Mahabharat: मौत जीवन की सबसे बड़ी सच्चाई है जिस पर कंट्रोल नहीं किया जा सकता। जब इस दुनिया में आपका समय खत्म हो जाता है तो आपको चाह कर भी कोई नहीं बचा सकता लेकिन महाभारत की एक कहानी ने हर किसी को हैरान कर दिया है। हम बात कर रहे हैं सावित्री की जो अपने पति सत्यवान को मौत से इस तरह बचाया कि यह एक कहानी बन गई है। क्या आप यमराज को हरा सकते हैं। सावित्री ने ऐसा ही कुछ किया था। यह बताता है कि कैसे एक स्त्री सिर्फ बुद्धिमत्ता और से मृत्यु के देवता को भी मात दे दी है। आइए जानते हैं महाभारत के वन पर्व की कहानी।
पति की हुई मौत तो यमराज के पीछे पड़ी सावित्री
जहां तक सावित्री और यमराज के बीच संवाद की बात करें तो यह हर पतिव्रता धर्म और बुद्धिमत्ता का एक उदाहरण है जहां सावित्री ने अपने तर्कों से यमराज को प्रसन्न कर अपने पति के के प्राण वापस ले लिए थे। इस दौरान न सिर्फ पति की जान बल्कि ससुर के नेत्र और राज्य के साथ-साथ यमराज को बेबकूफ बनाया। दरअसल महाभारत की इस कहानी की बात करें तो यमराज सत्यवान के प्राण लेकर जा रहा था तब सावित्री ने अपने पत्नी होने के बल पर पीछे हटने से मना कर दिया और यमराज का पीछा करती रही।
वन पर्व की अनकही कहानी जहां सावित्री के वरदान के आगे नतमस्तक हुए यमराज
इतने जब यमराज ने सावित्री का समर्पण देखा तब उन्होंने कहा कि देवी तुम मुझसे कोई भी वरदान मांगो लेकिन यहां से लौट जाओ। तब सावित्री ने यमराज से कहा मेरे सास ससुर बनवासी और अंधे हैं। ऐसे में आप उन्हें आंखों की रोशनी लौटा दे यमराज ने ऐसा किया लेकिन सावित्री फिर पीछे चलती रही और उन्होंने कहा कि मैं अपने पति के पीछे चल सकती हूं यह मेरा हक है और कर्तव्य भी। ऐसे में यमराज ने एक और वरदान दिया तब सावित्री ने कहा मेरे ससुर एक राजा थे लेकिन दुश्मनों ने उनका सब छीन लिया उन्हें दोबारा राज्य दे दीजिए। वहीं ऐसा करते-करते सावित्री सत्यवान के साथ यमलोक पहुंच गए।
इस तरह सावित्री ने यमराज को दिया था चकमा
ऐसे में यमराज ने एक और वरदान देने की बात की जिस पर सावित्री ने 100 संतान और अखंड सौभाग्यवती बनने का वरदान मांगा। यमराज ने तथास्तु कहा लेकिन बाद में सावित्री ने कहा कि मैं एक पतिव्रता पत्नी हूं और मुझे पुत्रवती होने का आशीर्वाद दिया है। आप मेरे पति को अपने साथ लेकर जा रहे हैं आपका यह वरदान कैसे पूरा होगा। ऐसे में यमराज को सत्यवान के प्राण लौटाने पड़े थे।
हर महिला के लिए खास है महाभारत की कहानी
महाभारत की वन पर्व यानी तीसरे खंड में सत्यवान और सावित्री कि यह कहानी सती वरदान धर्म की सर्वोच्च विशाल है जो सिखाती है कि सच्ची पतिव्रता नारी अपनी बुद्धि से न केवल पति को बल्कि पूरे परिवार को संकट से उबार सकती है। एक पतिव्रता पत्नी हर किसी के भाग्य को बदल सकती है।






