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Nachiketa: जिज्ञासु ऋषि-बालक की अनोखी कहानी! यमराज ने जिन्हें खुद सिखाया मौत के बाद क्या होता है? जानें कठोपनिषद का रहस्य

Nachiketa वो जिज्ञासु ऋषि-बालक हैं जिन्होंने यमराज के पास जाकर आत्मज्ञान हासिल किया। कठोपनिषद में दर्ज नचिकेता की कहानी बहुत प्रेरक है जिसके बारे में हम आपको बताएंगे।

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By: Gaurav Dixit

Published: फ़रवरी 11, 2026 3:04 अपराह्न

Nachiketa
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Nachiketa: शास्त्रों और धर्मग्रंथों में तमाम ऐसी प्रेरक बातें सुनने को मिलती हैं जो लोगों को अंदर से प्रभावित करती हैं। कई ऐसे पात्र होते हैं जो सभी के लिए प्रेरक होते हैं। ऐसा ही एक नाम है जिज्ञासु ऋषि-बालक नचिकेता का जो वैदिक काल के तेजस्वी बालक थे।

नचिकेता की महानता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि उन्होंने धन-दौलत, ऐश्वर्य को छोड़ आत्मज्ञान को चुना। नचिकेता यमराज के समक्ष ब्रह्मविद्या हासिल करने के लिए जिद पर अड़ गए। अंतत: यमराज ने उनकी जीजीविषा और त्याग देख उन्हें बताया कि मौत के बाद क्या होता है। तो आइए हम आपको ऐसे नचिकेता के बारे में कुछ रोचक बातें बताते हैं।

जिज्ञासु ऋषि-बालक Nachiketa की अनोखी कहानी!

धर्मग्रंथों के अनुसार नचिकेता का जन्म वैदिक युग में ऋषि वाजश्रवस के घर हुआ था। अल्पायु में ही उनका जिज्ञासु स्वभाव सामने आने लगा। नचिकेता ने एक बार अपने पिता को गाय दान करते देखा। उन्होंने पूछा कि वे नचिकेता को किसे दान करेंगे। गुस्साए ऋषि वाजश्रवस ने उन्हें यमराज को दान देने का जिक्र किया। यहीं से शुरू हुई जिज्ञासु ऋषि बालक नचिकेता की खोज।

वे यमलोक की यात्रा पर निकले तीन दिनों तक यमराज के लौटने की प्रतीक्षा की। नचिकेता के स्वभाव से प्रसन्न यमदेव ने उन्हें राज्य, धन, अप्सराएं सब कुछ देने की पेशकश की, लेकिन वे अड़े रहे। अंतत: उन्हें यमराज द्वारा अग्नि विद्या और अमरता का ज्ञान प्राप्त हुआ। इस आत्मज्ञान ने नचिकेता को जन्म-मरण से मुक्त और ब्रह्मा स्वरूप होने का गूढ़ ज्ञान दिया, जो ‘कठोपनिषद’ का मुख्य सार है।

वो बालक जिसने स्वर्ग, धन-दौलत ठुकराकर आत्मा का ज्ञान मांगा – Swami Vivekananda की पसंदीदा कहानी 

नचिकेता सिर्फ एक वीर ऋषि बालक का नाम नहीं, बल्कि साहस, शौर्य और सत्य के मार्ग पर चलने का पर्याय है। जिज्ञासु बालक नचिकेता की वीरता ने स्वामी विवेकानंद को भी प्रभावित किया और कठोपनिषद में दर्ज ये पात्र उनका पसंदीदा बन गया। नचिकेता वो नाम है जिसने अल्पायु में ही यमराज के पास जाने का साहसी निर्णय लिया था।

भौतिक सुखों के बजाय शाश्वत सत्य को चुनने वाले नचिकेता आज के दौर के लिए प्रेरक हैं। स्वर्ग, धन, दौलत ठुकरा कर ज्ञान के पीछे भागने वाले नचिकेता दूसरों को प्रेरणा देते हैं। लोगों को इस पात्र से सीख मिलती है कि सत्य के मार्ग पर चलते हुए आपको ज्ञान की प्राप्ति हो सकती है।

Disclaimer: यहां साझा की गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं मिलता है। डीएनपी इंडिया/लेखक इन बातों की सत्यता का प्रमाण नहीं प्रस्तुत करता है।

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Gaurav Dixit

गौरव दीक्षित पत्रकारिता जगत के उभरते हुए चेहरा हैं। उन्होनें चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय से अपनी पत्रकारिता की डिग्री प्राप्त की है। गौरव राजनीति, ऑटो और टेक संबंघी विषयों पर लिखने में रुची रखते हैं। गौरव पिछले दो वर्षों के दौरान कई प्रतिष्ठीत संस्थानों में कार्य कर चुके हैं और वर्तमान में DNP के साथ कार्यरत हैं।
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