुख त्योहार आते हैं। वहीं, अब फाल्गुन मास चल रह है। हिंदू धर्म में फाल्गुन मास का विशेष महत्व माना गया है। जहां इस महीने में हिंदूओं का बड़ा पर्व यानि होली का त्योहार मनाया जाता है। वहीं, इस महीने में जानकी जयंती भी मनाई जाती ...

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By: DNP न्यूज़ डेस्क

Published: फ़रवरी 27, 2024 6:14 अपराह्न

Janaki Jayanti 2024
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Janaki Jayanti 2024: सनातन धर्म में हिंदूओं के कई प्रमुख त्योहार आते हैं। वहीं, अब फाल्गुन मास चल रह है। हिंदू धर्म में फाल्गुन मास का विशेष महत्व माना गया है। जहां इस महीने में हिंदूओं का बड़ा पर्व यानि होली का त्योहार मनाया जाता है। वहीं, इस महीने में जानकी जयंती भी मनाई जाती है। यह दिन माता सीता को समर्पित होता है। वहीं, इस दिन को सीता अष्टमी भी कहते हैं। इस दिन मां जानकी की पूजा अर्चना की जाती है। तो वहीं कुछ महिलाएं इस दिन व्रत किया करती है। व्रत करने से उनके घर ​परिवार में सुख समृद्धि आती है। साथ ही वह अपनी पति की लंबी उम्र के लिए व्रत किया करती है।

Janaki Jayanti 2024 का शुभमुहूर्त

फाल्गुन मास में कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि 3 मार्च सुबह 8:44 मिनट पर होगी। वहीं, इस तिथि का समापन 04 मार्च को सुबह 8:49 मिनट पर होगा। तो इसलिए जानकी जयंती का त्योहार 04 मार्च को मनाया जाएगा।

क्यों मनाई जाती है जानकी जयंती?

पौराणिक कथा के मुताबिक, जब मिथिला नरेश राजा जनक के राज्य में अकाल पड़ा था। तब उस समस्या से मुक्ति पाने के लिए राजा जनक ने अपने गुरू के कहे अनुसार, एक सोने का हल बनवाया और उससे भूमि जोतने लगे। इस दौरान उन्हें एक मिट्टी के बर्तन में उन्हें कन्या मिली। माना जाता हैकि, जोती हुई भूमि और हल की नोक को सीत कहा जाता है। इसलिए उसका नाम सीता रखा गया। मिथिला में इस दिन को बहुत ही उत्साह के साथ मनाया जाता है।

जानकी जयंती के दिन करें ये काम

  • यदि आपको जानकी जयंती के​ दिन माता सीता की विशेष कृपा पानी है तो उसके लिए आपको कुछ कार्य करने होंगे। आपको सबसे पहले ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करना होगा।
  • उसके बाद आपको घर के मंदिर में दीप प्रज्वलित करना होगा। यदि आप व्रत रख रहें है तो पूजा करते समय आपको संकल्प लेना है।
  • सीता माता की पूजा के साथ साथ भगवान राम का ध्यान लगाएं और उनसे अपनी मनोकामना के लिए प्रार्थना करें।
  • शाम के समय सीता जी और राम जी की पूजा करने के बाद भोग लगाकर। भोग को प्रसाद के रूप में बांटे और अपना व्रत खोलें।

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