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Rishyasringa: वो ऋषि जिसने जीवन में कभी औरत नहीं देखी थी! जानें महर्षि ऋष्यश्रृंग की अनोखी कहानी जो राम के जन्म का कारण बने

महर्षि Rishyasringa ऐसे ऋषि थे जिन्होंने अपना जीवन जंगल में रहते हुए कंद-मूल खाकर गुजारा था। ऋष्यश्रृंग ने ही राजा दशरथ के निमंत्रण पर अयोध्या पहुंचकर यज्ञ किया था जिसके बाद प्रभु श्रीराम, लक्ष्मण, भरत और शत्रुघ्न का जन्म हुआ।

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By: Gaurav Dixit

Published: फ़रवरी 10, 2026 6:21 अपराह्न

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Rishyasringa: पुराणों और शास्त्रों के माध्यम से ऐसी तमाम कहानियां सुनने को मिल जाती हैं, जो लोगों का ध्यान आकर्षित करती हैं। ऐसे ही एक महर्षि की चर्चा हम करने वाले हैं जिनके बारे में जानकर लोगों को हैरानी हो सकती है। सोचिए क्या कोई इंसान होगा जिसने अपने जीवन में कभी किसी स्त्री को नहीं देखा हो? आम तौर पर ज्यादार लोगों के जवाब ना ही होंगे। हालांकि, ना जवाब वाले गलत हैं।

महर्षि ऋष्यश्रृंग ऐसे ऋषि थे जिन्होंने मोह-माया से दूर अपना जीवन यापन किया। ऋष्यश्रृंग की कहानी इतनी दिलचस्प है कि इसे रामायण और महाभारत दोनों में जगह मिली है। दोनों महाकाव्यों में ऋष्यश्रृंग का जिक्र है। महर्षि ऋष्यश्रृंग ही थे जो आगे चलकर प्रभु श्रीराम के जन्म का कारण बने। ऐसे में आइए हम आपको इस अनोखी कहानी से परिचित कराते हैं।

हिरण के सींग वाले Rishyasringa जिन्होंने राजा दशरथ के लिए यज्ञ कराया और राम का जन्म संभव बनाया

धर्मग्रंथों में दर्ज जानकारी के मुताबिक हिरण की सींग वाले महर्षि ऋष्यश्रृंग का योगदान बेहद अहम है। जब अयोध्या नरेश सूर्यवंशी राजा दशरथ को संतान की प्राप्ति नहीं हो रही थी, तब उनके मंत्री सुमंत्र ने उन्हें ऋष्यश्रृंग ऋषि को यज्ञ के लिए बुलाने की सलाह दी। महर्षि ऋष्यश्रृंग की उपस्थिति में यज्ञ संपन्न हुआ जिसके प्रभाव से अग्नि से एक दिव्य पुरुष ने आकर दशरथ को खीर दी।

इस खीर को खाने वाली रानियों कौशल्या, कैकेयी और सुमित्रा से क्रमश: राम, लक्ष्मण, भरत और शत्रुघ्न जैसे पुत्रों की प्राप्ति हुई। दशरथ ने अपनी दत्तक पुत्री शांता से बाद में ऋष्यश्रृंग का विवाह कराया। ऋषि ऋष्यश्रृंग के चरण इस कदर पवित्र थे कि जब अंग देश में सूखा पड़ा था तब राजा लोमपाद के निमंत्रण पर वे पहुंचे थे। उनके चरण पड़ते ही अंग देश में वर्षा होने लगी और जीव-जंतु खुशी से झूम उठे।

मोह-माया से कोसों दूर रहे ऋषि ऋष्यश्रृंग 

शुरुआती जीवन अपने पिता के साथ जंगलों में काटने वाले ऋष्यश्रृंग मोह-माया की दुनिया से कोसों दूर रहे थे। उनके पिता विभांडक ने जंगल में ही उनका पालन-पोषण किया और उन तक औरतों की छाया तक नहीं पहुंचने दी। महर्षि ऋष्यश्रृंग जंगलों में कंद-मूल फल खाकर अपना गुजारा करते थे। वे दुनिया से अनजान थे। शास्त्रों के मुताबिक उन्होंने पहली बार राजा रोमपद की पुत्रियों को जंगल में देखा था जिन्हें स्वयं राजा ने महर्षि को रिझाने के लिए भेजा था।

वे दासियों की कोमलता देख मोहित जरूर हुए, लेकिन उन्हें पुरुष ही समझा। महर्षि ऋष्यश्रृंग इस कदर मोह-माया से दूर रहे थे कि उनकी इस अदा को जान लोगों को हैरानी होती है। अपने पवित्र चरित्र के कारण उन्हें महाभारत और रामायण जैसे महाकाव्यों में भी जगह मिली है। दुनिया आज भी महर्षि को पूजती है और उनकी प्रार्थना करती है।

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Gaurav Dixit

गौरव दीक्षित पत्रकारिता जगत के उभरते हुए चेहरा हैं। उन्होनें चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय से अपनी पत्रकारिता की डिग्री प्राप्त की है। गौरव राजनीति, ऑटो और टेक संबंघी विषयों पर लिखने में रुची रखते हैं। गौरव पिछले दो वर्षों के दौरान कई प्रतिष्ठीत संस्थानों में कार्य कर चुके हैं और वर्तमान में DNP के साथ कार्यरत हैं।
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