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Shabari Jayanti 2023 के दिन इस विधि विधान से करें माता शबरी की पूजा, भगवान राम की बनी रहेगी कृपा

Shabari Jayanti 2023: रामायण की कथा से तो आप सभी अवगत होंगे। इस कथा में मां शबरी का वर्णन भी बेहद खूबसूरत ढंग से किया गया है। वहीं हर वर्ष फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की सप्तमी तिथि को शबरी जयंती का त्योहार मनाया जाता है। इस वर्ष ये पर्व आज के ही दिन मनाया ...

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By: Sriya Sri

Published: फ़रवरी 13, 2023 1:44 अपराह्न

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Shabari Jayanti 2023: रामायण की कथा से तो आप सभी अवगत होंगे। इस कथा में मां शबरी का वर्णन भी बेहद खूबसूरत ढंग से किया गया है। वहीं हर वर्ष फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की सप्तमी तिथि को शबरी जयंती का त्योहार मनाया जाता है। इस वर्ष ये पर्व आज के ही दिन मनाया जा रहा है। इसलिए आज इस आर्टिकल में माता शबरी की पूजा विधि और उनके धाम के विषय में जानेंगे।

जानें कहा है माता शबरी का पावन धाम

रामायण की कथा में आपने देखा होगा कि माता शबरी भगवान राम को झूठे बेर बड़े प्यार से खलाई थी और भगवान का स्वागत भी बड़े प्रेम से की थी। आपको बता दें, जिस स्थान पर माता शबरी और भगवान राम का मिलन हुआ था। वो स्थान आज भी स्थित है। जी हां, आज भी वो पवित्र स्थान छत्तीसगढ़ के शिवरीनारायण पूरी के नाम से जाना जाता है। ये जगह बिलासपुर से 64 किलोमीटर की दूरी पर स्थिति है। वहां पर एक महानदी है जहां पर माता शबरी का धाम है। वहीं पर माता शबरी मतंग ऋषि के आश्रम में रहती थी। मतंग ऋषि ने शबरी से कहा था कि उनसे एक दिन भगवान राम और लक्ष्मण मिलने इस आश्रम आएंगे। आज भी ये आश्रम शिवरीनारायण नगर में स्थित है।

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शबरी जयंती के दिन ऐसे करें माता की पूजा

स्टेप 1: सबसे पहले इस दिन सुबह उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें।

स्टेप 2: अब सबसे पहले सूर्य देव को जल अर्पित करें और भगवान राम की पूजा करें।

स्टेप 3: इस दिन सूर्य देव की आराधना पूरे विधि विधान से करनी चाहिए।

स्टेप 4: अब एक चौकी पर पीला वस्त्र बिछाएं और उसपर भगवान राम और माता शबरी की फोटो स्थापित करें।

स्टेप 5: अब गंगाजल से स्नान करवाएं और धूप-दीप और फूल-अक्षत से पूजा करें।

स्टेप 6: आज के दिन भोग में बेर जरूर अर्पित करें। इससे भगवान राम प्रसन्न हो जाते हैं और भक्तों पर अपनी कृपा बरसाते हैं।

स्टेप 7: पूजा के अंत में भगवान राम की स्तुति करें और पूजा का समापन करें।

जानें भगवान राम और माता शबरी के मिलन की कथा

रामायण काल में जब भगवान राम वनवास में थे। तब उनकी और लक्ष्मण की मुलाकात माता शबरी से उनके आश्रम में हुई। तभी माता शबरी भगवान राम को भोजन के लिए बेर दी। मगर वो नहीं चाहती थी कि भगवान राम झूठे बेर खाएं। इसलिए वो खुद से चख-चख कर भगवान राम को बेर खिलाई। इस भक्ति को देखकर भगवान राम प्रसन्न हो गए। इस तप और भक्ति से माता शबरी को वैकुंठ धाम प्राप्त हुआ।

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Sriya Sri

मेरा नाम श्रीया श्री है। मैं पत्रकारिता अंतिम वर्ष की छात्रा हूं। मुझे लिखना बेहद पसंद है। फिलहाल मैं डीएनपी न्यूज नेटवर्क में कंटेंट राइटर हूं। मुझे स्वास्थ्य से जुड़ी कई चीजों के बारे में पता है और इसलिए मैं हेल्थ पर आर्टिकल्स लिखती हूं। इसके अलावा मैं धर्म, लाइफस्टाइल, एस्ट्रोलॉजी और एजुकेशन के विषय में भी आर्टिकल लिखती हूं।
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